बिहार विधानसभा चुनाव के परिणाम आने के तीन माह बाद भी कांग्रेस नहीं चुन पाई है विधायक दल का नेता, बगैर विधायक दल का नेता सदन में बैठ रहे हैं कांग्रेस विधायक

By एस पी सिन्हा | Updated: February 16, 2026 16:34 IST2026-02-16T16:33:56+5:302026-02-16T16:34:01+5:30

विधानसभा के दो-दो सत्र होने के बावजूद कांग्रेस अभीतक विधायक दल का नेता नहीं चुन पाई है। जिसके चलते विधानसभा में कांग्रेस का कामकाज बगैर विधायक दल के नेता का ही चल रहा है।

Three months after the Bihar Assembly election results were announced, Congress has still not elected a legislative party leader. Congress MLAs are sitting in the House without a legislative party leader | बिहार विधानसभा चुनाव के परिणाम आने के तीन माह बाद भी कांग्रेस नहीं चुन पाई है विधायक दल का नेता, बगैर विधायक दल का नेता सदन में बैठ रहे हैं कांग्रेस विधायक

बिहार विधानसभा चुनाव के परिणाम आने के तीन माह बाद भी कांग्रेस नहीं चुन पाई है विधायक दल का नेता, बगैर विधायक दल का नेता सदन में बैठ रहे हैं कांग्रेस विधायक

पटना: विधानसभा का चुनाव नतीजे आए हुए तीन महीने से अधिक के वक्त बीत गए, लेकिन चुनाव में हुई करारी हार के बाद कांग्रेस अभीतक संभल नहीं पाई है। विधानसभा के दो-दो सत्र होने के बावजूद कांग्रेस अभीतक विधायक दल का नेता नहीं चुन पाई है। जिसके चलते विधानसभा में कांग्रेस का कामकाज बगैर विधायक दल के नेता का ही चल रहा है। ऐसे में सियासी गलियारे में यह चर्चा का विषय बन गया है कि आखिर कांग्रेस अपने विधायक दल का नेता चुनने से क्यों हिचक रही है? जबकि विधानसभा एक शीतकालीन सत्र खत्म हो गया और बजट सत्र भी आधा बीत चला है। 

इस बीच सियासी गलियारे में चर्चा तेज है कि पार्टी के भीतर एक बार फिर ‘टूट का डर’ इतना गहरा है कि आलाकमान किसी भी एक नाम पर मुहर लगाने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा है। पार्टी के भीतर यह माना जा रहा है कि विधायकों के टूटने का डर ही इस देरी की सबसे बड़ी वजह है। जबकि 23 जनवरी को राहुल गांधी ने दिल्ली में विधायकों से मुलाकात कर दूसरी पार्टी में न जाने का भरोसा लिया था। इसके बाद प्रदेश प्रभारी कृष्णा अल्लावरू की मौजूदगी में सदाकत आश्रम में बैठक हुई, जहां विधायकों ने नेता चयन का अधिकार आलाकमान को सौंप दिया। उम्मीद थी कि जल्द घोषणा होगी, लेकिन इंतजार लंबा होता गया। 

प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम ने पटना में होटल में विधायकों को डिनर पर बुलाकर सामंजस्य बनाए रखने की कोशिश की। विधायक मनोहर प्रसाद सिंह को समन्वय की जिम्मेदारी भी दी गई, लेकिन नेता चयन पर सहमति नहीं बन सकी। पार्टी के छह विधायकों में से चार ही ऐसे हैं, जिन पर विचार किया जा सकता है। स्वास्थ्य कारणों से अबिदुर रहमान इच्छुक नहीं हैं, जबकि कमरुल होदा की राजनीतिक पृष्ठभूमि को लेकर हिचकिचाहट है। मनोहर प्रसाद सिंह वरिष्ठ हैं, लेकिन जातीय समीकरण उन्हें मजबूत विकल्प नहीं बनाते। 

ऐसे में अभिषेक रंजन, सुरेंद्र प्रसाद और मनोज विश्वास के नाम चर्चा में हैं, फिर भी सहमति दूर है। सोमवार को कृष्णा अल्लावरू के पटना दौरे के दौरान संगठन सृजन अभियान पर बैठक हुई। पार्टी नेतृत्व इसे संगठन मजबूत करने का अवसर मान रहा है, जबकि राजनीतिक हलकों में नजर विधायक दल नेता की घोषणा पर टिकी है। इस बीच प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम का दावा है कि सभी विधायक एकजुट हैं और जल्द ही नेता की घोषणा होगी।

Web Title: Three months after the Bihar Assembly election results were announced, Congress has still not elected a legislative party leader. Congress MLAs are sitting in the House without a legislative party leader

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