जनगणना-एसआईआर बहाना?, लाखों उम्मीदवार को लगेगा झटका, पंचायत चुनाव नहीं?, 26 मई 2026 को खत्म हो रहा कार्यकाल
By राजेंद्र कुमार | Updated: March 25, 2026 17:24 IST2026-03-25T17:23:31+5:302026-03-25T17:24:10+5:30
हाईकोर्ट को यह बताने के क्रम में ही राज्य निर्वाचन आयोग सूबे में चल रहे मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण (एसआईआर) के चल रहे अभियान और 22 मई से शुरू होने वाले जनगणना कार्यक्रम में कर्मचारियों के व्यस्त होने का हवाला देकर पंचायत चुनाव कराने के लिए समय बढ़ाए जाने की मांग करेगा.

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लखनऊः उत्तर प्रदेश की योगी सरकार विधानसभा के बाद ही त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव कराए जाने के पक्ष में हैं. इस सोच के तहत प्रदेश सरकार हाईकोर्ट में मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण (एसआईआर) के चल रहे अभियान और 22 मई से शुरू होने वाले जनगणना कार्यक्रम का हवाला देकर पंचायत चुनाव कराने के लिए समय बढ़ाए जाने की मांग करेगी. राज्य में पंचायतों का कार्यकाल आगामी 26 मई को पूरा हो रहा है. प्रदेश में राज्य में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव कराया जाना है. इसे लेकर हाईकोर्ट से सरकार से पूछा है कि क्या 15 अप्रैल को मतदाता सूची के प्रकाशन के बाद 26 मई तक चुनाव कराया जाना संभव है.
बताया जा रहा है कि हाईकोर्ट को यह बताने के क्रम में ही राज्य निर्वाचन आयोग सूबे में चल रहे मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण (एसआईआर) के चल रहे अभियान और 22 मई से शुरू होने वाले जनगणना कार्यक्रम में कर्मचारियों के व्यस्त होने का हवाला देकर पंचायत चुनाव कराने के लिए समय बढ़ाए जाने की मांग करेगा.
यूपी में पंचायतों की स्थिति
ग्राम पंचायत : 57,695
क्षेत्र पंचायत : 826
क्षेत्र पंचायत वार्ड : 75,855
जिला पंचायत : 75
जिला पंचायत वार्ड : 3051
इसलिए पंचायत चुनाव के लिए समय चाहिए
राज्य में वर्ष 2021 में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव कराए गए थे और ग्राम पंचायतों की पहली बैठक 27 मई 2021 को हुई थी. इसके अनुसार ग्राम पंचायतों के पांच साल का कार्यकाल 26 मई को समाप्त हो रहा है. इससे पूर्व पंचायत चुनाव संपन्न नहीं हो पाने की स्थिति में पंचायतों में ग्राम प्रधान के स्थान प्रशासकों की नियुक्ति करनी होगी.
ऐसी स्थिति उत्पन्न न हो इसके लिए लोगों के समय से चुनाव हो इसके लिए हाईकोर्ट में याचिका दायर की. इस मामले की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने राज्य निर्वाचन आयोग से हलफनामा कर यह बताने को कहा था कि वह 26 मई तक चुनाव करा पाने की स्थिति में है या नहीं. बताया जा रहा है, इस मामले में राज्य निर्वाचन आयोग के अफसरों से साथ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और पंचायतीराज मंत्री ओपी राजभर के साथ बैठक हुई. जिसमें पंचायत चुनाव कराने संबंधी तैयारियों पर चर्चा हुई.
इस बैठक में अधिकारियों ने मुख्यमंत्री और पंचायतीराज को बताया चुनाव कराने के लिए राज्य निर्वाचन आयोग तो तैयारी पूरी है, लेकिन पंचायत चुनाव कराने में अभी कई दिक्कतें हैं. राज्य में अभी विशेष पुनरीक्षण (एसआईआर) के चल रहे अभियान चल रहा है. 22 मई से जनगणना का पहला चरण शुरू होगा. इस दोनों ही कार्यक्रमों में सरकार कर्मी व्यस्त हैं.
इसके अलावा प्रदेश सरकार को चुनाव कराने का फैसला करते हुए पंचायत चुनावों में ओबीसी आरक्षण तय करने के लिए समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग का गठन करना होगा. अभी इस आयोग का गठन नहीं हुआ है .आयोग का गठन होने के बाद उसे अपना काम पूरा करने के लिए कम से कम दो माह का समय चाहिए होगा.
इसके बाद अगर आयोग की रिपोर्ट दो माह में आ जाएगी तो सीटों का आरक्षण तय करने में कम से कम एक माह का समय लगेगा. इसके बाद राज्य निर्वाचन आयोग को चुनाव कराने के लिए न्यूनतम 35 दिनों का समय चाहिए होगा. यह सब होते-होते बारिश शुरू हो जाएगी और बारिश के मौसम में पंचायत चुनाव कराने में व्यावहारिक कठिनाइयां होंगी.
इसी दरमियान राज्य में विधानसभा चुनावों कराने के लिए भी तैयारियां शुरू करनी होगी. इसलिए पंचायत चुनाव को कराने के लिए हाईकोर्ट से समय बढ़ाने का आग्रह किया जाना चाहिए. ताकि विधानसभा चुनावों के बाद राज्य में पंचायत चुनाव कराए जाए. जैसा कि वर्ष 2017 में किया गया था.
हाईकोर्ट में सरकार का पक्ष रखेगा
बताया जा रहा है कि बैठक में इस समय पंचायत चुनाव कराने में आने वाली दिक्कतों को ध्यान में रखते हुए यह तय हुआ कि निर्वाचन आयोग हाईकोर्ट के समक्ष इस सभी तथ्यों को रखते हुए पंचायत चुनाव का समय बढ़ाए जाने का आग्रह करें और हाईकोर्ट को अपनी तैयारियों से भी अवगत कराए. अब इस फैसले के तहत निर्वाचन आयोग हाईकोर्ट में सरकार का पक्ष रखेगा. माना जा रहा है कि हाईकोर्ट सत्कार के पक्ष को सुनकर पंचायत चुनाव का समय बढ़ाए जाने की सहमति प्रदान कर देगा.