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पित्रोदा ने कहा, राज्यों की भूमिका पर केंद्र के नियंत्रण करने का बहाना नहीं हो सकता कोरोना संकट

By भाषा | Updated: May 21, 2020 15:24 IST

इंडियन ओवरसीज कांग्रेस के प्रमुख सैम पित्रोदा कहा कि कि कोविड-19 का संकट राज्यों की भूमिका पर केंद्र के नियंत्रण करने का बहाना नहीं हो सकता। पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की पुण्यतिथि पर एक लेख में उन्होंने कोरोना संकट से निपटने के संदर्भ में सरकार को कई सुझाव दिए।

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ठळक मुद्देसैम पित्रोदा ने कहा राज्यों की भूमिका पर केंद्र के नियंत्रण करने का बहाना नहीं हो सकता कोरोना संकटएक लाख करोड़ रुपये से कम के निवेश में ही भारत के स्वास्थ्य ढांचे का कायाकल्प किया जा सकता है जिससे मौजूदा संकट एक अवसर में बदल जाएगा।

नई दिल्ली: इंडियन ओवरसीज कांग्रेस के प्रमुख सैम पित्रोदा ने कोरोना वायरस का भारत में सामुदायिक स्तर पर संक्रमण नहीं होने के सरकार के दावे को गुमराह करने वाला करार देते हुए बृहस्पतिवार को कहा कि कोविड-19 का संकट राज्यों की भूमिका पर केंद्र के नियंत्रण करने का बहाना नहीं हो सकता। पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की पुण्यतिथि पर एक लेख में उन्होंने कोरोना संकट से निपटने के संदर्भ में सरकार को कई सुझाव दिए और यह भी कहा कि एक लाख करोड़ रुपये से कम के निवेश में ही भारत के स्वास्थ्य ढांचे का कायाकल्प किया जा सकता है जिससे मौजूदा संकट एक अवसर में बदल जाएगा।

राजीव गांधी के प्रधानमंत्री रहने के दौरान पित्रोदा उनके सलाहकार की भूमिका में थे और भारत की दूरसंचार क्रांति में उनका बड़ा योगदान माना जाता है। कोरोना संकट का हवाला देते हुए पित्रोदा ने कहा, ‘‘ देश में कोरोना के 112000 से अधिक मामले आ चुके हैं और करीब 3500 लोगों की मौत चुकी है। ऐसे में यह नहीं माना जा सकता कि यह वायरस समुदाय में नहीं फैल रहा है।’’ उन्होंने आरोप लगाया, ‘‘सरकार लगातार इस पर बात पर जोर दे रही है कि सामुदायिक स्तर पर संक्रमण नहीं हुआ है।

उसकी यह बात गुमराह करने वाली और लोगों को फर्जी उम्मीद देने वाली है।’’ उन्होंने सवाल किया कि जब मामले लगातार बढ़ेंगे तो लोग सरकार पर कैसे भरोसा करेंगे? पित्रोदा के मुताबिक मौजूदा समय में जांच में तेजी उपयोगी है, लेकिन यह तेजी बहुत देर से आई है। हमने सिर्फ बाहर से आने वालों और उनके संपर्क में आए लोगों की जांच पर पूरा ध्यान केंद्रित करके अपना संसाधान जाया किया है उन्होंने कहा कि बड़े पैमाने पर जांच होनी चाहिए और बीमारी से ग्रसित और बुजुर्ग लोगों का विशेष ध्यान रखा जाए।

पित्रोदा ने कहा, ‘‘अगर हम आठ हफ्तों के लॉकडाउन के बाद भी खुद को तैयार नहीं कर पाए तो फिर आगे भी हम तैयार नहीं रह पाएंगे। सरकार को बताना चाहिए कि इन आठ हफ्तों में उसने तैयारी के संदर्भ में क्या किया जिससे मामले बढ़ने पर लोगों की मदद हो सके?’’ उन्होंने कहा, ‘‘ राज्यों को यह तय करने का अधिकार दिया जाए कि किस जिले में क्या कदम उठाने की जरूरत है। राज्यों को केंद्र सरकार मेडिकल उपकरणों और जरूरती वस्तुओं की आपूर्ति सुनिश्चित करे। कोविड-19 केंद्र सरकार के लिए यह बहाना नहीं हो सकता कि वह राज्यों की भूमिका पर नियंत्रण कर ले।’’ उन्होंने कहा कि कोरोना महामारी से निपटने में ज्यादा से ज्यादा विज्ञान के उपयोग पर जोर दिया जाए।

पित्रोदा ने कहा, ‘‘कुछ तैयारियां करने के लिए लॉकडाउन लगाना सार्थक था, लेकिन यह स्थायी समाधान नहीं हो सकता। हमें इस लॉकडाउन से बाहर आने के लिए समयबद्ध योजना तैयार करनी होगी।’’ उन्होंने कहा कि सरकार को गरीबों और रोजगार खोने वाले करोड़ों लोगों को राशन और वित्तीय सहयोग प्रदान करना चाहिए। पित्रोदा के अनुसार प्राथमिकता के आधार पर आर्थिक गतिविधियां शुरू की जाएं और अगले कुछ महीनों के लिए बड़े धार्मिक, सामाजिक और सांस्कृतिक आयोजनों पर रोक लगी रहे। सभी दफ्तरों, कारोबारों और बाजारों को खुलने की अनुमति दी जाए।

उन्होंने कहा, ‘‘अगर हम सार्वजनिक स्वास्थ्य ढांचे के लिए निवेश करते हैं तो यह संकट एक अवसर के रूप में बदल सकता है। विश्व स्तरीय स्वास्थ्य व्यवस्था बनाने में एक लाख करोड़ रुपये से कम खर्च होंगे और आने वाले कई वर्षों तक लोगों की सेवा हो सकेगी। हमें अपने भविष्य को सुरक्षित बनाने के लिए यह निवेश करना होगा। उनके मुताबिक विशेषज्ञों का कहना है कि इस वायरस के साथ लोगों को अभी 18 महीने और रहना पड़ सकता है। ऐसे में सरकार को साप्ताहिक दिशानिर्देश के बजाय दो साल के लिए योजना सामने रखनी चाहिए। 

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