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जमीनी हकीकतः देश में  75 % युवाओं ने 21 साल की उम्र पूरी होने से पहले पी शराब, 47% ने किया सिगरेट का सेवन

By लोकमत न्यूज़ डेस्क | Updated: September 28, 2019 13:11 IST

शराब के सेवन के लिये कानूनी उम्रसीमा 21 साल है। दक्षिण मुंबई में स्थित सेंट जेवियर कॉलेज के प्रथम वर्ष के छात्रों ने हाल में यह सर्वेक्षण किया। कॉलेज में इतिहास विभाग के प्रमुख डॉ. अवकाश जाधव के मार्गदर्शन में यह सर्वेक्षण किया गया।

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ठळक मुद्देसर्वेक्षण में मुंबई, पुणे, दिल्ली, कोलकाता, राजस्थान समेत कई शहरों के 16 से 21 साल आयुवर्ग के कम से कम 1,000 युवाओं को शामिल किया था।इस सर्वेक्षण में चेक गणराज्य की राजधानी प्राग और मध्य यूरोप के देश हंगरी को भी शामिल किया गया है।

कई शहरों में किये गये एक सर्वेक्षण में यह खुलासा हुआ है कि भारत में कम से कम 75 प्रतिशत युवाओं ने 21 साल की उम्र पूरी होने से पहले ही शराब का सेवन कर लिया।

शराब के सेवन के लिये कानूनी उम्रसीमा 21 साल है। दक्षिण मुंबई में स्थित सेंट जेवियर कॉलेज के प्रथम वर्ष के छात्रों ने हाल में यह सर्वेक्षण किया। कॉलेज में इतिहास विभाग के प्रमुख डॉ. अवकाश जाधव के मार्गदर्शन में यह सर्वेक्षण किया गया।

रिपोर्ट के नतीजों को सहायक पुलिस आयुक्त, अधीक्षक, नशीला पदार्थ नियंत्रण ब्यूरो (एनसीबी), भूमेश अग्रवाल को बृहस्पतिवार को पेश किया गया। सर्वेक्षण में मुंबई, पुणे, दिल्ली, कोलकाता, राजस्थान समेत कई शहरों के 16 से 21 साल आयुवर्ग के कम से कम 1,000 युवाओं को शामिल किया था।

इस सर्वेक्षण में चेक गणराज्य की राजधानी प्राग और मध्य यूरोप के देश हंगरी को भी शामिल किया गया है। सर्वेक्षण में यह पता चला है कि कम से कम 75 प्रतिशत युवा 21 साल की उम्र पूरी होने से पहले ही शराब का सेवन कर चुके थे जबकि शराब के सेवन के लिये कानूनी उम्र 21 साल है।

47 प्रतिशत युवा सिगरेट का सेवन कर चुके थे। इसमें यह भी कहा गया है कि 20 प्रतिशत युवा मादक पदार्थ का जबकि 30 प्रतिशत युवा हुक्का पी चुके थे। रिपोर्ट के अनुसार, लगभग 88 प्रतिशत युवा 16 से 18 वर्ष की उम्र में कुछ या अन्य तरह का नशा आजमा चुके थे।

इसके अनुसार जिज्ञासा, साथियों का दबाव और ऐसे नशीले पदार्थों तक आसान पहुंच ऐसे प्रमुख कारक हैं जो युवाओं को नशे की ओर धकेलते हैं। सर्वेक्षण में शामिल 17 प्रतिशत युवाओं ने बताया कि अपनी नशे की आदत से उबरने के लिये उन्होंने बाहरी मदद ली जबकि 83 प्रतिशत ने कहा कि उन्हें मालूम नहीं है कि इस समस्या से निकलने के लिये उन्हें कहां से और कैसे मदद मिलेगी।

रिपोर्ट पर अवकाश जाधव ने कहा, ‘‘इस सर्वेक्षण का मकसद ऐसी अस्वास्थ्यकर आदतों को अपनाने के पीछे की जमीनी हकीकत को, इसके कारण को समझना और ऐसी आदतों को बढ़ावा देने में शामिल लोगों की पहचान करना है।’’ 

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