नीतीश कुमार के इशारे पर ही चलेगी बिहार में सरकार, सत्ता का केंद्र बना रहेगा जदयू
By एस पी सिन्हा | Updated: March 7, 2026 15:20 IST2026-03-07T15:20:06+5:302026-03-07T15:20:06+5:30
नीतीश कुमार के पास भाजपा से महज 4 विधायक ही कम हैं। भाजपा के बिहार में 89 विधायक हैं तो जदयू के 85 हैं। वे न चाहें तो भाजपा का मुख्यमंत्री नहीं बन सकता।

नीतीश कुमार के इशारे पर ही चलेगी बिहार में सरकार, सत्ता का केंद्र बना रहेगा जदयू
पटना: बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अब प्रदेश की राजनीति से हटकर केंद्र की सियासत में सक्रिय होने जा रहे हैं। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भले ही सत्ता हस्तांतरित कर रहे हों, लेकिन सत्ता और सियासत पर उनकी धमक पूर्व की तरह बरकरार रहने वाली है। इसका कारण यह है कि सत्ता की चाबी नीतीश कुमार के ही हाथ रहने वाली है। क्योंकि सत्ता में चाहे किसी कोई भी रहे जदयू विधायकों की संख्या इतनी है कि माइनस इनके सत्ता पर काबिज हो ही नहीं सकता। सूत्रों की मानें तो 10 से 14 मार्च के बीच मुख्यमंत्री अपने पद से इस्तीफा दे सकते हैं।
नीतीश कुमार के पास भाजपा से महज 4 विधायक ही कम हैं। भाजपा के बिहार में 89 विधायक हैं तो जदयू के 85 हैं। वे न चाहें तो भाजपा का मुख्यमंत्री नहीं बन सकता। यह भी कि वे चाहें तो सत्ता सुख के लिए तिलमिला रहे तेजस्वी यादव के नेतृत्व वाले महागठबंधन और दूसरे विपक्षी दलों के साथ सरकार बना सकते हैं। पर, उन्हें महागठबंधन के साथ काम करने का कटु अनुभव है। वे कहते भी रहे हैं कि 2 बार इधर-उधर जाकर उनसे गलती हुई। वे कई मौकों पर यह बात कह चुके हैं कि अब वे वैसी गलती नहीं करेंगे। इसलिए राज्यसभा जाने के उनके फैसले को साजिश कहना कहीं से भी उचित नहीं लगता।
नीतीश को राजनीति का चाणक्य कहने वाले यह भी जानते हैं कि वे किसी के दबाव में नहीं आते। जब उनके पास सिर्फ 43 विधायक थे, जब भी उन्होंने किसी के दबाव में काम नहीं किया। दबाव महसूस हुआ तो उन्होंने भाजपा का साथ छोड़ा और उधर नाराजगी हुई तो भाजपा के साथ लौट आए। अब तो उनके 85 विधायक हैं। ऐसे में भाजपा पर वह अब और भी भारी हैं। वे न चाहते तो कोई जबरन उन्हें राज्यसभा नहीं भेज पाता। बिहार में नीतीश कुमार ने सर्वाधिक समय मुख्यमंत्री रहने का पिछला रिकॉर्ड तोड़ दिया।
10वीं बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने का राष्ट्रीय रिकॉर्ड भी उनके ही नाम है। हालांकि उनकी पहले की समता पार्टी हो या बाद का जदयू, अपने बूते नीतीश कुमार कभी मुख्यमंत्री बनने का बहुमत नहीं जुटा पाए। लेकिन भाजपा के सहयोग से वे 2005 से ही बिहार का मुख्यमंत्री बनते रहे हैं। 2014 के कुछ महीनों को छोड़ दें तो वे लगातार 20 साल से मुख्यमंत्री रहे हैं। उन्हें कभी किसी ने मुख्यमंत्री बनने में बांधा नहीं पहुंचाई। अब वे अपनी इच्छा से राज्यसभा जा रहे हैं तो जदयू समर्थकों के साथ विपक्षी दलों के नेताओं को यह भाजपा की सुनियोजित साजिश लग रही है।
भाजपा पर ऐसा आरोप लगाने वाले यह भूल जाते हैं कि केंद्र में उन्हें मंत्री बनने के अलावा बिहार का सीएम बनने तक भाजपा ने उन्हें उदार मन से मदद पहुंचाई है। इस बीच सत्ता गलियारों में चर्चा है कि मुख्यमंत्री नीतीश के राज्यसभा जाने के बाद बिहार में नई सरकार के गठन का फार्मूला लगभग तैयार हो चुका है। भाजपा और जदयू के बीच नए मुख्यमंत्री और मंत्रिमंडल को लेकर गहन विचार-विमर्श चल रहा है। प्रस्तावित कैबिनेट के फार्मूले के अनुसार कुल 36 मंत्री बनाए जा सकते हैं। इसमें भाजपा के 17, जदयू के 15, लोजपा (रा) के 2, जबकि हम और रालोमो से एक-एक मंत्री शामिल हो सकते हैं।