विदेश मंत्रालय ने चीन के भारतीय क्षेत्र के नाम बदलने के कदम पर पलटवार किया, इसे एक शरारती प्रयास बताया
By रुस्तम राणा | Updated: April 12, 2026 20:32 IST2026-04-12T20:32:54+5:302026-04-12T20:32:54+5:30
मीडिया के सवालों का जवाब देते हुए विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत, चीन की तरफ से उन जगहों के नाम बदलने की "शरारती कोशिशों" को पूरी तरह से खारिज करता है, जो भारत का हिस्सा हैं।

विदेश मंत्रालय ने चीन के भारतीय क्षेत्र के नाम बदलने के कदम पर पलटवार किया, इसे एक शरारती प्रयास बताया
नई दिल्ली: भारत ने रविवार को चीन द्वारा भारतीय क्षेत्र के स्थानों को मनगढ़ंत नाम देने के प्रयासों को कड़े शब्दों में खारिज कर दिया, और ज़ोर देकर कहा कि ऐसे कदमों से अरुणाचल प्रदेश पर संप्रभुता से जुड़ी ज़मीनी हकीकत नहीं बदली जा सकती। मीडिया के सवालों का जवाब देते हुए विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत, चीन की तरफ से उन जगहों के नाम बदलने की "शरारती कोशिशों" को पूरी तरह से खारिज करता है, जो भारत का हिस्सा हैं।
उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि ऐसी हरकतें झूठे दावों और मनगढ़ंत कहानियों पर आधारित हैं, जिनकी कोई वैधता नहीं है। जायसवाल ने दोहराया कि संबंधित इलाके, जिनमें अरुणाचल प्रदेश भी शामिल है, भारत का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा थे, हैं और हमेशा रहेंगे। उन्होंने कहा कि नए नाम रखने की कोशिशों से भारत की क्षेत्रीय अखंडता में कोई बदलाव नहीं आता है, और इन्हें बेबुनियाद दावों को मज़बूत करने की एक कोशिश के तौर पर देखा जाता है।
In response to media queries regarding China giving fictitious names to places, MEA Official Spokesperson Randhir Jaiswal said: India categorically rejects any mischievous attempts by the Chinese side to assign fictitious names to places which form part of the territory of India.… pic.twitter.com/aGkhWToIFk
— ANI (@ANI) April 12, 2026
प्रवक्ता ने यह भी चेतावनी दी कि इस तरह के कदम भारत और चीन के बीच संबंधों को स्थिर और सामान्य बनाने के चल रहे प्रयासों को कमज़ोर करते हैं। उन्होंने चीन से आग्रह किया कि वह ऐसे कदमों से बचे, जो द्विपक्षीय संबंधों में नकारात्मकता लाते हैं और आपसी समझ को बेहतर बनाने के उद्देश्य से की गई पहलों में बाधा डालते हैं। हाल के वर्षों में, सीमा-संबंधी विवादों और क्षेत्रीय दावों में टकराव के कारण भारत और चीन के बीच संबंध संवेदनशील बने रहे हैं।