यूपी में फिर बंद होने के कगार पर पहुंची नेशनल मोबाइल मेडिकल यूनिट, सूबे के 54 जिलों में 172 एनएमएमयू के जरिए ग्रामीणों का हो रहा इलाज

By राजेंद्र कुमार | Updated: January 4, 2026 20:17 IST2026-01-04T20:17:28+5:302026-01-04T20:17:35+5:30

यूपी में यह दूसरी बार है जब नेशनल मोबाइल मेडिकल यूनिट बंद होने के कगार पर पहुंच गई है. इसके पहले मायावती के शासन में वर्ष 2011 में यह सेवा शुरू होने के एक साल बाद बंद हो गई थी.

The National Mobile Medical Units in UP are once again on the verge of closure. Currently, villagers in 54 districts of the state are receiving treatment through 172 NMMUs | यूपी में फिर बंद होने के कगार पर पहुंची नेशनल मोबाइल मेडिकल यूनिट, सूबे के 54 जिलों में 172 एनएमएमयू के जरिए ग्रामीणों का हो रहा इलाज

यूपी में फिर बंद होने के कगार पर पहुंची नेशनल मोबाइल मेडिकल यूनिट, सूबे के 54 जिलों में 172 एनएमएमयू के जरिए ग्रामीणों का हो रहा इलाज

लखनऊ:उत्तर प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों के इलाज के लिए शुरू की गई नेशनल मोबाइल मेडिकल यूनिट (एनएमएमयू) पर फिर संकट के बादल मंडराने लगे हैं. इसकी वजह है एनएमएमयू में कार्यरत डॉक्टरों और कर्मचारियों को करीब तीन माह से मानदेय न मिलना. इस कारण एनएमएमयू में कार्यरत डॉक्टर और कर्मचारी काम छोड़ने के लिए विवश हो गए है. 

डॉक्टर और स्टाफ की कमी के कारण बीते 20 दिनों से प्रदेश के 54 जिलों में कार्यरत 172 एनएमएमयू ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों के इलाज के लिए नहीं जा रही हैं. जबकि बीते साल ही प्रदेश सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में मरीजों को बेहतर चिकित्सा सेवा देने के लिए प्रमाण पत्र दिया गया था, लेकिन अब प्रदेश में नेशनल मोबाइल मेडिकल सेवा के बंद होने का खतरा उत्पन्न हो गया है.

यूपी मायावती ने शुरू की थी यह योजना :

यूपी में यह दूसरी बार है जब नेशनल मोबाइल मेडिकल यूनिट बंद होने के कगार पर पहुंच गई है. इसके पहले मायावती के शासन में वर्ष 2011 में यह सेवा शुरू होने के एक साल बाद बंद हो गई थी. स्वास्थ्य विभाग के अफसरों के अनुसार, वर्ष 2008 में बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बिहार के ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों के प्राथमिक इलाज और जांच आदि के लिए मोबाइल मेडिकल यूनिट सेवा की शुरुआत की थी. इसे मयवाती ने भी यूपी में लागू किया था. इसमें एक डॉक्टर, एक स्टॉफ नर्स, एक लैब टेक्नीशियन, एक फार्मासिस्ट और चालक होते हैं. एक बड़ी बस में चिकित्सा उपकरणों के साथ यह यूनिट गांव में जाकर मरीजों का निशुल्क उपचार, जांच और दवा देती है. 

गंभीर मरीजों को चिन्हित करके जिला अस्पताल अथवा मेडिकल कॉलेज रेफर करती है. इस यूनिट को लोगों की दी जाने वाली दावा जिले के मुख्य चिकित्साधिकारी (सीएमओ) उपलब्ध कराते है. यूपी में इस सेवा से ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों ने बहुत पसंद किया लेकिन मायावती शासन में हुए एनआरएचएम घोटाले के कारण इस सेवा बंद कर दिया गया. 

