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संयुक्त किसान मोर्चा ने कुंडली में प्रदर्शन स्थल पर एक व्यक्ति की हत्या किये जाने की निंदा की

By भाषा | Updated: October 15, 2021 19:57 IST

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नयी दिल्ली, 15 अक्टूबर संयुक्त किसान मोर्चा ने शुक्रवार को दिल्ली-हरियाणा सीमा के पास कुंडली में किसानों के प्रदर्शन स्थल पर एक व्यक्ति की पीट-पीट कर हत्या किए जाने की निंदा की और दावा किया कि इस घटना के पीछे एक साजिश हो सकती है।

मोर्चा ने इस मामले की विस्तृत जांच कराने की मांग की और कहा कि इस घटना के दोषियों को पकड़ा जाना चाहिए। मोर्चा ने आरोप लगाया कि उनके आंदोलन को धार्मिक रंग दिया जा रहा है।

सोशल मीडिया पर वायरल हुई एक वीडियो क्लिप में कुछ निहंगों को जमीन पर खून से लथपथ पड़े एक व्यक्ति के पास खड़े हुए देखा गया है और उसका बायां हाथ कटा हुआ पड़ा है। निहंगों को यह कहते हुए सुना जा सकता है कि मृतक को सिखों की पवित्र किताब की बेअदबी के लिए सजा दी गयी है।

मोर्चा के एक किसान नेता जगजीत सिंह दल्लेवाल ने कहा, ‘‘जो कुछ हुआ उससे हम सभी बहुत दुखी हैं। संयुक्त किसान मोर्चा तीन कृषि कानूनों के खिलाफ लड़ रहा है। यह (घटना) एक साजिश हो सकती है। हम इस घटना की कड़े शब्दों में निंदा करते हैं।’’

दल्लेवाल ने कहा कि उन्हें पता चला है कि पीड़ित लखबीर सिंह निहंग सिखों के साथ रह रहा था और उसने सिखों के पवित्र ग्रंथ को कथित तौर पर चुराने की कोशिश की थी। उन्होंने कहा, ‘‘हम किसी भी धर्म के अपमान की निंदा करते हैं। हम हत्या की घटना की भी निंदा करते हैं।’’

किसान नेता कुलवंत सिंह ने आरोप लगाया कि घटना के पीछे केंद्रीय एजेंसियां हैं और उन्होंने मामले की जांच की मांग की है। उन्होंने कहा, ‘‘जब हमें घटना के बारे में पता चला, तो हम घटनास्थल पर पहुंचे। जब तक हम वहां पहुंचे, तब तक वह व्यक्ति मर चुका था। हमने निहंगों से आग्रह किया कि पुलिस यहां आ गई है और वे हमसे शव को सौंपने का अनुरोध कर रहे हैं। बाद में शव पुलिस को सौंप दिया गया। हम इस कृत्य की निंदा करते हैं।’’

एक वीडियो संदेश में योगेंद्र यादव ने भी घटना की निंदा की और कहा कि सभ्य समाज में इस तरह की घटनाओं को स्वीकार नहीं किया जा सकता है। उन्होंने कहा, ‘‘यह व्यक्ति दो-तीन दिनों से निहंगों के समूह के साथ रह रहा था। कल रात उनके बीच विवाद हुआ और बेअदबी के आरोप लगे।’’

उन्होंने कहा कि यह धार्मिक आंदोलन नहीं है, बल्कि यह एक किसान आंदोलन है और मोर्चा के कई नेताओं ने उन्हें (निहंगों के समूहों) को वहां से जाने के लिए कहा है, लेकिन इसके बावजूद वे वहां (विरोध स्थल पर) रह रहे हैं।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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