यूपी में यूजीसी गाइडलाइन को लेकर विरोध तेज, पीएम के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में सड़क पर उतरे लोग, अयोध्या में जगतगुरु परमहंस आचार्य पीएम को पत्र लिखा
By राजेंद्र कुमार | Updated: January 27, 2026 18:28 IST2026-01-27T18:27:09+5:302026-01-27T18:28:32+5:30
आजाद समाज पार्टी के प्रमुख और सांसद चंद्रशेखर और राष्ट्रीय शोषित समाज पार्टी (आरएसएसपी) के मुखिया स्वामी प्रसाद मौर्य ने यूजीसी की गाइडलाइन का समर्थन किया है.

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लखनऊः उत्तर प्रदेश में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) की ओर से लागू किए गए 'उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने के नियम, 2026 का विरोध तेज हो गया है.लखनऊ से लेकर प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र वाराणसी तक सवर्ण समाज के लोग सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन कर रहे हैं. भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) कई नेता इसको लेकर बयानबाजी करते हुए पाने पदों से इस्तीफा दे दिया है. अयोध्या में जगतगुरु परमहंस आचार्य ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर यूजीसी को वापस लेने की मांग की है. जबकि आजाद समाज पार्टी के प्रमुख और सांसद चंद्रशेखर और राष्ट्रीय शोषित समाज पार्टी (आरएसएसपी) के मुखिया स्वामी प्रसाद मौर्य ने यूजीसी की गाइडलाइन का समर्थन किया है.
इन दोनों नेताओं का कहना है कि यूजीसी की गाइडलाइन पर हो रहा विवाद हमें समझ नहीं आता है. इसका विरोध करने वाले 90 पर्सेंट ऐसे लोग हैं जिन्होंने इसे पढ़ा ही नहीं है. यह गाइडलाइन एससी, एसटी, ओबीसी के लोगों ने नहीं बनाई है. समिति ने बनाई है.
प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र में लोग नाराज हैं
फिलहाल समाज के बड़े वर्ग में यूजीसी की गाइडलाइन को लेकर नाराजगी है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में लोग यूजीसी की गाइडलाइन के विरोध में हाथों में बैनर और तख्तियां लेकर सड़कों पर उतरे हैं और धरना प्रदर्शन कर रहे हैं. लोगों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी भी की है और इसे काला कानून बताया है.
धरना प्रदर्शन कर रहे लोगों ने इस नियम को जल्द वापस लेने की मांग की है. इस लोगों ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने यूजीसी की गाइड लाइन को लेकर दिए गए बयान की भी निंदा की है. धर्मेंद्र प्रधान ने कहा है कि मैं सभी को भरोसा दिलाता हूं कि कोई भेदभाव नहीं होगा. कोई भी कानून का गलत इस्तेमाल नहीं कर पाएगा. किसी का उत्पीड़न नहीं होगा.
उनके इस बयान पर यूजीसी की गाइड लाइन की खिलाफ करने वालों के कहना है कि सरकार फेस सेविंग के लिए ऐसे बयान देती है, इससे वह प्रभावित नहीं होंगे. नोटबंदी करते हुए भी यहा कहा गया था कि इससे काला धन खत्म होगा, लेकिन हुआ क्या. लोगों के कारोबार बंद हो गए और आज भी भ्रष्टाचार हर तरह है. इसलिए यह काला बिल वापस हो.
भाजपा नेताओं ने दिया इस्तीफा
लखनऊ में भाजपा नेता अंकित तिवारी ने यूजीसी की गाइडलाइन के विरोध में पार्टी से इस्तीफा दे दिया है. अंकित का कहा है कि हमने पार्टी को शिखर तक पहुंचाया लेकिन यूजीसी हमें गलत लगा है जिसका मैंने विरोध किया है. अगर सरकार यूजीसी की गाइडलाइन को वापस लेती है तो मैं पार्टी का सदस्य बना रहूंगा. अंकित का कहना है कि ये सामान्य वर्ग के लिए काला कानून है.
रायबरेली में भाजपा मंडल अध्यक्ष श्याम सुंदर त्रिपाठी ने यूजीसी की गाइडलाइन के विरोध में अपने पद से इस्तीफा दे दिया है. उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को संबोधित अपना त्याग पत्र भेजा है. इस पत्र में उन्होंने लिखा है कि यह कानून समाज के लिए बेहद घातक और विनाशकारी है. मैं इस कानून से संतुष्ट नहीं हूं और इसका पूरी तरह से विरोध करता हूं.
अयोध्या के परमहंस आचार्य ने पीएम को लिखा पत्र
अयोध्या में जगतगुरु परमहंस आचार्य ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर यूजीसी की गाइडलाइन को वापस लेने की मांग की है. उन्होंने अपने पत्र में लिखा है कि या तो यूजीसी गाइडलाइन को वापस लें या तो मुझे इच्छा मृत्यु की अनुमति दें. यूजीसी की गाइडलाइन के कारण राष्ट्र अस्वस्थ हो गया है. सवर्णों की बेटियों को बलात्कार के लिए मजबूर किया जा रहा है.
प्रयागराज में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने यूजीसी की गाइडलाइन का विरोध जताया है. उन्होंने कहा कि ये ऐसा कानून है जिसमें हिंदुओं की एक जाति दूसरी जाति से लड़ेगी, ये हिंदू धर्म को समाप्त करने का एक षड्यंत्र है. सरकार खुद को हिंदुओं की सरकार कहती है और ऐसा कानून लाकर हिंदुओं को लड़ाने का काम कर रही है.