बिहार सरकार ने अपने खजाने पर लगाया ताला, वेतन, पेंशन के अलावा सभी वित्तीय लेन देन पर रोक

By एस पी सिन्हा | Updated: February 28, 2026 16:34 IST2026-02-28T16:34:38+5:302026-02-28T16:34:43+5:30

इस अवधि में केवल सरकारी मुलाजिमों का वेतन, पेंशन, सहायक अनुदान-वेतन और संविदा कर्मियों का मानदेय ही अदा किया जाएगा। बाकी तमाम बिलों पर फिलहाल रोक लगा दी गई है।

The Bihar government has locked its treasury, prohibiting all financial transactions other than salaries, pensions, and grants-in-aid | बिहार सरकार ने अपने खजाने पर लगाया ताला, वेतन, पेंशन के अलावा सभी वित्तीय लेन देन पर रोक

बिहार सरकार ने अपने खजाने पर लगाया ताला, वेतन, पेंशन के अलावा सभी वित्तीय लेन देन पर रोक

पटना: बिहार में नीतीश सरकार ने एक कड़ा फैसला लेते हुए वित्तीय अनुशासन को बरकरार रखने के लिए सरकार ने 10 मार्च तक कोषागारों से सिर्फ स्थापना और प्रतिबद्ध व्यय के बिल पास करने का हुक्म जारी किया है। इस अवधि में केवल सरकारी मुलाजिमों का वेतन, पेंशन, सहायक अनुदान-वेतन और संविदा कर्मियों का मानदेय ही अदा किया जाएगा। बाकी तमाम बिलों पर फिलहाल रोक लगा दी गई है।

वित्त विभाग के विशेष सचिव मुकेश कुमार लाल द्वारा पत्र जारी की गई है। इस संबंध में सभी अपर मुख्य सचिव, प्रधान सचिव, सचिव, प्रमंडलीय आयुक्त, जिला पदाधिकारी और कोषागार पदाधिकारियों को निर्देश जारी किया गया है। सरकार का कहना है कि वित्तीय वर्ष 2025-26 के आखिरी महीने में ट्रेजरी पर बिलों की बाढ़ आ जाती है। आकस्मिक बिल, योजनाओं से जुड़े भुगतान और पुराने दावों के बकाये सब एक साथ पेश किए जाते हैं, जिससे जांच-परख में दिक्कत और सॉफ्टवेयर सिस्टम पर दबाव बढ़ जाता है। हुकूमत का तर्क है कि यह कदम फिजूलखर्ची पर लगाम कसने और बजटीय संतुलन कायम रखने के लिए जरूरी है। 

बिहार ट्रेज़री कोड 2011 के प्रावधानों का हवाला देते हुए कहा गया है कि बजट की राशि लैप्स होने से बचाने के लिए अनावश्यक निकासी नहीं की जानी चाहिए। कोषागार से उतनी ही रकम निकले, जितनी फौरी तौर पर जरूरी हो। हालांकि, इस फैसले ने ठेकेदारों और दैनिक कामगारों में मायूसी भी पैदा कर दी है। मार्च में होली का त्योहार भी है और कई लोग भुगतान की उम्मीद लगाए बैठे थे। लेकिन अब 10 मार्च के बाद ही बाकी बिलों की नियमानुसार जांच होगी और फिर भुगतान की कार्रवाई शुरू की जाएगी। सियासी हलकों में इसे वित्तीय सख्ती और ‘प्रशासनिक अनुशासन’ का संदेश माना जा रहा है। सरकार साफ कर चुकी है खजाना जनता का है, और उसका इस्तेमाल तय कवायद और उसूलों के तहत ही होगा।

Web Title: The Bihar government has locked its treasury, prohibiting all financial transactions other than salaries, pensions, and grants-in-aid

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