बिहार में सत्ता हस्तांतरण की प्रक्रिया निर्णायक मोड़ पर, 14-15 अप्रैल होगा अहम दिन, पीएम मोदी के भी भाग लेने की संभावना, जदयू-भाजपा नेताओं के बीच अहम बैठक जारी 

By एस पी सिन्हा | Updated: April 13, 2026 15:05 IST2026-04-13T15:05:02+5:302026-04-13T15:05:02+5:30

बिहार में सत्ता हस्तांतरण को लेकर 14-15 अप्रैल का दिन बेहद अहम माना जा रहा है। माना जा रहा है कि इन दो दिनों में बिहार के नए मुख्यमंत्री को लेकर चल रहा संशय खत्म हो सकता है।

The process of power transfer in Bihar reaches a decisive juncture; April 14–15 to be crucial days, with PM Modi also likely to participate A key meeting between JD(U) and BJP leaders is currently underway | बिहार में सत्ता हस्तांतरण की प्रक्रिया निर्णायक मोड़ पर, 14-15 अप्रैल होगा अहम दिन, पीएम मोदी के भी भाग लेने की संभावना, जदयू-भाजपा नेताओं के बीच अहम बैठक जारी 

बिहार में सत्ता हस्तांतरण की प्रक्रिया निर्णायक मोड़ पर, 14-15 अप्रैल होगा अहम दिन, पीएम मोदी के भी भाग लेने की संभावना, जदयू-भाजपा नेताओं के बीच अहम बैठक जारी 

पटना: बिहार की सियासत में सत्ता हस्तांतरण की प्रक्रिया इस समय अपने निर्णायक मोड़ पर खड़ी है। तारीख और समय से लेकर पूरे राजनीतिक घटनाक्रम की रूपरेखा लगभग साफ हो गई है। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि आखिर बिहार का अगला मुख्यमंत्री कौन होगा और इस फैसले में किसकी कितनी भूमिका रहेगी? इस तरह हर गुजरते पल के साथ नई सरकार के गठन का समय करीब आता जा रहा है। सियासी गलियारों में हलचल तेज हो गई है। 14-15 अप्रैल का दिन बेहद अहम माना जा रहा है। माना जा रहा है कि इन दो दिनों में बिहार के नए मुख्यमंत्री को लेकर चल रहा संशय खत्म हो सकता है।

इस बीच सरकार गठन को लेकर जदयू और भाजपा नेताओं के बीच अहम बैठक जारी है। यह बैठक उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के आवास पर हुई, जिसमें जदयू के वरिष्ठ नेता एवं केन्द्रीय मंत्री ललन सिंह और जदयू के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय झा मौजूद थे। माना जा रहा है कि इस बैठक में मुख्यमंत्री के चेहरे और सत्ता के बंटवारे पर विस्तार से चर्चा हुई है। गठबंधन के भीतर सहमति बनाने की कोशिश जारी है। जल्द ही नए मुख्यमंत्री के नाम पर अंतिम फैसला लिया जा सकता है, जिस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं। 

सूत्रों के अनुसार, एनडीए ने अपने सभी 202 विधायकों को 14 और 15 अप्रैल को पटना में ही रहने का निर्देश दिया है। विधायकों से कहा गया है कि वे इन दो दिनों में पटना से बाहर न जाएं। भाजपा ने केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान को केंद्रीय पर्यवेक्षक नियुक्त किया है, जो 14 अप्रैल को पटना पहुंचेंगे। पश्चिम बंगाल चुनाव में भाजपा के 50 से अधिक विधायक लगे हैं। 

सूत्रों की मानें तो 13 अप्रैल को इन सभी को पार्टी की ओर से संदेश जाएगा कि 14 अप्रैल की सुबह तक पटना आ जाएं। बंगाल चुनाव में बड़ी संख्या में कार्यरत बिहार भाजपा के अन्य नेताओं और कार्यकर्ताओं को सख्त मनाही है कि उन्हें नई सरकार के शपथ समारोह में नहीं आना है। 

