बेसिक शिक्षा विभाग में सहायक अध्यापकों के 46,944 पद खाली?, शिक्षामित्रों का मानदेय बढ़ाने में फैसला लेने में लगेगा वक्त 

By राजेंद्र कुमार | Updated: February 18, 2026 18:13 IST2026-02-18T18:12:18+5:302026-02-18T18:13:01+5:30

संदीप सिंह ने सदन सदन में यह ऐलान किया कि सूबे में कार्यरत करीब 1.43 लाख शिक्षामित्रों के मानदेय में इजाफ़ा करने, उनके लिए कैशलेस चिकित्सा सुविधा का आदेश जारी करने और ग्राम पंचायत में शिक्षामित्रों की तैनाती के संबंध में फैसला लेने में अभी वक्त लगेगा.

up sarkar jobs naukari 46944 assistant teacher posts vacant Basic Education Department take time decide increasing honorarium Shikshamitras | बेसिक शिक्षा विभाग में सहायक अध्यापकों के 46,944 पद खाली?, शिक्षामित्रों का मानदेय बढ़ाने में फैसला लेने में लगेगा वक्त 

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Highlightsजल्दी ही इस संबंध में शिक्षामित्रों के हित में फैसला लिया जाएगा.मुख्यमंत्री योगी ने शिक्षामित्रों के कैशलेस इलाज की सुविधा भी ऐलान किया था ऐलान भी बेसिक शिक्षा मंत्री ने बुधवार को नहीं किया.

लखनऊः उत्तर प्रदेश की विधानसभा में सूबे के बेसिक शिक्षा मंत्री  संदीप सिंह ने बुधवार को लगातार दूसरे दिन विभागीय शिक्षकों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया. राज्य के बेसिक शिक्षा विभाग में सहायक अध्यापकों के 46,944 पद खाली हैं. शिक्षकों को उम्मीद थी कि इन पदों को भरने के लिए सरकार  घोषणा करेंगी, इसके विपरीत बेसिक शिक्षा मंत्री ने मंगलवार को यह ऐलान कर दिया कि परिषदीय विद्यालयों में सहायक अध्यापकों रिक्त 46,944  रिक्त पदों को भरने के लिए फिलहाल सरकार की कोई योजना नहीं है.

इसकी बाद बुधवार को संदीप सिंह ने सदन सदन में यह ऐलान किया कि सूबे में कार्यरत करीब 1.43 लाख शिक्षामित्रों के मानदेय में इजाफ़ा करने, उनके लिए कैशलेस चिकित्सा सुविधा का आदेश जारी करने और ग्राम पंचायत में शिक्षामित्रों की तैनाती के संबंध में फैसला लेने में अभी वक्त लगेगा.

जल्दी ही इस संबंध में शिक्षामित्रों के हित में फैसला लिया जाएगा. सूबे के बेसिक शिक्षा मंत्री के इस जवाब को विपक्षी सदस्यों के टालमटोल भरा जवाब कहा. वही मानदेय में इजाफा होने का इंतजार कर रहे सूबे के  शिक्षामित्र भी सरकार के जवाब से खड़े निराश हुए. 

मंत्री के उत्तर, शिक्षामित्र खफा

उत्तर प्रदेश के बेसिक शिक्षा विभागों में कार्यरत 1.43 लाख शिक्षामित्रों को दस हजार रुपए मानदेय के रूप में मिलता है. शिक्षामित्रों का कहना है कि साल में केवल 11 महीने का ही मानदेय उन्हे मिलता है. एक महीना उन्हें बिना वेतन के काम करना पड़ता है.जबकि वह नियमित शिक्षकों के समान ही कक्षाएं लेने और अन्य सरकारी कार्य करते हैं.

इसके बाद भी सरकार उनका मानदेय बढ़ाने के बाबत फैसला लेने में टालमटोल कर रही है जबकि सुप्रीम कोर्ट ने 17,000 रुपए मासिक मानदेय देने का संकेत सरकार को दिया था, इसके बाद भी अभी तक सरकार ने इस संबंध में कोई फैसला नहीं लिया है. ऐसे में सूबे के शिक्षामित्र बंधुआ मजदूर की तरह कार्य करने को बाध्य हो रहे हैं.

यही नहीं मुख्यमंत्री योगी ने शिक्षामित्रों के कैशलेस इलाज की सुविधा भी ऐलान किया था. इसके तहत शिक्षामित्रों को पांच लाख तक के कैशलेस इलाज की सुविधा मिलती. इस संबंध में आदेश कब जारी किया जाएगा, इसका ऐलान भी बेसिक शिक्षा मंत्री ने बुधवार को नहीं किया.

उन्होंने सिर्फ यही कहा कि जल्दी ही शिक्षामित्रों के हित में सरकार निर्णय लेगी. यह फैसला कब लिया जाएगा? इसकी स्मयसीमा उन्होंने नहीं बताई. इसी तरह मंगलवार को बेसिक शिक्षा मंत्री ने परिषदीय विद्यालयों में सहायक अध्यापक सीधी भर्ती के 46,944 पदों के खाली पदों को भरने के लिए कोई योजना न होने की बात कही थी.

विपक्ष का कहना है

फिलहाल बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह के इन उत्तरों से विपक्षी नेता खासे खफा हैं.चित्रकूट से सपा विधायक अनिल प्रधान कहते हैं, देश और प्रदेश भारत को विश्वगुरु बनाए जाने का ऐलान करती है. जबकि परिषदीय स्कूलों में शिक्षकों के 46,944 पद लंबे समय से खाली है और सरकार उन्हें भरने की तारीख तक नहीं तय कर सकी है. यहीं हाल शिक्षामित्रों के मानदेय को बढ़ाने का मामला है. बीते नौ साल से शिक्षा मित्रों के मानदेय को बढ़ाने का फैसला योगी सरकार नहीं तय कर सकी है. 

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