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मध्यप्रदेश सरकार को गिराने का दावा कर रही बीजेपी को बड़ा झटका, दो विधायकों ने छोड़ा पार्टी का 'साथ'

By लोकमत न्यूज़ डेस्क | Updated: July 24, 2019 19:19 IST

राज्य विधानसभा में आज सरकार की ओर से दंड विधि संशोधन विधेयक पेश किया गया. इस विधेयक पर चर्चा के बाद बसपा के संजीव सिंह संजू ने मतदान कराने की बात कही. इसके पहले भाजपा यह चाह रही थी कि विधेयक सर्वसम्मति से पारित हो जाए. 

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ठळक मुद्देकर्नाटक की सरकार गिरने के बाद मध्यप्रदेश सरकार को गिराने का दावा कर रही भाजपा को आज बुधवार की शाम को करारा झटका लगा है. विधानसभा में दंड विधि संशोधन विधेयक के लिए हुए मतदान में सरकार के पक्ष में 122 विधायकों ने मतदान किया और विधेयक पारित कर दिया.

कर्नाटक की सरकार गिरने के बाद मध्यप्रदेश सरकार को गिराने का दावा कर रही भाजपा को आज बुधवार की शाम को करारा झटका लगा है. विधानसभा में दंड विधि संशोधन विधेयक के लिए हुए मतदान में सरकार के पक्ष में 122 विधायकों ने मतदान किया और विधेयक पारित कर दिया. 122 विधायकों में सरकार के पक्ष में भाजपा के दो विधायकों ने भी मतदान किया. विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव ने भाजपा विधायकों के फर्जी हस्ताक्षर होने का दावा किया है.

राज्य विधानसभा में आज सरकार की ओर से दंड विधि संशोधन विधेयक पेश किया गया. इस विधेयक पर चर्चा के बाद बसपा के संजीव सिंह संजू ने मतदान कराने की बात कही. इसके पहले भाजपा यह चाह रही थी कि विधेयक सर्वसम्मति से पारित हो जाए. 

बसपा विधायक द्वारा जब मतदान की बात कही तो विधेयक के लिए मतदान कराया गया. मतदान में सरकार के पक्ष में 122 विधायकों ने मतदान किया और विधेयक पारित करा दिया. इस विधेयक के पक्ष में मतदान करने वाले दो भाजपा विधायकों के नाम नारायण प्रसाद त्रिपाठी मैहर और शरद कौल ब्यौहारी बताए गए हैं. 

कमलनाथ सरकार में मंत्री औंकार सिंह मरकाम ने यह जानकारी देते हुए संवाददातों को बताया कि हम इन दोनों विधायकों को धन्यवाद देना चाहते हैं कि दोनों ने विधेयक के पक्ष में मतदान किया. कांग्रेस के तुर्क विधायक कुणाल चौधरी ने भी कांग्रेस के पक्ष में दोनों विधायकों द्वारा विधेयक के पक्ष में मतदान करने की बात कही. 

इसी बीच नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव ने कहा कि विधेयक के पक्ष में भाजपा के दोनों विधायकों के फर्जी हस्ताक्षर किए गए हैं. विंध्य क्षेत्र के वरिष्ठ भाजपा विधायक केदार शुक्ल ने भी यही आरोप लगाए हैं. विधेयक के पक्ष में मतदान के करने वाले दोनों भाजपा विधायक भाजपा में आने से पूर्व कांग्रेस के साथ रहे हैं. 

यहां उल्लेखनीय है कि विधानसभा में कांग्रेस के 114 विधायक हैं. इसके अलावा बसपा के 2, सपा के 1 और निर्दलीय 4 विधायकों ने कांग्रेस को समर्थन दिया है. इस तरह 121 विधायक कांग्रेस के पक्ष में हैं. वहीं भाजपा के 109 विधायक हैं. मतदान में कांग्रेस की ओर से विधानसभा अध्यक्ष नर्मदा प्रसाद प्रजापति ने हिस्सा नहीं लिया था. इस तरह से कांग्रेस की ओर से 120 विधायकों ने विधेयक के पक्ष में मतदान किया है, जबकि विधेयक के पक्ष में 122 मत मिले हैं.

मुझे यह साबित करना था हमारी सरकार अल्पमत की नहीं 

वोटिंग के बाद मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कहा कि कई दिनों से ये बात चल रही थी कि ये सरकार अल्पमत में है, लेकिन आज दंड संशोधन विधेयक के दौरान हुई वोटिंग में भाजपा के दो विधायकों ने हमारे पक्ष में वोट किया. इसमें मैहर से भाजपा विधायक नारायण त्रिपाठी और ब्यौहारी के विधायक शरद कोल हैं. उन्होंने कहा कि मुझे ये बात साबित करनी थी कि ये सरकार अल्पमत में नहीं थी और आज विधेयक के पक्ष में हुई वोटिंग से ये साफ हो गया है. इतना ही नहीं बसपा, सपा और निर्दलीय विधायक भी हमारे साथ हैं. 

सुबह से चलता रहा चुनौती का दौर

कर्नाटक सरकार के बाद मध्यप्रदेश सरकार को गिराने को लेकर सुबह से ही भाजपा और कांग्रेस दोनों ओर से एक-दूसरे को चुनौती दिए जाने का सिलसिला चल रहा था. सबसे पहले नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव ने ट्वीट और फिर सदन में सरकार को गिराने की बात कहते हुए अल्पमत वाली सरकार बताया था. इसके बाद पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान भी इसी तरह की बात कहते रहे. वहीं भाजपा पर मुख्यमंत्री कमलनाथ ने सीधा हमला भी किया. उन्होंने भाजपा नेताओं को सदन के अंदर यह चुनौती दे डाली कि वे चाहें तो फ्लोर टेस्ट करा लें. इसी तरह कमलनाथ मंत्रिमंडल के सदस्य भी कमलनाथ सरकार को मजबूत सरकार बताते हुए 5 साल तक चलने वाली सरकार बताते रहे. वहीं भाजपा की ओर से कमलनाथ सरकार को अल्पमत की सरकार बताया जा रहा था.

कांग्रेस मेरा पुराना घर 

कांग्रेस के पक्ष में मतदान करने वाले दो विधायकों में से एक विधायक नारायण प्रसाद त्रिपाठी ने कहा कि वे भाजपा में अपने आप को उपेक्षित महसूस कर रहे थे. शिवराज सिंह चौहान ने उपचुनाव के समय मेरे क्षेत्र में बहुत सारी घोषणाएं कर डाली थी, मगर काम नहीं हुआ. इस कारण क्षेत्र जनता के सामने जवाब नहीं दे पा रहा था. कांग्रेस मेरा पुराना घर है, मैं अपने घर वापस आया हूं.

विधानसभा का सत्र समाप्त

राज्य विधानसभा का मानसून सत्र आज दो दिन पहले ही समाप्त हो गया. समय से पहले समाप्त हुए सत्र में सरकार ने बजट पारित कराया इसके अलावा सत्र के अंतिम दिन आज बुधवार को सरकार ने विधेयक भी पारित कराए. 8 जुलाई से शुरु हुआ यह सत्र 26 जुलाई तक चलना था, मगर दो दिन पहले आज ही सत्र को समाप्त कर दिया गया.

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