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वर्तमान चुनौतियों से निपटने के लिए प्रेरणा उपलब्ध करा सकते हैं तक्षशिला और नालंदा विवि : राष्ट्रपति

By भाषा | Updated: November 18, 2020 19:42 IST

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नयी दिल्ली, 18 नवंबर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने बुधवार को कहा कि वर्तमान चुनौतियों से निपटने के लिए कोई भी प्राचीन तक्षशिला, नालंदा और वल्लभी विश्वविद्यालयों से प्रेरणा ले सकता है जिन्होंने शिक्षण और अनुसंधान के उच्च मानक निर्धारित किए।

जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय के वार्षिक दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि आज के भारतीय विद्वानों को ज्ञान की वास्तविक इकाई बनाने के प्रयास करने चाहिए जो समकालीन वैश्विक चुनौतियों से निपटने में उपयोगी हो।

कोविंद ने दीक्षांत समारोह में कहा, ‘‘आज की चुनौतियों से निपटने के लिए हम तक्षशिला, नालंदा, विक्रमशिला और वल्लभी विश्वविद्यालयों से प्रेरणा ले सकते हैं जिन्होंने शिक्षण और अनुसंधान के उच्च मानक निर्धारित किए। पूरे विश्व से विद्वान और छात्र विशिष्ट ज्ञान अर्जित करने उन केंद्रों में आते थे। ’’

उन्होंने कहा कि आधुनिकता के अनेक तत्व रखनेवाली उस प्राचीन प्रणाली ने चरक, आर्यभट्ट, चाणक्य, पाणिनी, पतंजलि, गार्गी, मैत्रेयी और तिरुवल्लूवर जैसे अनेक विद्वान पैदा किए। उन्होंने चिकित्सा विज्ञान, गणित, खगोल विज्ञान, व्याकरण और सामाजिक विकास में अमूल्य योगदान दिया।

कोविंद ने कहा, ‘‘आज के भारतीय विद्वानों को इस तरह के मूल ज्ञान का सृजन करने की कोशिश करनी चाहिए जिसका इस्तेमाल समकालीन वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए किया जाए। जेएनयू उच्च शिक्षा के उन चुनिंदा संस्थानों में से है जो वैश्विक रूप से तुलनीय उत्कृष्टता तक पहुंच सकते हैं।’’

राष्ट्रपति ने कोविड-19 महामारी की चर्चा करते कहा कि आज दुनिया इस महामारी के कारण संकट की स्थिति में है। कोविंद ने कहा, ‘‘महामारी के वर्तमान परिदृश्य में, राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 बताती है कि उच्च शिक्षा संस्थानों के लिए संक्रामक रोगों, महामारी विज्ञान, विषाणु विज्ञान, जांच-निदान, इंस्ट्रूमेंटेशन, टीका विज्ञान और अन्य प्रासंगिक क्षेत्रों में अनुसंधान करने का बीड़ा उठाना महत्वपूर्ण है। संबंधित सामाजिक मुद्दों का भी अध्ययन करने की जरूरत है, विशेषकर बहु-विषयक दृष्टिकोण के साथ ऐसा करना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस कोशिश में जेएनयू जैसे विश्वविद्यालयों को विशिष्ट सहायता तंत्र विकसित करने और छात्र समुदायों के बीच नवाचार को बढ़ावा देने के लिए सबसे आगे होना चाहिए।

उन्होंने कहा कि पूरा विश्व कोविड-19 महामारी की वजह से संकट की स्थिति में है।

कोविंद ने कहा, ‘‘महामारी के वर्तमान परिदृश्य में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 कहती है कि उच्च शिक्षण संस्थानों के लिए महत्वपूर्ण है कि वे संक्रामक रोगों, महामारी विज्ञान, विषाणु विज्ञान, निदान, टीका विज्ञान और अन्य संबंधित क्षेत्रों में अनुसंधान में अग्रणी रहें।’’

उन्होंने कहा कि संबंधित सामाजिक मुद्दों का भी अध्ययन किए जाने की आवश्यकता है, विशेषकर बहु-अनुशासनात्मक दृष्टिकोण के साथ। इस कवायद में जेएनयू जैसे विश्वविद्यालयों को अग्रिम मोर्चे पर होना चाहिए।

राष्ट्रपति ने कहा कि जेएनयू में भारतीय संस्कृति के सभी आयाम दिखाई देते हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘परिसर में इमारतों, हॉस्टलों, सड़कों और प्रतिष्ठानों के नाम भारतीय विरासत से लिए गए हैं। यह भारत की सांस्कृतिक और भौगोलिक तस्वीर पेश करता है। यह भारतीयता जेएनयू की है। यह भारतीयता जेएनयू की विरासत है और इसे मजबूत करना इसका कर्तव्य है।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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