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महामारी के कारण ऑनलाइन माध्यम से कार्यक्रम आयोजित करने के लिये जाना जायेगा यह साल

By भाषा | Updated: December 30, 2020 21:35 IST

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(मनीष सैन)

नयी दिल्ली, 30 दिसंबर कोरोना वायरस महामारी के कारण इस साल देशभर में लॉकडाउन की घोषणा की गयी और लोगों को घरों में रहने के लिये मजबूर होना पड़ा, लेकिन जल्द ही नयी परिस्थिति के अनुरूप खुद को ढालते हुए लोगों ने घरों में रहते हुये डिजिटल मंचों के जरिये हर तरह की सामाजिक गतिविधियों का आनंद लिया।

महामारी के कारण पूरे साल होने वाले सांस्कृतिक एवं सामाजिक कार्यक्रम बाधित होते दिखायी दिये, जिसमें कार्यक्रम, महोत्सव, कंसर्ट एवं सेमिनार आदि शामिल हैं। हालांकि, इनमें से कई कार्यक्रमों को डिजिटल रूप से आयोजित किया गया और इसमें व्यापक स्तर पर नये दर्शक, श्रोता आदि जुड़े ।

जिस प्रकार जूम पार्टी दोस्तों से आमने-सामने मुलाकात की जगह नहीं ले सकती है, ठीक उसी तरह ऑनलाइन आयोजन में लाइव शो जैसा आकर्षण नहीं है, लेकिन यह बेहतर विकल्प है ।

कोविड-19 के प्रसार को रोकने के उद्देश्य से मार्च में लगाये गये लॉकडाउन के कारण इस साल होने वाले ढेर सारे सार्वजनिक कार्यक्रमों को अनिश्चितकाल के लिये या तो रद्द कर दिया गया अथवा उन्हें आगे बढ़ा दिया गया, लेकिन उनमें से कई कार्यक्रमों का आयोजन डिजिटल तरीके से किया गया। कार्यक्रमों के आयोजकों का कहना है कि इनका बेहतर प्रभाव हुआ ।

जनवरी में राजस्थान की राजधानी में जयपुर साहित्य महोत्सव के सफल आयोजन के साथ इस साल की शुरूआत हुयी। कार्यक्रम के आयोजक टीमवर्क आर्ट्स ने पहले ही इसे अंतरारराष्ट्रीय स्तर पर आयोजित करने की योजना तैयार की थी। इनका आयोजन लंदन, न्यूयॉर्क, एडिलेड, टोरंटो एवं अन्य बड़े शहरों में होना था।

हालांकि, महामारी के प्रसार की वजह से उपजी नयी परिस्थितियों में ऐसा संभव नहीं था, ऐसे में टीमवर्क आर्ट्स ने तुरंत नया रास्ता निकाला।

टीमवर्क आर्ट्स के संस्थापक संजय के रॉय ने पीटीआई-भाषा को बताया कि इसके बाद जेएलएफ ने ऑनलाइन उपस्थिति बनायी और फेसबुक, ट्विटर, यू-ट्यूब जैसे ऑनलाइन मंचों पर इसके डिजिटल सीरीज ‘जेएलएफ ब्रेव न्यू वर्ल्ड’ को अप्रैल से लेकर अब तक 45 लाख लोगों ने देखा है ।

इसी तरह, पिछले पांच साल से उर्दू कविताओं एवं शायरी के प्रेमियों को रोमांचित करने वाले एक अन्य कार्यक्रम ‘जश्न ए रेख्ता’ के आयोजक रेख्ता फाउंडेशन ने रेख्ता लाइव कार्यक्रम के साथ ऑनलाइन जाने का फैसला किया।

रेख्ता लाइव ने 75 सत्र आयोजित किये और 50 से अधिक देशों में एक करोड़ से अधिक दर्शकों ने उन कार्यक्रमों को देखा है।

रेख्ता फाउंडेशन के संस्थापक संजय सर्राफ ने कहा कि कि रेख्ता लाइव की सफलता से जश्न ए रेख्ता का भविष्य तय नहीं होना चाहिये ।

इसी प्रकार, अन्य आयोजन भी ऑनलाइन हुये जिन्हें लॉकडाउन के दौरान दर्शकों ने बड़े पैमाने पर सराहा।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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