लखनऊ: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अधिवक्ताओं (वकीलों) पर हमेशा ही मेहरबान रहे हैं. अपने पहले शासनकाल में मुख्यमंत्री योगी ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की नीतियों से प्रभावित अधिवक्ताओं की तैनाती विभिन्न न्यायालयों में सरकारी वकील के पद पर की थी. ताकि न्यायालयों में सरकार के लिए यह वकील पैरवी कर सकें. अब अपने दूसरे कार्यकाल में सीएम योगी इन सरकारी वकीलों की फीस में 50 प्रतिशत तक का इजाफे करने जा रहे हैं.
सरकार का कहना है कि पिछले डेढ़ दशक में महंगाई में बढ़ोत्तरी हुई है. सरकारी कर्मचारियों को भी समय-समय पर महंगाई भत्ते का लाभ दिया जा रहा है लेकिन न्यायालयों में सरकार के लिए पैरवी करने वाले वकीलों फीस में लंबे समय कोई बदलाव नहीं किया गया है.
इसी सोच के तहत ही न्याय विभाग ने सरकारी वकीलों की फीस में 50 प्रतिशत तक का इजाफा किए जाने का प्रस्ताव तैयार किया है. जल्दी ही इस प्रस्ताव पर कैबिनेट में मोहर लगेगी. सरकारी वकीलों की फीस में इजाफा होने से करीब पांच हजार से अधिक सरकारी वकीलों को प्रदेश में लाभ होगा और सरकार के खजाने पर फीस बढ़ोत्तरी करने से 120 करोड़ रुपए का बोझ आएगा.
फीस इजाफे का यह है प्रस्ताव
गौरतलब है कि प्रदेश सरकार ने जिला न्यायालय से लेकर हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट तक में सरकार का पक्ष रखने के लिए तेज तर्रार वकीलों के पैनल बनाए हुए हैं. इन वकीलों को मासिक रिटेनरशिप और प्रति सुनवाई फीस दी जाती है. न्याय विभाग के अफसरों से मिली जानकारी के मुताबिक जिला न्ययालयों में आखिरी बार वर्ष 2016 में फीस बढ़ाई गई थी. जबकि महाधिवक्ता को वर्ष 2012 में निर्धारित हुई रिटेनरशिप और बहस की फीस के हिसाब से अभी भुगतान किया जा रहा है.
ऐसे में अब जिला शासकीय अधिवक्ता (डीजीसी) को रिटेनरशिप 13 हजार से अधिक और सुनवाई के लिए 2500 रुपए दिए जाने का प्रस्ताव तैयार किया गया है. जबकि अपर जिला शासकीय अधिवक्ता ( एडीजीसी) की मौजूदा रिटेनरशिप 7200 र्यपये महीना और फीस 1500 रुपए प्रति सुनवाई है, अब इसे बढ़ाकर 11,000 रुपए और 2300 रुपए किए जाने का सुझाव दिया गया है.
महाधिवक्ता की रिटेनरशिप अभी 75,000 रूपए महीना और बहस की फीस 60,000 रुपए है. इसे बढ़ाकर एक लाख दस हजार रुपए महीना करने का सुझाव दिया हैं लेकिन बहस की फीस 60,000 इजाफ़ा करने की राय नहीं दी गई है. अपर महाधिवक्ता की रिटेनरशिप और फीस में 50 प्रतिशत इजाफ़ा किए जाने का सुझाव प्रस्ताव में दिया गया.
इसी प्रकार सुप्रीम कोर्ट में अपर महाधिवक्ता की रिटेनरशिप और प्रति सुनवाई फीस भी बढ़ाकर करीब 45,000 रुपए किए जाने का प्रस्ताव है. सरकारी वकीलों की फीस में की जाने वाली बढ़ोत्तरी से सरकार पर करीब 120 करोड़ रुपए का अधिक का खर्च आएगा. बताया जा रहा है मुख्यमंत्री योगी इस प्रस्ताव से सहमत हैं और उन्होने इसे कैबिनेट के समक्ष रखने के निर्देश दिए हैं, ताकि इस प्रस्ताव को मंजूरी दी जा सके.
इन सब की बढ़ेगी फीस और रिटेनरशिप
- सुप्रीम कोर्ट में एडवोकेट आन रिकार्ड, विशेष, वरिष्ठ व कनिष्ठ पैनल अधिवक्ता. - इलाहाबाद हाईकोर्ट और लखनऊ खंडपीठ के मुख्य स्थायी अधिवक्ता, अपर मुख्य स्थायी अधिवक्ता, शासकीय अधिवक्ता, ब्रीफ़ होल्डर. - जिला न्यायालयों में तैनात जिला शासकीय अधिवक्ता (वकील), अपर/सहायक/ऊओ जिला शासकीय अधिवक्ता, विशेष अधिवक्ता और न्याय मित्र.