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सीमा मुद्दे पर ठाकरे के बयान को कर्नाटक के मंत्री ने किया खारिज,कोविड की रोकथाम पर ध्यान देने की सलाह दी

By भाषा | Updated: January 17, 2021 23:37 IST

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बेंगलुरु, 17 जनवरी कर्नाटक के मंत्री एस सुरेश कुमार ने सीमा मुद्दे पर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे की टिप्पणी को रविवार को राजनीतिक रूप से हावी होने की कोशिश करार दिया। उन्होंने इसके साथ ही ठाकरे को कोविड-19 की रोकथाम करने और विकास कार्यों पर ध्यान देने की सलाह दी।

कर्नाटक के प्राथमिक एवं माध्यमिक शिक्षा मंत्री ने कहा कि सीमा मुद्दे का हल हो चुका है।

उन्होंने कहा, ‘‘महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री को कोविड की रोकथाम और विकास कार्यों तथा अन्य चीजों पर ध्यान देना चाहिए। जिन चीजों का समाधान हो चुका है उन मुद्दों को फिर से उन्हें उठाने की जरूरत नहीं है।’’

मंत्री ने कहा, ‘‘लोग अब सुधार और विकास चाहते हैं।’’

उन्होंने कहा कि सीमा मुद्दा सिर्फ राजनीतिक रूप से हावी होने की कोशिश है।

इससे पहले, आज दिन में ठाकरे ने कहा कि उनकी सरकार कर्नाटक के उन इलाकों को राज्य में शामिल करने के लिए प्रतिबद्ध हैं ,जहां मराठी भाषी लोग ज्यादा संख्या में हैं।

मुख्यमंत्री कार्यालय ने एक ट्वीट में कहा कि इस उद्देश्य के लिए बलिदान देने वालों को यह ‘‘सच्ची श्रद्धांजलि’’ होगी।

महाराष्ट्र राज्य भाषायी आधार पर कर्नाटक के बेलगाम तथा अन्य इलाकों पर दावा जताता है, जो पूर्ववर्ती बॉम्बे प्रेसिडेंसी का हिस्सा थे लेकिन अब कर्नाटक राज्य में आते हैं।

बेलगाम तथा कुछ अन्य सीमावर्ती इलाकों को महाराष्ट्र में शामिल कराने के लिए संघर्ष कर रहे क्षेत्रीय संगठन महाराष्ट्र एकीकरण समिति ने उन लोगों की याद में 17 जनवरी को ‘‘शहीदी दिवस’’ मनाया, जो इस उद्देश्य के लिए लड़ते हुए 1956 में मारे गए थे।

महाराष्ट्र मुख्यमंत्री कार्यालय ने ट्वीट किया , ‘‘सीमा विवाद में शहीद होने वाले लोगों के लिए सच्ची श्रद्धांजलि होगी कर्नाटक के कब्जे वाले मराठी भाषी तथा सांस्कृतिक इलाकों को महाराष्ट्र में शामिल करना। हम इसके लिए एकजुट हैं और हमारी प्रतिज्ञा दृढ़ है। शहीदों के प्रति सम्मान जताते हुए यह वादा करते हैं।’’

कर्नाटक के बेलगाम, कारवार और निप्पनी इलाकों पर महाराष्ट्र यह कहकर दावा जताता है कि इन इलाकों में बहुसंख्यक आबादी मराठी भाषी है।

बेलगाम समेत अन्य सीमावर्ती इलाकों को लेकर दोनों राज्यों के बीच जारी विवाद कई वर्षों से उच्चतम न्यायालय में लंबित है।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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