लाइव न्यूज़ :

यूजीसी समिति ने विश्वविद्यालयों, कालेजों में ‘मिश्रित शिक्षा’ के लिये मसौदा दिशानिर्देश तैयार किया

By भाषा | Updated: May 21, 2021 21:22 IST

Open in App

नयी दिल्ली, 21 मई उच्च शिक्षण संस्थानों को किसी भी पाठ्यक्रम का 40 प्रतिशत हिस्सा आनलाइन माध्यम से पढ़ाने की जल्द अनुमति मिल सकती है । विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) द्वारा गठित विशेषज्ञ समिति के ‘विश्वविद्यालयों, कालेजों में मिश्रित पठन पाठन’ विषय पर मसौदा संकल्पना नोट में यह बात कही गई है ।

यूजीसी ने इस मसौदा संकल्पना नोट पर 6 जून तक विभिन्न पक्षकारों से सुझाव एवं राय मांगी है।

यूजीसी के सचिव रजनीश जैन ने कहा है, ‘‘ यूजीसी ने तय किया है कि उच्च शिक्षण संस्थानों को किसी पाठ्यक्रम का 40 प्रतिशत हिस्सा आनलाइन माध्यम से पढ़ाने की अनुमति दी जाए और संबंधित कोर्स का शेष 60 प्रतिशत हिस्सा आफलाइन माध्यम से पढ़ाया जाए ।’’

उन्होंने कहा कि दोनों प्रारूपों में परीक्षा आनलाइन माध्यम से ली जा सकती है ।

मसौदा संकल्पना के अनुसार, छात्रों के लिये मिश्रित शिक्षा के फायदे हैं और इससे बेहतर ढंग से सीखने के साथ वृहद सूचना प्राप्त करने, बेहतर पठन पाठन परिणाम एवं संतुष्टि के अलावा दूसरों से भी सीखने का मौका मिलेगा ।

यह मसौदा संकल्पना नयी राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप तैयार की गयी है । विशेषज्ञ समिति का मानना है कि इससे पठन पाठन के कई स्वरूपों को मान्यता मिलेगी जिसमें आमने सामने बैठकर पढ़ने और डिजिटल माध्यम से शिक्षा ग्रहण करना शामिल है ।

मसौदा संकल्पना में कहा गया है कि मिश्रित पठन पाठन न केवल आनलाइन एवं आमने सामने बैठकर शिक्षा प्राप्ति का मिश्रण है, बल्कि यह दोनों माध्यमों से अर्थपूर्ण गतिविधियों का सुनियोजित समन्यव है ।

इसमें कहा गया है कि मिश्रित शिक्षा कई महत्वपूर्ण कारकों पर ध्यान केंद्रित करती है जिसमें पठन पाठन का परिणाम, सीखने वाले पर केंद्रित माहौल शामिल है ।

मसौदा में मिश्रित शिक्षा के तहत शिक्षक की भूमिका को परिभाषित करते हुए कहा गया है कि मिश्रित पठन पाठन में शिक्षकों की भूमिका ज्ञान प्रदान करने वाले से आगे बढ़कर कोच और मार्गदर्शक की होगी और शिक्षकों का छात्रों की सीखने की प्रक्रिया पर अधिक प्रभाव होगा ।

विशेषज्ञ समिति ने कहा है कि उच्च शिक्षा के क्षेत्र में मिश्रित शिक्षा की व्यवस्था को शिक्षण-पठन पाठन के नये प्रारूप लागू करने के लिये मूल्यांकन के क्षेत्र पर ध्यान देने की जरूरत है । विश्वविद्यालयों एवं कालेजों में सतत समग्र मूल्यांकन (सीसीई) को प्रोत्साहित किये जाने की जरूरत है।

यूजीसी समिति ने इस प्रकार की शिक्षा के लिये इंटरनेट, बैंडविड्थ, हार्डवेयर सहित जरूरी आधारभूत संरचना सुनिश्चित कराने की जरूरत पर जोर दिया है।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

Open in App

संबंधित खबरें

स्वास्थ्यसन फार्मा ने लॉन्च किया ‘हार्ट के लिए 8- मेकिंग इंडिया हार्ट स्ट्रॉन्ग’ कैंपेन, दिल के स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के लिए भारतीयों से रोजाना में अच्छी आदतें अपनाने का आग्रह

क्रिकेटDC vs GT, IPL 2026: दिल्ली में बादलों का डेरा, जानें DC vs GT मैच में बारिश खेल बिगाड़ेगी या नहीं?

कारोबारRBI MPC Meeting: रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं, आरबीआई ने 5.25% को रखा बरकरार; नहीं बढ़ेगी आपकी ईएमआई

भारतनहीं रहीं मोहसिना किदवई, उत्तर प्रदेश से लेकर केंद्र की राजनीति तक, 5 दशकों तक छाई रहने वाली कांग्रेस दिग्गज नेता का निधन

विश्वइजरायल ने किया अमेरिका के सीजफायर का समर्थन, मगर हिजबुल्लाह के खिलाफ जंग रहेगी जारी

भारत अधिक खबरें

भारतDC vs GT, IPL 2026: फ्री होकर देखिए मैच, दिल्ली मेट्रो देर रात तक पहुंचाएंगी घर, DMRC ने बदली अपनी टाइमिंग

भारतनिजी जासूसी एजेंसियों को लेकर नई चिंताएं

भारतपंजाब में अमित शाह का प्रतिभा खोज अभियान?, आरिफ मोहम्मद खान ढाका जाएंगे!

भारतNagpur: पवनी सफारी में दिखा दुर्लभ ‘काला चीतल’, पर्यटकों में बढ़ा रोमांच

भारत‘अपने स्तर को नीचे न गिराएं’: मल्लिकार्जुन खड़गे के ‘गुजरात के लोग अनपढ़ हैं’ वाले बयान पर शशि थरूर की सलाह