403 करोड़ रुपए खर्च?, योगी सरकार का सियासी दांव, बीआर अंबेडकर की मूर्ति पर लगेगा छत्र
By राजेंद्र कुमार | Updated: April 7, 2026 18:08 IST2026-04-07T18:06:22+5:302026-04-07T18:08:20+5:30
डा.अंबेडकर के अलावा अन्य महापुरुषों से संबंधित स्थानों पर स्थापित मूर्तियों का भी सुदृढ़ीकरण किया जाएगा. इस योजना पर कुल कुल 403 करोड़ दिए जाएंगे.

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लखनऊः उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों के पहले करीब 22 प्रतिशत दलित आबादी को अपने जोड़ने के लिए हर राजनीतिक दल तरह-तरह के फैसले ले रहे है. समाजवादी पार्टी (सपा) ने बीते माह राज्य में कांशीराम की जयंती को पीडीए दिवस के रूप में मनाया. वही राहुल गांधी ने कांशीराम को भारत रत्न देने के लिए प्रधानमंत्री को पत्र लिखा. ऐसी राजनीतिक गतिविधियों के बीच मंगलवार को योगी सरकार ने बड़ा सियासी दांव खेल दिया. आज यहां हुई कैबिनेट की बैठक में डॉ बी. आर. अंबेडकर मूर्ति विकास योजना को मंजूरी दी गई.
इस योजना के तहत राज्य में लगी डा.भीमराव अंबेडकर की हर मूर्ति के ऊपर छत्र लगाया जाएगा. डा.अंबेडकर के अलावा अन्य महापुरुषों से संबंधित स्थानों पर स्थापित मूर्तियों का भी सुदृढ़ीकरण किया जाएगा. इस योजना पर कुल कुल 403 करोड़ दिए जाएंगे.
योजना का उद्देश्य :
राज्य के वित्त मंत्री सुरेश खन्ना के अनुसार, महापुरुष, राष्ट्रीय स्टार के समाज सुधारकों एवं सांस्कृतिक विभूतियों की मूर्तियां हमारे राष्ट्र की ऐतिहासिक सांस्कृतिक एवं सामाजिक विरासत का महत्वपूर्ण प्रतीक हैं.वर्तमान में अनेक मूर्तियां निर्धारित विधिक मानकों के अनुरूप स्थापित हैं जो छत्र एवं बाउंड्रीवाल से रहित हैं.
इसके कारण मूर्तियाँ मौसम की मार अतिक्रमण एवं उपेक्षा के कारण संवेदनशील हैं. और पर्याप्त सुरक्षा एवं सौंदर्यीकरण के अभाव में इन प्रतिमाओं की गरिमा तथा इंका आकर्षण भी प्रभावित होता है. इस सारी परिस्थितियों का ध्यान रखते हुए सरकार ने यह योजना तैयार की है.
सुरेश खन्ना के मुताबिक इसका उद्देश्य 31 दिसंबर 2025 तक स्थापित ऐसी विद्यमान मूर्तियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना तथा उनके आसपास के क्षेत्र का सौंदर्यीकरण कर उन्हे संरक्षित एवं सम्मानजनक स्वरूप प्रदान करना है. सुरेश खन्ना के मुताबिक डा. बीआर अंबेडकर मूर्ति विकास योजना के तहत मूर्तियों के आसपास का विकास किया जाएगा, बाउंड्रीवाल का निर्माण कराया जाएगा.
मूर्ति के ऊपर छत्र लगेगा. हर विधानसभा में 10 स्मारकों का विकास कराया जाएगा. प्रति स्मारक 10 लाख रुपए खर्च निर्धारित किया गया. इस प्रकार राज्य की 303 विधानसभा क्षेत्रों के लिए कूकल 403 करोड़ रुपए का व्यय तय किया गया. अब 14 अप्रैल को अम्बेकर जयंती पर आयोजित कार्यक्रम में इस योजना की जानकारी लोगों को दी जाएगी.
भाजपा का दांव मायावती के लिए खतरा
राजनीतिक के जानकारों के अनुसार सूबे की योगी सरकार इस योजना को बहुजन समाज पार्टी (बसपा) से जुड़े दलित समाज को अपने पाले में करने के लिए ही लायी है. योगी सरकार की इस योजना के बाद अब मायावती से यह सवाल पूछा जाएगा कि वह चार बार सीएम रहने के बाद भी ऐसी योजना क्यों नहीं लायी.
फिलहाल दलित समाज में सियासी चेतना जगाने वाले बसपा संस्थापक कांशीराम और डा. अंबेडकर के सहारे सपा से लेकर कांग्रेस और अन्य दल अपने राजनीतिक समीकरण को दुरुस्त करने में जुटे हैं, जिसके चलते मायावती के सामने बसपा की सियासत को बचाए रखने की चुनौती खड़ी हो गई है. सूबे की बदली हुई सियासत में मायावती को एक के बाद एक चुनावी मात मिलती जा रही है.
बसपा का जनाधार भी चुनाव दर चुनाव खिसकता जा रहा और तमाम बड़े नेता पार्टी छोड़ गए हैं. यूपी की राजनीति में बसपा अपने सबसे बुरे दौर से गुजर रही है तो मायावती पूरी तरह से अलग-थलग पड़ गई हैं. ऐसे में अब देखना है कि योगी सरकार के इस सियासी दांव के बाद मायावती पार्टी से जुड़े दलित समाज को अपने साथ जोड़ने के लिए क्या पहल करती हैं.