लाइव न्यूज़ :

‘तमिल थाई वाज्थु’ प्रार्थना गीत है, राष्ट्रीय गान नहीं: अदालत

By भाषा | Updated: December 10, 2021 16:52 IST

Open in App

(इंट्रो में सुधार के साथ)

मदुरै, 10 दिसंबर मद्रास उच्च न्यायालय ने कहा कि ‘तमिल थाई वाज्थु’ कोई राष्ट्रगान नहीं, बल्कि केवल एक प्रार्थना गीत है और इसलिए, इस स्तुति को सुनते समय हरेक व्यक्ति को खड़ा रहने की आवश्यकता नहीं है।

न्यायमूर्ति जी आर स्वामीनाथन की एकल पीठ ने 2018 में रामनाथपुरम जिले में रामेश्वरम पुलिस द्वारा ‘नाम तमिलर काची’ (एनटीके) के पदाधिकारियों के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी खारिज करते हुए हाल ही में यह फैसला सुनाया।

तमिलनाडु के तत्कालीन राज्यपाल बनवारीलाल पुरोहित ने 24 जनवरी, 2018 को कांची कामकोटि पीठम के शंकराचार्य श्री विजयेंद्र सरस्वती की उपस्थिति में संगीत अकादमी, चेन्नई में आयोजित एक समारोह के दौरान तमिल-संस्कृत शब्दकोश का विमोचन किया था। उस समय ‘तमिल थाई वाज्थु’ बजाया गया, लेकिन उस समय शंकराचार्य बैठे रहे, जिसे लेकर लोगों ने काफी अप्रसन्नता व्यक्त की थी और इसके बाद एक बहस छिड़ गई थी।

टीएनके के मौजूदा सदस्य और उस समय ‘तमिलर देसिया मुन्नानी’ का हिस्सा रहे कान इलांगो और उनके सार्थियों ने रामेश्वर स्थित कांची मठ की शाखा में घुसकर शंकराचार्य के खिलाफ नारेबाजी की थी और उन्होंने कथित रूप से जूते पहनकर मठ परिसर में प्रवेश किया था। जब मठ प्रबंधक ने इसका विरोध किया, तो उन्हें कथित रूप से आपराधिक धमकी दी गई थी। इसके बाद उनके खिलाफ भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था। इलांगो की मौजूदा आपराधिक मूल याचिका में प्राथमिकी को चुनौती दी गई।

मद्रास उच्च न्यायालय ने याचिका स्वीकार करते हुए कहा कि इस संबंध में कोई वैधानिक या कार्यकारी आदेश नहीं है कि ‘तमिल थाई वाज्थु’ गाए जाते समय वहां उपस्थित लोगों को खड़े होने की आवश्यकता है। अदालत ने कहा कि यह राष्ट्रगान नहीं है, लेकिन इसके प्रति सर्वोच्च सम्मान दिखाया जाना चाहिए। उसने कहा कि यह सच है कि जब भी ‘तमिल थाई वाज्थु’ गाया जाता है तो दर्शक पारंपरिक रूप से खड़े हो जाते हैं, लेकिन सवाल यह है कि क्या यह सम्मान दिखाने का एकमात्र तरीका है।

अदालत ने कहा कि एक संन्यासी मुख्य रूप से धर्मपरायणता का जीवन व्यतीत करता है और जब वह प्रार्थना करता है तो वह हमेशा ध्यान मुद्रा में पाया जाता है। उसने कहा कि चूंकि ‘तमिल थाई वाज्थु’ एक प्रार्थना गीत है, इसलिए एक संन्यासी का ध्यान की मुद्रा में बैठना निश्चित रूप से उचित है। अदालत ने कहा कि इस मामले में, शंकराचार्य अपनी आंखें बंद करके ध्यान मुद्रा में बैठे हुए दिखाई दे रहे हैं और यह तमिल मां के प्रति अपनी श्रद्धा एवं सम्मान व्यक्त करने का उनका अपना तरीका था।

अदालत ने रामेश्वरम पुलिस स्टेशन के समक्ष लंबित मामला भी खारिज कर दिया।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

Open in App

संबंधित खबरें

कारोबाररुपये की तेज छलांग! 2013 के बाद सबसे बड़ा उछाल

क्रिकेटIPL 2026: समीर रिज़वी और रवि बिश्नोई शीर्ष पर, मौजूदा ऑरेंज और पर्पल कैप लीडर्स की सूची देखें

कारोबारGold Rate Today: 6 अप्रैल 2026 को सोना हुआ सस्ता, 24 कैरेट सोने की कीमत ₹ 1,51,765 प्रति 10 ग्राम

ज़रा हटकेचाचा जी, मुझे बचा लो?, 4 साल की लड़की को जंजीर से बांधकर पूर्व सैनिक ने पीटा

क्रिकेट3 मैच में 6-7 और 9 रन?, आरआर से सीएसके में लौटे सैमसन का बल्ला नहीं चला, कोच स्टीफन फ्लेमिंग ने कहा- माहौल में ढल रहे और जल्द रन बरसाएंगे?

भारत अधिक खबरें

भारतरामअवतार जग्गी हत्याः अमित जोगी को आजीवन कारावास की सजा

भारतबीजेपी 47वां स्थापना दिवस समारोहः करोड़ों कार्यकर्ता को बधाई, हम पार्टी को अपनी मां मानते हैं?, पीएम मोदी ने एक्स पर लिखा-भावुक पोस्ट, वीडियो

भारतBaramati Bypoll 2026: कौन हैं आकाश मोरे? बारामती उपचुनाव में महाराष्ट्र की उप मुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार से टक्कर?

भारतअसम की जनता ने इस बार दो काम पक्के किए?, पीएम मोदी बोले- एनडीए की हैट्रिक और कांग्रेस के शाही परिवार के नामदार की हार की सेंचुरी का रिकॉर्ड?

भारतपाकिस्तानी सोशल मीडिया की झूठी जानकारी का इस्तेमाल कर पत्नी पर आरोप, सीएम सरमा ने कहा-फर्जी डॉक्यूमेंट्स के साथ जनता के सामने बात?