UP: नवाबों के बसाए लखनऊ को योगी देंगे सनातनी पहचान, सात एंट्री प्वाइंट पर बनेंगे गुलाबी बलुआ पत्थर के प्रवेश द्वार
By राजेंद्र कुमार | Updated: January 31, 2026 17:54 IST2026-01-31T17:54:34+5:302026-01-31T17:54:34+5:30
सीएम योगी आदित्यनाथ ने लखनऊ को भव्य, आकर्षक और विशिष्ट सांस्कृतिक स्वरूप देने के लिए शहर के सात प्रमुख प्रवेश मार्गों पर भव्य प्रवेश द्वार बनाए जाने का निर्देश दिया है.

UP: नवाबों के बसाए लखनऊ को योगी देंगे सनातनी पहचान, सात एंट्री प्वाइंट पर बनेंगे गुलाबी बलुआ पत्थर के प्रवेश द्वार
लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ को नवाब आसफ-उद-दौला ने 250 साल पहले बसाया था. तब से लेकर अब तक इस शहर में तमाम बदलाव हुए.नवाबों की बनाई इमारतों के मौजूद रहते हुए इस शहर में बड़ी-बड़ी मल्टीस्टोरी बिल्डिंग बन गई, मैट्रो चलने लगी. फाइव स्टार होटल बने, तमाम बड़े पार्क बने, अस्पताल बने, यूनिवर्सिटी बनी, लेकिन शहर में एंट्री करने वाले मार्ग पर एक भी भव्य प्रवेश द्वार नहीं बना. शायद यह खामी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को अखर रही थी. यही वजह है कि उन्होंने अब लखनऊ को भव्य, आकर्षक और विशिष्ट सांस्कृतिक स्वरूप देने के लिए शहर के सात प्रमुख प्रवेश मार्गों पर भव्य प्रवेश द्वार बनाए जाने का निर्देश दिया है.
मुख्यमंत्री चाहते हैं कि राजधानी में प्रवेश करते ही यूपी की समृद्ध सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और ऐतिहासिक पहचान स्पष्ट रूप से दिखाई देनी चाहिए. सीएम योगी की इस मंशा को पूरा करने के लिए अब लखनऊ के सात एंट्री मार्गों पर सनातनी पहचान को प्रदर्शित करने वाले गुलाबी बलुआ पत्थर के सात प्रवेश द्वार बनाए जाएंगे. हर प्रवेश द्वार के निर्माण पर करीब 35 लाख रुपए का खर्च आएगा. अयोध्या में ऐसे कई गेट बनाए गए हैं.
इन मार्गों पर बनेगे प्रवेश द्वार
लखनऊ शहर में भव्य प्रवेश द्वार बनाने की जिम्मेदारी लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) को सौंपी गई है. एलडीए के उपाध्यक्ष (वीसी) प्रथमेश कुमार के अनुसार, मुख्यमंत्री की मंशा को पूरा करने के लिए भारतीय संस्कृति में प्रमुख माने गए सात नगरों और मोक्षदायिनी मानी गई सात पवित्र नदियों को ध्यान में रखते हुए लखनऊ में सात दिव्य और भव्य सात प्रवेश द्वार बनाए जाएंगे.
यह प्रवेश द्वार अपने में भव्य और विशिष्ट सांस्कृतिक स्वरूप को समेटे होंगे. लखनऊ में प्रवेश करते ही यह प्रवेश द्वार धर्म नगरी का अहसास कराएगे. प्रथमेश कुमार के मुताबिक लखनऊ से प्रयागराज, वाराणसी, अयोध्या, नैमिषारण्य, हस्तिनापुर, मथुरा और झांसी की ओर जाने वाले प्रमुख मार्गों पर संबंधित सांस्कृतिक और धार्मिक गंतव्यों की पहचान को दर्शाने वाले प्रवेश द्वार बनाए जाएं.
हर प्रवेश द्वार उस गंतव्य की पौराणिक, ऐतिहासिक और आध्यात्मिक विरासत को प्रतिबिंबित करने वाला होगा. कारपोरेट-सोशल रिस्पांसिबिलिटी यानी सीएसआर के फंड से एलडीए यह निर्माण कराएगा. लखनऊ से अयोध्या मार्ग के मार्ग पर बनने वाला प्रवेश द्वार गुलाबी बलुआ पत्थर पर सोने की नक्काशी से चमकेगा और धनुष-बाण का प्रतीक भगवान श्रीराम का स्मरण कराएं. इसमें पारंपरिक वास्तुकला और कमल के रूप वाले पत्थर लगे होंगे.
किस रोड पर क्या होगा प्रवेश द्वार का नाम
प्रथमेश कुमार के अनुसार के अनुसार, शहर के मुख्य प्रवेश द्वारों का नामकरण और स्वरूप को मुख्यमंत्री की सहमति मिल गई है. जिसके चलते लखनऊ-प्रयागराज मार्ग (रायबरेली रोड) पर त्रिवेणी संगम और महाकुंभ परंपरा को दर्शाने वाला संगम द्वार बनेगा, इसी प्रकार वाराणसी मार्ग (सुल्तानपुर रोड) पर श्री काशी विश्वनाथ धाम को दर्शाने वाला नंदी द्वार और अयोध्या मार्ग (बाराबंकी रोड) पर भगवान श्रीराम और सूर्यवंशी की परंपरा पर आधारित सूर्य द्वार बनेगा.
इसी प्रकार नैमिषारण्य मार्ग (सीतापुर रोड) पर व्यास द्वार, हस्तिनापुर मार्ग (हरदोई रोड) पर धर्म द्वार, मथुरा मार्ग (आगरा रोड) पर कृष्ण द्वार और झांसी मार्ग (उन्नाव रोड) पर वीरता और शौर्य का प्रतीक शौर्य द्वार बनाया जाएगा. हर प्रवेश द्वार पर उत्तर प्रदेश का पीतल की लाट वाला राजकीय चिन्ह दर्शाया जाएगा. इन प्रवेश द्वारों के डिजाइन में भारतीय पारंपरिक वास्तुकला, शिल्पकला और सांस्कृतिक प्रतीकों का प्रभावी समावेश करने के निर्देश मुख्यमंत्री योगी ने दिए है.
यह भी कहा है कि पत्थर की नक्काशी, स्तंभ, म्यूरल,फव्वारे, प्रकाश व्यवस्था और हरित परिदृश्य के माध्यम से प्रवेश द्वारों को न केवल सौंदर्यपूर्ण बल्कि अर्थपूर्ण बनाया जाए, जिससे यात्रियों को लखनऊ में प्रवेश करते ही सांस्कृतिक अनुभूति प्राप्त हो.