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भारत-अमेरिका के बीच सहयोग की गहराई ‘व्यापक रक्षा साझेदारी’ के महत्व को दर्शाती है: ऑस्टिन

By भाषा | Updated: March 19, 2021 22:35 IST

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नयी दिल्ली, 19 मार्च भारत की अपनी तीन दिवसीय यात्रा की शुरुआत करते हुए अमेरिकी रक्षा मंत्री लॉयड जे ऑस्टिन ने शुक्रवार को कहा कि दोनों देशों के बीच सहयोग की गहराई ‘‘व्यापक रक्षा साझेदारी’’ के महत्व को दर्शाती है और वे हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सामने आने वाली चुनौतियों पर मिलकर काम कर सकते हैं।

ऑस्टिन के भारत आने का उद्देश्य हिंद-प्रशांत सहित क्षेत्र में चीन की बढ़ती सैन्य आक्रमकता के मद्देनजर द्विपक्षीय रक्षा एवं सुरक्षा संबंधों को और मजबूत करना है।

ऑस्टिन की प्रथम विदेश यात्रा के दौरान तीन देशों के दौरे में भारत तीसरा पड़ाव स्थल है। उनकी इस यात्रा को (अमेरिकी राष्ट्रपति) जो बाइडन प्रशासन के अपने करीबी सहयोगियों और क्षेत्र में साझेदारों के साथ मजबूत प्रतिबद्धता के तौर पर देखा जा रहा है।

ऑस्टिन ने शाम को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से मुलाकात की।

उन्होंने ट्वीट किया, ‘‘यहां भारत में आकर रोमांचित हूं। हमारे दोनों देशों के बीच सहयोग की गहराई हमारी व्यापक रक्षा साझेदारी के महत्व को दर्शाती है और हम हिंद-प्रशांत क्षेत्र के सामने आने वाली चुनौतियों पर मिलकर काम कर सकते हैं।’’

ऑस्टिन का स्वागत करते हुए, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि उनकी भारत यात्रा निश्चित रूप से दो देशों के बीच सहयोग और साझेदारी को और मजबूत करने वाली है।

सिंह ने ट्वीट किया, ‘‘कल होने वाली बैठक के लिए उत्सुक हूं।’’

ऑस्टिन की पालम हवाई अड्डे पर भारत के वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों और अमेरिकी दूतावास के राजनयिकों ने अगवानी की।

उनकी यात्रा की तैयारियों और एजेंडा की जानकारी रखने वाले लोगों ने बताया कि दोनों पक्षों के बीच बातचीत में भारत-अमेरिका संबंध को और प्रगाढ़ करने के तरीकों, हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने, पूर्वी लद्दाख में चीन के आक्रामक व्यवहार, आतंकवाद से पैदा हुई चुनौतियों और अफगान शांति वार्ता पर जोर रहने की उम्मीद है।

उन्होंने बताया कि तीन अरब डॉलर से अधिक (अनुमानित) की लागत से अमेरिका से करीब 30 ‘मल्टी-मिशन’ सशस्त्र प्रीडेटर ड्रोन खरीदने की भारत की योजना पर भी चर्चा होने की उम्मीद है। ये ड्रोन सेना के तीनों अंगों (थल सेना, वायु सेना और नौ सेना) के लिए खरीदने की योजना है।

मध्य ऊंचाई पर लंबी दूरी तक उड़ान भरने में सक्षम इस ड्रोन का निर्माण अमेरिकी रक्षा कंपनी जनरल एटोमिक्स करती है। यह ड्रोन करीब 35 घंटे तक हवा में रहने में सक्षम है और जमीन एवं समुद्र में अपने लक्ष्य को भेद सकता है।

बताया जाता है कि करीब 18 अरब डॉलर की लागत से 114 लड़ाकू विमान खरीदने की भारत की योजना पर भी वार्ता होने की संभावना है। दरअसल, अमेरिकी रक्षा साजो सामान निर्माण कंपनियां बोइंग और लॉकहीड मार्टिन की इस करार पर नजरें हैं।

क्वाड समूह के हिंद-प्रशांत क्षेत्र में अपना सहयोग विस्तारित करने का संकल्प लेने के कुछ दिनों बाद अमेरिकी रक्षा मंत्री की भारत की यात्रा हो रही है। चार देशों के इस समूह में भारत, अमेरिका, जापान और आस्ट्रेलिया शामिल हैं।

हालांकि, लोकतंत्र और मानवाधिकार के मुद्दे अमेरिकी रक्षा विभाग के अधिकार क्षेत्र में नहीं आते हैं, लेकिन सीनेटर ने ऑस्टिन से इन चिंताओं को भी भारत के नेताओं के समक्ष उठाने का आग्रह किया है।

ऑस्टिन की यात्रा से पहले विदेश मामलों पर सीनेट की शक्तिशाली कमेटी के अध्यक्ष एवं सीनेटर रॉबर्ट मेंनेंडेज ने अमेरिकी रक्षा मंत्री को एक पत्र लिख कर उनसे भारतीय नेताओं के समक्ष एस-400 मिसाइल रक्षा प्रणाली की खरीद का मुद्दा भी उठाने का अनुरोध किया था। भारत इसे रूस से खरीद रहा है और इसके लिए अक्टूबर 2018 में रूस के साथ पांच अरब डॉलर का एक सौदा किया था।

भारत ट्रंप प्रशासन की चेतावनी की अनदेखी करते हुए इस सौदे पर आगे बढ़ा था। तत्कालीन अमेरिकी प्रशासन ने चेतावनी दी थी कि इस पर आगे बढ़ने पर उसे अमेरिकी प्रतिबंधों का सामना करना पड़ सकता है।

अमेरिका ने एस-400 मिसाइल रूस से खरीदने को लेकर हाल ही में तुर्की पर प्रतिबंध लगाये हैं।

चीन की बढ़ती सैन्य आक्रामकता के मद्देनजर हिंद-प्रशांत क्षेत्र में उभरती स्थिति अमेरिका-भारत के बीच वार्ता का एक मुख्य विषय बन गयी है। चीन की बढ़ती आक्रामकता को रोकने के लिए अमेरिका क्वाड को एक सुरक्षा ढांचा बनाने का समर्थन कर रहा है।

अमेरिकी रक्षा मंत्री का यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है, जब भारत और चीन पूर्वी लद्दाख में टकराव वाले सभी स्थानों से सैनिकों को पीछे हटाने के लक्ष्य को हासिल करने पर गौर कर रहे हैं। दोनों देशों ने पैंगोंग झील के उत्तरी और दक्षिणी तटों से लगे इलाकों से अपने सैनिकों को हटाने का कार्य पूरा कर लिया है।

ऑस्टिन और सिंह ने 27 जनवरी को टेलीफोन पर वार्ता की थी।

भारत-अमेरिका रक्षा संबंधों ने पिछले कुछ वर्षों में नये मुकाम हासिल किये हैं।

अमेरिकी रक्षा मंत्री ने भारत पहुंचने से पहले जापान और दक्षिण कोरिया का दौरा किया।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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