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टूलकिट मामला: अदालत ने दिशा रवि को तीन दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा

By भाषा | Updated: February 19, 2021 18:38 IST

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नयी दिल्ली, 19 फरवरी दिल्ली की एक अदालत ने किसान प्रदर्शन से संबंधित ‘‘टूलकिट’’ सोशल मीडिया पर साझा करने के आरोप में गिरफ्तार जलवायु कार्यकर्ता दिशा रवि को शुक्रवार को तीन दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया।

दिल्ली पुलिस ने पांच दिन की हिरासत अवधि समाप्त होने के बाद रवि को अतिरिक्त मुख्य मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट आकाश जैन के समक्ष पेश किया, जहां से उन्हें जेल भेजा गया।

पुलिस ने कहा कि फिलहाल रवि की हिरासत की आवश्यकता नहीं है और इस मामले में सह-आरोपी शांतनु मुकुल और निकिता जैकब के जांच में शामिल होने के बाद रवि से आगे की पूछताछ की जरूरत हो सकती है।

पुलिस ने कहा कि हिरासत में पूछताछ के दौरान रवि टालमटोल भरा रवैया अपनाती रहीं और सह-आरोपियों पर दोष मढ़ने का प्रयास किया।

पुलिस ने अदालत को बताया कि मुकुल और जैकब को 22 फरवरी को जांच एजेंसी के समक्ष पेश होने के लिए कहा गया है।

बचाव पक्ष के वकील ने पुलिस की याचिका का विरोध किया और अदालत से रवि को रिहा करने का अनुरोध किया।

उन्होंने यह भी कहा कि पुलिस द्वारा साक्ष्यों से छेड़छाड़ की आशंका है क्योंकि केस डायरी उपयुक्त तरीके से तैयार नहीं की गई है। ऐसे में रवि को पुलिस या न्यायिक हिरासत में रखे जाने का कोई आधार नहीं है।

अदालत को यह भी सूचित किया गया कि आरोपी ने जमानत याचिका दाखिल की है, जिस पर शनिवार को सुनवाई होगी।

उल्लेखनीय है कि पिछले रविवार को अदालत ने रवि को पांच दिन की पुलिस हिरासत में भेजा था।

इससे पहले, दिल्ली पुलिस ने शुक्रवार को गूगल और अन्य सोशल मीडिया कंपनियों से ‘टूलकिट’ बनाने वालों से जुड़े ईमेल आईडी, डोमेन यूआरएल और कुछ सोशल मीडिया अकाउंट की जानकारी देने को कहा था। जलवायु परिवर्तन कार्यकर्ता ग्रेटा थनबर्ग और अन्य ने यह ‘टूलकिट’ ट्विटर पर साझा की थी।

‘टूल किट’ में ट्विटर के जरिये किसी अभियान को ट्रेंड कराने से संबंधित दिशानिर्देश और सामग्री होती है।

दिल्ली पुलिस के ‘साइबर प्रकोष्ठ’ ने ‘‘भारत सरकार के खिलाफ सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक युद्ध’’ छेड़ने के लक्ष्य से ‘टूलकिट’ के ‘खालिस्तान समर्थक’ निर्माताओं के खिलाफ चार फरवरी को प्राथमिकी दर्ज की थी।

पुलिस ने बताया था कि दस्तावेज ‘टूलकिट’ का लक्ष्य भारत सरकार के प्रति वैमनस्य और गलत भावना फैलाना और विभिन्न सामाजिक, धार्मिक और सांस्कृतिक समूहों के बीच वैमनस्य की स्थिति पैदा करना है।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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