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टीआरपी प्रकरण: पूर्व बार्क अधिकारी पार्थो दासगुप्ता की अर्जी पर सुनवाई नौ फरवरी के लिए स्थगित

By भाषा | Updated: February 2, 2021 22:34 IST

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मुम्बई, दो फरवरी बंबई उच्च न्यायालय ने टेलीविजन रेटिंग प्वाइंट (टीआरपी) के कथित फर्जी घोटाले में आरोपी ब्रॉडकास्ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल (बार्क) के पूर्व मुख्य कार्यकारी अधिकारी पार्थो दासगुप्ता की अर्जी पर मंगलवार को सुनवाई नौ फरवरी के लिए स्थगित कर दी।

दासगुप्ता ने यह दलील देते हुए जमानत का अनुरोध किया है कि इस मामले में अन्य सभी आरोपी जमानत पर बाहर हैं। मुम्बई पुलिस की अपराध शाखा ने उन्हें पिछले साल 24 दिसंबर में टीआरपी मामले में गिरफ्तार किया था।

पिछले महीने मुम्बई की एक सत्र अदालत ने दासगुप्ता की जमानत अर्जी खारिज कर दी थी जिसकी प्रति एक फरवरी को उपलब्ध हुई। सत्र अदालत के आदेश की प्रति बंबई उच्च न्यायालय में सौंपी गयी।

दासगुप्ता पर अपने पद का दुरूपयोग करने और रिपब्लिक टीवी चलाने वाली कंपनी एआरजी आउटलायर मीडिया एवं इस टीवी के प्रधान संपादक अर्णब गोस्वामी से साठगांठ करके टीआरपी में छेड़छाड़ करने का आरोप है।

मंगलवार को दासगुप्ता के वकीलों-- अबाद पोंडा और शारदुल सिंह ने उच्च न्यायालय से कहा कि बार्क के पूर्व मुख्य कार्यकारी अधिकारी को मेरूदंड की समस्या है और उन्हें चिकित्सकीय देखरेख की जरूरत है।

पोंडा ने कहा , ‘‘ वह (दासगुप्ता) मर तो नहीं रहे हैं लेकिन यह (स्वास्थ्य) जोखिम में हैं और उन्हें चिकित्सकीय देखरेख की जरूरत है। ’’

पिछले महीने रक्त में शर्करा स्तर बढ़ने और बेहोश होने के बाद दासगुप्ता को तलोजा जेल से मुम्बई के जे जे अस्पताल ले जाया गया था। उन्हें 22 जनवरी की शाम को अस्पताल के आईसीयू से छुट्टी दी गयी थी।

विशेष सरकारी वकील शिशिर हीरे ने यह कहते हुए अदालत से कुछ वक्त मांगा की कि वह सोमवार को ही इस मामले में वकील नियुक्त किये गये हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि दासगुप्ता की एक ऐसी ही जमानत अर्जी उच्चतम न्यायालय में लंबित है।

हालांकि दासगुप्ता के वकीलों ने न्यायमूर्ति पी डी नायक की अगुवाई वाली पीठ से कहा कि वे शीर्ष अदालत में अर्जी पर आगे नहीं बढ़ेंगे।

इस पर न्यायमूर्ति नाईक ने बयान दर्ज किया और मामले की सुनवाई नौ फरवरी के लिए स्थगित कर दी।

सत्र अदालत के न्यायाधीश एम ए भोसले ने 20 जनवरी को दासगुप्ता की जमानत अर्जी खारिज करते हुए कहा था , ‘‘ मेरे सामने रखे गये कागजातों से ऐसा जान पड़ता है कि यह बस टीआरपी में छेड़छाड़ का ही नहीं , बल्कि उससे भी आगे का मामला है।’’

सत्र न्यायाधीश ने कहा था, ‘‘ मामले के कागजात से परिलिक्षत होता है कि आरोपी (दासगुप्ता) इस पूरे अपराध में मुख्य षडयंत्रकर्ता हैं। ’’

अदालत ने उनकी जामानत अर्जी खारिज करते हुए कहा था कि कि वैसे इस मामले में अन्य जमानत पर है लेकिन पुलिस ने दासगुप्ता के व्हाट्सअप चैट से काफी आंकड़े जुटाए हैं और उसे उनकी चैट का पूरा विषय सामने लाने के लिए उनसे पूछताछ की जरूरत है।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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