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न्यायालय में अभी भी नहीं हो रही है हाइब्रिड सुनवाई, बार एसोसिएशन ने प्रक्रिया को ‘मजाक’ बताया

By भाषा | Updated: March 21, 2021 23:01 IST

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नयी दिल्ली, 21 मार्च उच्चतम न्यायालय में 15 मार्च से शुरू हुई हाइब्रिड सुनवाई प्रक्रिया में अभी तक किसी अधिवक्ता ने हिस्सा नहीं लिया है और कोई भी सुनवाई के लिए शीर्ष अदालत में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित नहीं हो रहा है। सूत्रों ने इस आशय की जानकारी दी।

अधिवक्ताओं द्वारा सामान्य सुनवाई प्रक्रिया अपनाए जाने की मांग के बीच शीर्ष अदालत ने पांच मार्च को हाइब्रिड सुनवाई (ऑनलाइन और सामान्य उपस्थिति वाली) के संबंध में मानक संचालन प्रक्रिया जारी किया।

सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष विकास सिंह ने कहा कि हाइब्रिड सुनवाई ‘‘एक मजाक’’ है और न्यायालय जब अपना पूरा कामकाज शुरू कर देगा तो अधिवक्ता भी व्यक्ति रूप से सुनवाई में उपस्थित होने लगेंगे।

गौरतलब है कि कोविड-19 के कारण शीर्ष अदालत मार्च 2020 से ही तमाम मामलों की सुनवाई वीडियो कांफ्रेंस के जरिए कर रही है। कई बार एसोसिएशन और वकीलों ने तुरंत पुराने तरीके से सुनवाई शुरू करने की मांग की है।

न्यायालय ने अपने एसओपी में कहा था कि हाइब्रिड सुनवाई 15 मार्च से शुरू होगी और यह प्रत्येक मंगलवार, बुधवार और बृहस्पतिवार को होगी। सोमवार को शुक्रवार को ऐसा नहीं होगा क्योंकि इन दोनों दिन विभिन्न मुद्दों पर सुनवाई होती है।

सूत्रों ने बताया कि हाइब्रिड सुनवाई के लिए न्यायालय ने अदालत कक्षों में पूरा इंतजाम किया है जिसमें न्यायाधीश की कुर्सी और वकीलों की जगह के बीच विभाजक लगाना, कैमरों की व्यवस्था ताकि अधिवक्त सामान्य रूप से या ऑनलाइन सुनवाई में शामिल हो सकें, आदि शामिल है।

सूत्रों ने बताया कि तमाम सुविधाओं के बावजूद अभी तक कोई वकील व्यक्तिगत रूप से सुनवाई के लिए उपस्थित नहीं हुआ है।

इस मामले की जानकारी रखने वाले शीर्ष अदालत के एक अधिकारी ने बताया, ‘‘हाइब्रिड सुनवाई के लिए सभी व्यवस्था के बावजूद एक भी अधिवक्ता न्यायालय में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित नहीं हुआ है।’’

वहीं दूसरी ओर सिंह का कहना है, ‘‘उन्होंने (न्यायालय) 200 मामले ऑनलाइन और 20 मामले हाइब्रिड सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किए हैं। ज्यादातर मामलों में वकील वही लोग हैं। ऐसे में वे दोनों तरीके की सुनवाई में कैसे हिस्सा लेंगे। यह सिर्फ एक मजाक है। जबतक पूरी तरह से सामान्य सुनवाई शुरू नहीं हो जाती, कोई अधिवक्ता हाइब्रिड मोड में पेश नहीं होगा।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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