आम जनता के साथ तो दारोगा और सिपाही का व्यवहार खराब, कोई व्यक्ति सामने नहीं पड़ना चाहता?, माता प्रसाद पांडेय ने कहा- नेताओं के फोन तक नहीं उठाते थानेदार?
By राजेंद्र कुमार | Updated: February 17, 2026 18:26 IST2026-02-17T18:23:40+5:302026-02-17T18:26:12+5:30
पुलिस अधिकारियों की कार्यशैली पर पिछले दिनों भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेताओं और जनप्रतिनिधियों की ओर से भी ऐसे सवाल बीते दिनों उठाए गए थे.

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लखनऊः उत्तर प्रदेश की विधानसभा के भीतर मंगलवार को नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय ने थाना स्तर के पुलिस अधिकारियों की कार्यशैली पर सवाल खड़ा किया. उन्होने कहा यूपी में थाना स्तर के पुलिस अधिकारी बेअंदाज हो गए गए. आम जनता के साथ तो दारोगा और सिपाही का व्यवहार इतना खराब होता है कि कोई व्यक्ति इनके सामने नहीं पड़ना चहता. यहीं नहीं अब तो कोई थानेदार नेताओं के फोन तक नहीं उठता. यह दावा करते माता प्रसाद पांडेय ने अपनी पीड़ा सदन को बताई. उन्होंने कहा कि एक बार तो जिले के एसपी फोन उठा लेते हैं, लेकिन थानेदार को फोन करने पर वह नहीं उठता है.
फिर अपने साथ हुए घटना को उन्होंने सदन को बताया. उन्होंने यह आग्रह भी किया कि इस संबंध में फिर से आदेश जारी किया जाए. पुलिस अधिकारियों की कार्यशैली पर पिछले दिनों भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेताओं और जनप्रतिनिधियों की ओर से भी ऐसे सवाल बीते दिनों उठाए गए थे. अब माता प्रसाद पांडेय की ओर से मामला उठाए जाने के बाद मसले पर इस मामले में फिर चर्चा शुरू हो गई है, कहा जा रहा है कि योगी राज में पुलिस बेअंदाज हो गई है और प्रदेश में कानून का नहीं पुलिस का राज है.
थानेदार भी कर रहे अनदेखी
फिलहाल नेता प्रतिपक्ष के सदन में उठाए गए इस मसले के बाद सदन की ओर से यह व्यवस्था दी गई है कि सभी अधिकारी जनप्रतिनिधियों के फोन उठाए और कोई अधिकारी ऐसा नहीं करेगा तो अधिकारी का यह कृत्य सदन की अवमानना होगी. सदन को यह इसलिए भी कहना पड़ा क्योंकि नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय ने बहुत ही सख्त लहजे में यह कहा कि हम लोग जनता के समस्याओं को लेकर टेलीफोन करते हैं तो थानेदार तो हमारे फोन कभी उठाता ही नहीं है.जिले के एसपी तो हमारे फोन सुन भी लेते हैं, लेकिन थानेदार को फुर्सत ही नहीं है टेलीफोन उठाने की.
जबकि ये लोग थानों में बैठ कर दलाली करेंगे, लेकिन टेलीफोन नहीं उठाएंगे. यह कहते हुए माता प्रसाद ने संसदीय कार्य मंत्री से सदन में लिए गए निर्णय को निचले स्तर पर पहुंचाने का आग्रह किया. माता प्रसाद ने यह भी कहा कि सदन में जब अधिकारियों के फोन उठाए जाने की बात कही जाती है तो इस तरह के निर्णय को निचले स्तर पर आप पहुंचा दें, ताकि थानेदर भी कम से कम टेलीफोन तो उठा लिया करें.
फिर नेता प्रतिपक्ष ने निचले स्तर के अधिकारियों को जन प्रतिनिधियों का फोन उठाने संबंधी निर्देश की जानकारी दिए जाने की बात कही। यह भी कहा कि मैंने सदन में यह मामला इलिए उठाया है, ताकि सबको यह पता चल सके कि सूबे के थानेदार किस तरह से अपनी मनमानी कर रहे हैं. नेताओं के फोन नहीं उठा रहे ताकि किसी समस्या को दूर करने की जरूरत ही न पड़े.
पुलिस के व्यवहार से भाजपा विधायक भी खफा
ऐसा नहीं है कि पुलिस अफसरों के व्यवहार का शिकार नेता प्रतिपक्ष हुए हैं. भाजपा विधायक ज्ञान तिवारी भी रविवार को रामपुर मथुरा थानाध्यक्ष संजय पांडेय की कार्यशैली से नाराज होकर थाने में धरने पर बैठ गए. विधायक ज्ञान तिवारी का आरोप है कि थानाध्यक्ष और उनके पुलिसकर्मी एक गांव में कुछ दिन पहले नौटंकी के कार्यक्रम में पुलिस शामिल हुए.
इसके बाद गांव में दूसरा कार्यक्रम हुआ तो पुलिस ने रात में वहां कहर बरपा दिया.रात करीब दो बजे पुलिसकर्मियों ने नौटंकी कराने की लिखित अनुमति दिखाने को कहा. न दिखा पाने पर पुलिस ने बिना देखे व समझे मेहमानों को मारा पीटा, भगोना में रखा सारा खाना भी जमीन पर गिरा दिया और नौटंकी को बंद करा दी.
इस मामले को लेकर विधायक धरने पर बैठ तो अपर पुलिस अधीक्षक दुर्गेश सिंह और सीओ वेद प्रकाश श्रीवास्तव ने विधायक को कार्रवाई का आश्वासन देकर उन्हे मनाया. इसके बाद ही उन्होंने धरना समाप्त किया. इस घटना का जिक्र भी सदन में विधायकों ने किया.