उदीशा: जब साहित्य, कला और ज़मीनी कहानियाँ एक साथ आती हैं

By लोकमत न्यूज़ डेस्क | Updated: January 21, 2026 17:27 IST2026-01-21T17:26:49+5:302026-01-21T17:27:52+5:30

22 से 26 जनवरी तक आयोजित होने वाला उदीशा 2026, मोरादाबाद लिटरेचर फेस्टिवल, साहित्य और कला को आम जीवन के करीब लाने का प्रयास है।

​​​​​​​Udisha When literature, art and grassroots stories come together Udisha 2026, Moradabad Literature Festival, to be held from January 22 to 26 | उदीशा: जब साहित्य, कला और ज़मीनी कहानियाँ एक साथ आती हैं

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Highlightsसंस्कृति केवल मंचों पर होने वाली प्रस्तुतियों तक नहीं सिमटती। उत्सव को एक बहुआयामी अनुभव के रूप में रचा गया है। अलग-अलग रुचियों वाले लोग इसमें अपनी जगह पा सकें।

किसी शहर की पहचान केवल उसकी इमारतों या उद्योगों से नहीं बनती, बल्कि उन कहानियों से बनती है जो वहां के लोग कहते और सुनते हैं। मोरादाबाद में जनवरी के आख़िरी सप्ताह में ऐसा ही एक अवसर आ रहा है, जब शहर अपनी रोज़मर्रा की गति से हटकर विचार और अभिव्यक्ति की ओर मुड़ेगा। 22 से 26 जनवरी तक आयोजित होने वाला उदीशा 2026, मोरादाबाद लिटरेचर फेस्टिवल, साहित्य और कला को आम जीवन के करीब लाने का प्रयास है।

उदीशा का मूल विचार सरल है। साहित्य केवल किताबों तक सीमित नहीं है और संस्कृति केवल मंचों पर होने वाली प्रस्तुतियों तक नहीं सिमटती। यही कारण है कि इस उत्सव को एक बहुआयामी अनुभव के रूप में रचा गया है। दुष्यंत मंच, रामगंगा लॉन्स और जौन एलिया ज़ोन जैसे शहर के प्रमुख स्थलों पर होने वाले कार्यक्रमों में साहित्यिक संवादों के साथ कविता, दास्तानगोई, रंगमंच, लोक और शास्त्रीय संगीत, भोजपुरी सांस्कृतिक प्रस्तुतियां और रचनात्मक कार्यशालाएं शामिल होंगी। हर दिन का कार्यक्रम इस तरह तैयार किया गया है कि अलग-अलग रुचियों वाले लोग इसमें अपनी जगह पा सकें।

उत्सव की शुरुआत 22 जनवरी को अभिनेता आशुतोष राणा और गायक सुखविंदर सिंह की प्रस्तुतियों से होगी। इसके बाद के दिनों में मंच पर देश के जाने-पहचाने लेखक, कवि, कलाकार और विचारक दिखाई देंगे। वसीम बरेलवी की शायरी, मनोज तिवारी की सांस्कृतिक उपस्थिति, आलोक श्रीवास्तव की कविताएं, सौरभ द्विवेदी की पत्रकारिता से जुड़ी बातचीत, चेतन भगत के पाठकों से संवाद, पुष्पेश पंत द्वारा भोजन और संस्कृति पर दृष्टि, गौहर रज़ा और अक्षत गुप्ता की रचनात्मक सोच, इला अरुण की लोकधुनें और कुमार विश्वास की कविताएं, यह सब मिलकर उदीशा को केवल एक साहित्यिक आयोजन से आगे ले जाते हैं।

कविता उदीशा के केंद्र में है, और इसका प्रमाण है आयोजन का भव्य मुशायरा और कविता सम्मेलन। यहां कविता किसी विशिष्ट वर्ग के लिए नहीं, बल्कि हर उस व्यक्ति के लिए होगी जो शब्दों में अपनी भावनाओं और अनुभवों की झलक देखता है। यह मंच परंपरा और वर्तमान के बीच एक स्वाभाविक संवाद रचता है।

उदीशा की एक अहम विशेषता यह है कि इसके अधिकांश सत्र आम जनता के लिए निःशुल्क और खुले हैं। यह निर्णय इस सोच को दर्शाता है कि साहित्य और संस्कृति तक पहुंच किसी निमंत्रण या टिकट की मोहताज नहीं होनी चाहिए। छात्र, युवा लेखक, कलाकार और शहर के निवासी बिना किसी औपचारिक दूरी के इन चर्चाओं और प्रस्तुतियों का हिस्सा बन सकते हैं।

मोरादाबाद के लिए यह उत्सव एक नए आत्मविश्वास का संकेत है। यह शहर अब केवल अपनी कारीगरी या व्यावसायिक पहचान तक सीमित नहीं रहना चाहता, बल्कि अपने विचारों और रचनात्मक ऊर्जा को भी सामने लाना चाहता है। उदीशा के माध्यम से स्थानीय सांस्कृतिक चेतना को राष्ट्रीय स्तर की बातचीत से जोड़ा जा रहा है।

आज जब साहित्यिक और सांस्कृतिक आयोजनों का बड़ा हिस्सा महानगरों तक सिमटा हुआ है, उदीशा एक अलग दृष्टिकोण प्रस्तुत करता है। यह दिखाता है कि छोटे शहर भी बड़े संवादों के केंद्र बन सकते हैं, बशर्ते उन्हें मंच और विश्वास मिले।

उदीशा 2026 उन लोगों के लिए है जो साहित्य को केवल पढ़ना नहीं, बल्कि महसूस करना चाहते हैं। यह उत्सव मोरादाबाद की गलियों, आवाज़ों और अनुभवों को राष्ट्रीय सांस्कृतिक परिदृश्य से जोड़ने का एक प्रयास है, जहां साहित्य, कला और ज़मीनी कहानियाँ एक साथ आकर साझा स्मृतियां गढ़ती हैं।

Web Title: ​​​​​​​Udisha When literature, art and grassroots stories come together Udisha 2026, Moradabad Literature Festival, to be held from January 22 to 26

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