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भारत, नेपाल पुलिस और पुरोहितों के बीच हुई बातचीत : नदियों में शव न बहाने की अपील

By भाषा | Updated: May 23, 2021 17:16 IST

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बहराइच (उप्र), 23 मई उत्तर प्रदेश और बिहार में गंगा तथा अन्य नदियों में बड़ी संख्या में शव पाए जाने के बाद नेपाल सीमा से सटी नदियों में इस तरह की चीजों को रोकने के लिए बहराइच पुलिस, नेपाली सशस्त्र पुलिस और दोनों देशों के गांवों में कर्मकांड कराने वाले पुरोहितों के बीच बातचीत हुई है।

नेपाल सीमा से सटे बहराइच के सुजौली थाने के प्रभारी ओ.पी. चौहान ने रविवार को बताया कि प्रदेश के बलिया, उन्नाव तथा गाजीपुर जिलों में बहने वाली नदियों में बड़ी संख्या में शव मिलने के बाद इस संबंध में सीमावर्ती क्षेत्र कोठियाघाट पर दोनों देशों के सीमावर्ती गांवों में कर्मकांड कराने वाले पुरोहितों के साथ शुक्रवार को पुलिस और सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) की अनौपचारिक वार्ता आयोजित की गयी।

उन्होंने बताया कि वार्ता के दौरान मौजूद नेपाली सशस्त्र पुलिस, नेपाली खुफिया पुलिस और पुरोहितों से अपेक्षा की गयी कि वे नेपाली गांवों में भी इस बात को लेकर जागरूकता पैदा करें कि वहां मृतकों के शव नदी में प्रवाहित न कर शवों का दाह संस्कार किया जाए।

बहराइच के जिलाधिकारी शंभू कुमार ने भी शनिवार को अपने ट्विटर हैंडल से ट्वीट कर लोगों से शवों को नदी में प्रवाहित न करने को कहा।

चौहान ने बताया कि नदी के उस पार नेपाली गांवों में बसी हिन्दू आबादी के कुछ परिजनों की मृत्यु पर शवों के दाह संस्कार की बजाय उन्हें गेरुआ नदी में प्रवाहित करने की खबरें थीं। हालांकि इसकी पुष्टि नहीं हो सकी है।

उल्लेखनीय है कि बहराइच जिले में नेपाल सीमा से सटे सुजौली थाना क्षेत्र में बहने वाली गेरुआ और कौड़ियाला नदियों के इस तरफ भारतीय जंगल व गांव हैं तो नदी के दूसरे किनारे से थोड़ी ही दूरी पर पड़ोसी राष्ट्र के जंगल और गांव हैं।

चौहान ने बताया कि उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक ने विभिन्न जिलों के पुलिस अधिकारियों को नदी के किनारे बसे गांवों का दौरा करने और वहां रह रहे नागरिकों को अपने परिजनों के शव नदी में प्रवाहित न करने के लिए प्रेरित करने के निर्देश दिए थे।

उन्होंने बताया कि इसी क्रम में पुलिस और एसएसबी के अधिकारियों ने शुक्रवार और शनिवार को नेपाल सीमा पर नदी किनारे बसे भारतीय क्षेत्र के गांव भरथापुर, तेलागौढ़ी और रेतियागौढ़ी आदि गांवों तथा गिरजापुरी बैराज से सटे कुछ गांवों का दौरा कर वहां के ग्रामीणों से शवों को नदियों में बहाने की बजाय उनका विधि विधान से दाह संस्कार करने को कहा।

भारतीय क्षेत्र के ग्रामीणों को यह भी बताया गया कि आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों में कोरोना वायरस से हुई मौत पर मृतकों के अंतिम संस्कार के लिए प्रदेश सरकार पांच हजार रुपये दे रही है।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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