समारोह के बाद वे सारे विधायक भी बंगाल लौटेंगे, जिन्हें वहां चुनाव में जिम्मा मिला है। वहीं, शिवराज सिंह चौहान 14 अप्रैल को पटना आएंगे। उनकी मौजूदगी में इसी दिन बिहार भाजपा विधानमंडल दल की बैठक में नेता के नाम की घोषणा होगी। इसी दिन एनडीए के अन्य दलों जदयू, लोजपा-(रा,) हम और रालोमो विधायक दल की अलग-अलग बैठकों के बाद एनडीए विधानमंडल दल की साझा बैठक में नए मुख्यमंत्री के नाम का ऐलान किया जाएगा।

इसके साथ ही भाजपा विधायक दल की बैठक दोपहर 2 बजे अटल सभागार में होगी, जिसमें सभी विधायक, विधान पार्षद और केंद्रीय पर्यवेक्षक शिवराज सिंह चौहान शामिल होंगे। दूसरी ओर, जदयू विधायक दल की बैठक एक अणे मार्ग में आयोजित की जाएगी, जहां पार्टी नेतृत्व और रणनीति पर फैसला होगा। सूत्रों के मुताबिक, निशांत कुमार को लेकर भी चर्चा संभव है। इन बैठकों के बाद नए मुख्यमंत्री के नाम पर स्थिति काफी हद तक साफ हो सकती है। 

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने 14 अप्रैल को कैबिनेट बैठक बुलाई। कैबिनेट सचिवालय विभाग की अधिसूचना के अनुसार, यह बैठक सुबह 11 बजे होगी। इस बैठक में वर्तमान मंत्रिपरिषद को भंग करने का औपचारिक निर्णय लिया जाएगा। इसके बाद दोपहर में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार लोक भवन जाकर राज्यपाल अता हुसैन को अपना इस्तीफा सौंपेंगे। इस इस्तीफे के साथ ही बिहार में नई सरकार के गठन का रास्ता पूरी तरह साफ हो जाएगा। 

इस्तीफे के बाद एनडीए विधायक दल की बैठक आयोजित की जाएगी, जिसे इस पूरे घटनाक्रम का सबसे अहम चरण माना जा रहा है। इसी बैठक में विधायक दल का नेता चुना जाएगा और उसी नाम पर अंतिम मुहर लगेगी। यही नेता 15 अप्रैल को बिहार के नए मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेगा।

वहीं, इस पूरी प्रक्रिया के बीच सबसे बड़ी चर्चा इस बात को लेकर हो रही है कि क्या मुख्यमंत्री के नाम पर अंतिम फैसला सीधे प्रधानमंत्री स्तर पर होगा? सूत्रों के अनुसार भाजपा ने इस बार पूरी रणनीति बेहद सधे हुए तरीके से बनाई है और इसमें केंद्रीय नेतृत्व की भूमिका काफी अहम रहने वाली है। इसी बीच खबर यह है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद 14 अप्रैल को बिहार पहुंच सकते हैं। 

जानकारी के मुताबिक उनका यह दौरा दो दिवसीय होगा। वे 14 अप्रैल को पटना पहुंचेंगे और यहीं रात्रि विश्राम करेंगे। इसके बाद 15 अप्रैल को होने वाले शपथ ग्रहण समारोह में भी शामिल होंगे। नई सरकार के शपथ ग्रहण के बाद वे दिल्ली वापस लौट सकते हैं। अगले दो दिनों के लिए कार्यक्रम को लेकर पटना जिला प्रशासन भी पूरी तरह से अलर्ट है। पटना में प्रधानमंत्री के आगमन को लेकर तैयारियां जोर-शोर से शुरू कर दी गई हैं। 

सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह अलर्ट मोड में हैं। राजधानी की सड़कों पर बैरिकेडिंग की जा रही है, खासकर एयरपोर्ट से लेकर प्रमुख मार्गों तक सुरक्षा इंतजाम कड़े किए जा रहे हैं। कई जगहों पर बांस-बल्ले लगाकर रास्तों को नियंत्रित किया जा रहा है ताकि वीवीआईपी मूवमेंट के दौरान किसी तरह की परेशानी न हो।

सूत्रों के मुताबिक प्रशासन ने परिवहन विभाग से करीब 600 लग्ज़री गाड़ियों की डिमांड की है। इन गाड़ियों में टोयोटा इनोवा, हुंडई क्रेटा और टोयोटा इनोवा क्रिस्टा जैसे हाई-प्रोफाइल वाहन शामिल हैं, जो वीवीआईपी मूवमेंट के लिए इस्तेमाल होंगे। यह इंतजाम इस बात का इशारा है कि शपथ ग्रहण समारोह को बेहद भव्य और हाई-प्रोफाइल बनाने की तैयारी है। 

इस बीच पटना के जिलाधिकारी डॉ. एस.एम. त्यागराजन सोमवार को खुद तैयारियों का जायजा लेने लोक भवन पहुंचे और राज्यपाल सैयद अता हसनैन को सुरक्षा, वीवीआईपी मूवमेंट और पार्किंग व्यवस्था की विस्तृत जानकारी दी। स्वास्थ्य विभाग को भी स्टैंडबाय पर रखा गया है, जहां मेडिकल टीमें और एंबुलेंस समारोह स्थल पर मुस्तैद रहेंगी। 

इसके साथ ही फायर ब्रिगेड और आपदा प्रबंधन की टीमों को भी अलर्ट मोड पर रहने का निर्देश दिया गया है। पटना में वीआईपी मूवमेंट के कारण लोगों को जाम की समस्या न हो, इसके लिए विशेष ट्रैफिक प्लान तैयार किया गया है। पटना के प्रमुख मार्गों पर रूट डायवर्जन की योजना बनाई जा रही है, जिसकी जानकारी जल्द ही सार्वजनिक की जाएगी।

उधर, उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के समर्थकों ने पूरे पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ अनुष्ठान संपन्न किया और सम्राट चौधरी के गठबंधन के अगले मुख्यमंत्री बनने की प्रार्थना की। प्रार्थना के लिए सुबह-सुबह ही मंदिर परिसर में कार्यकर्ताओं और स्थानीय श्रद्धालुओं की भीड़ जुटने लगी थी। 

वैदिक मंत्रों के उच्चारण के बीच आयोजित इस हवन के दौरान, वहां मौजूद लोगों ने सम्राट चौधरी के नेतृत्व में बिहार के विकास की गति तेज होने की प्रार्थना की। कार्यकर्ताओं ने कहा कि वे सम्राट चौधरी को एक सक्षम, लोकप्रिय और मजबूत प्रशासक मानते हैं, जिनके हाथों में बिहार का नेतृत्व सुरक्षित है।

इस बीच उपमुख्यमंत्री विजय सिन्हा ने कहा कि नई सरकार का गठन ‘औपचारिक प्रक्रिया’ है। उन्होंने कहा कि जिस दिन नीतीश कुमार राज्यसभा के लिए निर्वाचित हुए, तभी सब तय हो गया था। मंगलवार को नीतीश सरकार की आखिरी कैबिनेट बैठक है। बैठक को “काफी भावुक क्षण” बताया। कल विधायक दल की बैठक संभव है। परसों शपथ ग्रहण की संभावना है। उन्होंने कहा कि निशांत कुमार को जिम्मेदारी मिलती है तो सब गौरवान्वित होंगे।

Web Title: The process of power transfer in Bihar reaches a decisive juncture; April 14–15 to be crucial days, with PM Modi also likely to participate A key meeting between JD(U) and BJP leaders is currently underway

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