इसके बाद 30 नवंबर 2018 को मेडिकल मोबाइल सेवा को शुरू करने के लिए कंपनी और सरकार के बीच सात वर्ष के लिए समझौता पत्र पर हस्ताक्षर किया गया. इसके बाद 18 फरवरी 2019 को इसे विधिवत शुरू किया गया. 29 नवंबर 2025 को इस सेवा का करार खत्म हो गया, लेकिन राज्य के 55 जिलों में मोबाइल यूनिट लोगों का इलाज करती रही.

इसलिए नहीं हो रहा मोबाइल यूनिट से इलाज :  

बताया जा रहा है कि बीते अक्टूबर से मोबाइल यूनिट में तैनात डॉक्टर, स्टॉफ नर्स, लैब टेक्नीशियन, फार्मासिस्ट और चालक को मानदेय नहीं मिला. बस के लिए डीजल और लोगों को देने के लिए दवाओं के न मिलने के कारण यह मोबाइल यूनिट बीते 20 दिनों से लोगों के इलाज के लिए नहीं जा रही हैं. मोबाइल वैन में कार्यरत स्टाफ का कहना है कि वैन संचालित करने वाली कंपनी जल्द ही भुगतान होने का वादा कर रही है, लेकिन मानदेय नहीं मिलने की वजह से उनकी घर गृहस्थी प्रभावित हो रही है और अब वह बिना मानदेय के अब आगे कार्य करने की स्थिति में नहीं है. 

इस वजह से अब यूपी के 55 जिलों के उन ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों का इलाज नहीं हो पा रहा हैं, जहां प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र भी नहीं है. यही नहीं  गोरखपुर, बस्ती, बहराइच, बांदा जिला कारागार सहित विभिन्न जेलों में कैदियों की जांच व इलाज के लिए भी इन मोबाइल बैन का प्रयोग किया जाता था, इन जेलों में भी कैदियों के जांच आदि प्रभावित हो रही है. 

स्वास्थ्य विभाग के अफसरों के अनुसार, बीते छह वर्षों में एनएमएमयू ने डेढ़ करोड़ से अधिक ग्रामीण लोगों को उनके घर पर उपचार उपलब्ध कराया है. करीब 35 लाख से अधिक लोगों की निशुल्क जांच की गई है. वर्ष 2024 में 29,26,758 मरीजों को उपचार दिया गया और 6,43259 की जांच की गई. इसी तरह वर्ष 2025 में अब तक 23,77,436 मरीजों को उपचार और 4,76,291 की जांच की गई है.

जल्दी शुरू होगी मोबाइल यूनिट : उप मुख्यमंत्री  

फिलहाल मोबाइल बैन से लोगों का किया जाने वाले इलाज बंद हैं.इस सेवा को चलाएं रखने के लिए सूबे सूबे के उप मुख्यमंत्री बृजेश पाठक ने एनएचएम के अफसरों से एनएमएमयू में कार्यरत डॉक्टर और स्टाफ का भुगतान करने को कहा है. बृजेश पाठक को उम्मीद है कि जल्दी ही सभी 172 एनएमएमयू अपने क्षेत्रों में लोगों का इलाज करती हुई दिखाई देंगी.

मोबाइल वैन के नोडल अधिकारी रवि कुमार का कहना है कि मोबाइल सेवा बंद नहीं होगी. मोबाइल वैन से होने वाले इलाज आदि का भुगतान एनएचएम के जरिए होता है. इस वक्त एनएचएम के पोर्टल में कुछ बदलाव चल रहा था. बिल का मूल्यांकन करके भेज दिया गया है. जल्द ही भुगतान मिल जाएगा. इस सेवा को आगे चलाने की प्रक्रिया भी चल रही है. उम्मीद है कि जल्दी ही मोबाइल वैन से लोगों का इलाज होने लगेगा.

Web Title: The National Mobile Medical Units in UP are once again on the verge of closure. Currently, villagers in 54 districts of the state are receiving treatment through 172 NMMUs

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