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महाराष्ट्र विधानमंडल का दो दिवसीय मानसून सत्र पांच जुलाई से, भाजपा ने निन्दा की

By भाषा | Updated: June 22, 2021 19:56 IST

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मुंबई, 22 जून कोविड-19 महामारी के बीच महाराष्ट्र विधानमंडल का दो दिवसीय मानसून सत्र पांच जुलाई से शुरू होगा। राज्य सरकार ने मंगलवार को यह जानकारी दी।

वहीं, इतनी कम अवधि के मानसून सत्र पर महाराष्ट्र विधानसभा में नेता विपक्ष देवेंद्र फडणवीस ने आज कहा कि राज्य की महा विकास आघाड़ी सरकार जन सरोकार के मुद्दों से ‘‘भागने’’ की कोशिश कर रही है।

मुख्यमंत्री कार्यालय ने एक बयान में कहा कि मानसून सत्र के आयोजन संबंधी निर्णय विधान भवन में आयोजित कार्य मंत्रण समिति (बीएसी) की बैठक के बाद लिया गया, जिसमें सत्ता पक्ष और विपक्ष के नेता शामिल हुए।

इसने कहा कि पांच और छह जुलाई को सत्र के अस्थायी कार्यक्रम पर चर्चा की गई और बीएसी की अगली बैठक में इसे अंतिम रूप दिया जाएगा। बैठक में महाराष्ट्र विधान परिषद के अध्यक्ष रामराजे निंबालकर, उपाध्यक्ष डॉ. नीलम गोरहे, विधानसभा के उपाध्यक्ष नरहरि जिरवाल, उपमुख्यमंत्री अजित पवार, विधानसभा में नेता विपक्ष देवेंद्र फडणवीस, विधान परिषद में नेता विपक्ष प्रवीण दरेकर और संसदीय कार्य मंत्री अनिल परब तथा अन्य शामिल हुए।

मुख्यमंत्री कार्यालय ने बयान में कहा कि विधान भवन परिसर में आने वालों के लिए आरटी-पीसीआर जांच रिपोर्ट अनिवार्य होगी, चाहे उन्हें कोविड रोधी टीके की दोनों खुराक क्यों न लग चुकी हों। विधान भवन खुद भी तीन और चार जुलाई को आरटी-पीसीआर जांच अभियान चलाएगा।

इसमें कहा गया कि मंत्रियों के साथ केवल एक व्यक्ति आ सकेगा, जबकि आम लोगों के लिए प्रवेश निषिद्ध रहेगा। इसके साथ ही एक बेंच पर केवल एक सदस्य को बैठने की अनुमति होगी, जबकि शेष अन्य को दर्शक दीर्घा का इस्तेमाल करना होगा।

मुख्यमंत्री कार्यालय ने कहा कि प्रत्येक सदस्य को सरकार की तरफ से एक किट मिलेगी जिसमें फेस शील्ड, मास्क, दस्ताने और सैनिटाइजर होंगे। कार्य मंत्रणा समिति की बैठक में शामिल होने के बाद फडणवीस ने संवाददाताओं से कहा कि महा विकास आघाडी सरकार आम आदमी से जुड़े मुद्दों और लोकतांत्रिक प्रक्रिया से ‘‘भागने’’ की कोशिश कर रही है।

उन्होंने कहा, ‘‘हम यह देखकर हैरान रह गए कि सरकार केवल दो दिन के लिए सत्र आयोजित करने की योजना बना रही है।’’फडणवीस ने कहा कि भाजपा नेताओं ने इतनी कम अवधि के लिए मानसून सत्र आयोजित किए जाने की सरकार की योजना के विरोध में कार्य मंत्रणा समिति की बैठक से बहिर्गमन किया।

उन्होंने कहा, ‘‘हमारे लिए आम आदमी की आवाज उठाने के लिए कोई जगह नहीं बची है। लोगों, किसानों, छात्रों और राज्य में कानून व्यवस्था से जुड़े विषयों सहित विभिन्न मुद्दों को उठाने के वास्ते दो दिन का मानसून सत्र हमारे लिए बहुत छोटा होगा। इस सरकार ने लोकतांत्रिक प्रक्रिया को सर्कस में बदल दिया है।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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