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त्रिपुरा : स्व-सहायता समूह से जुड़ने के बाद महिला की जिंदगी बदली

By भाषा | Updated: October 17, 2021 19:59 IST

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अगरतला, 17 अक्टूबर त्रिपुरा के धलाई जिले के सुदूर देवीचेरा गांव में रहने वाली मणिपुरी मूल की स्वप्ना सिन्हा (27) फोटोकॉपी की दुकान चलाने के अलावा महिलाओं के पारंपरिक परिधान बुनने का काम भी करती हैं। स्वप्ना का पति ऑटो-रिक्शा चलाता है और एक महीने में परिवार की आय लगभग 35,000 रुपये हो जाती है।

लेकिन कुछ वर्षों पहले स्वप्ना की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी और दो वक्त की रोटी कमाने के लिए वह और उसका पति छोटे-मोटे काम किया करते थे। स्वप्ना की जिंदगी ने उस समय एक नया मोड़ लिया जब वह सूक्ष्म महिला उद्यमियों को ऋण प्रदान करने वाले एक स्व-सहायता समूह (एसएचजी) की सदस्य बनी।

स्वप्ना को बुनाई मशीन, ऑटो-रिक्शा और फोटोकॉपी मशीन खरीदने के लिए एसएचजी से एक के बाद एक कुल तीन ऋण मिले।

स्वप्ना की कहानी जानने के लिए उसके घर पहुंचे संवाददाताओं के समूह से बातचीत के दौरान महिला उद्यमी स्वप्ना ने कहा, ‘‘जब मैंने अपने घर के एक कमरे में कोमार टाट (बुनाई की मशीन) लगाई, तो मुझे लगा कि यह मेरी अपनी मशीन है। इससे मुझे जो खुशी मिली, मैं बता नहीं सकती। कुछ ही महीनों के भीतर मैंने पैसा कमाना शुरू कर दिया।’’

स्वप्ना ने त्रिपुरा ग्रामीण आजीविका मिशन के धनलक्ष्मी स्वयं सहायता समूह की ओर से उपलब्ध कराए गए ऋण की मदद से 2017 में एक बुनाई मशीन खरीदी जिसकी मदद से वह 'इनाफी' (शरीर के ऊपरी हिस्से के चारों ओर लपेटने के लिए एक कपड़ा) और 'फानेक' (आवरण स्कर्ट) बुनती है।

एक अन्य ऋण ने स्वप्ना के बेरोजगार पति को एक ऑटो-रिक्शा खरीदने में मदद की जिससे परिवार की मासिक आय में और अधिक इजाफा हुआ।

एसएचजी के साथ काम करते हुए और अपने गांव तथा आस-पास के इलाकों में कपड़े बेचने के दौरान स्वप्ना ने देखा कि उन गांवों के छात्र अध्ययन सामग्री की फोटोकॉपी कराने के लिए काफी लंबी दूरी तय करते हैं।

स्वप्ना ने एसएचजी की ओर से उपलब्ध कराए गए 50 हजार रुपये के तीसरे ऋण की मदद से फोटोकॉपी करने वाली एक मशीन खरीदी और अब वह उसकी मदद से 10 हजार रुपये प्रतिमाह कमाती है।

स्वप्ना ने कहा, ‘‘मैंने सभी ऋण चुका दिए हैं और अब हम प्रति माह लगभग 35,000 रुपये कमाते हैं।’’

एसएचजी सदस्य के रूप में स्वप्ना सिन्हा की सफलता की कहानी पूर्वोत्तर राज्य में चर्चा का विषय बन गई है और उन्हें हाल ही में उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू और केंद्रीय ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री गिरिराज सिंह के साथ अपना अनुभव साझा करने का अवसर मिला।

त्रिपुरा के मुख्यमंत्री बिप्लब कुमार देब ने भी स्वप्ना की तारीफ करते हुए कहा, ‘‘वह सफलता अर्जित करने और आत्मनिर्भर बनने के लिए धुन की पक्की हैं।’’

आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक त्रिपुरा में 2018 में एसएचजी की संख्या 4061 थी, जिसमें 40,135 महिलाएं शामिल थीं। मौजूदा समय में राज्य में 23,705 एसएचजी हैं जिनमें 2,20,885 महिलाएं सदस्य हैं।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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