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जानिए यूपी भाजपा अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह के बारे में, संगठन के माहिर खिलाड़ी, पत्रकारिता भी की

By सतीश कुमार सिंह | Updated: July 16, 2019 17:49 IST

वह इस समय योगी सरकार में स्वतंत्र प्रभार के परिवहन राज्य मंत्री हैं। वह पिछड़ी जाति से हैं। बता दें कि स्वतंत्र देव सिंह के पास लंबा राजनीतिक अनुभव है। लोकसभा चुनाव के दौरान स्वतंत्र देव सिंह मध्य प्रदेश के प्रभारी थे। 

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ठळक मुद्देहाल के सालों में केशव प्रसाद मौर्य के बाद वह पिछड़ी जाति के दूसरे प्रदेश अध्यक्ष हैं।महेन्द्र नाथ पांडे के केन्द्रीय मंत्री बन जाने के बाद से ही नए प्रदेश अध्यक्ष की खोज हो रही थी। 

भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने मंगलवार को पार्टी के वरिष्ठ नेता स्वतंत्र देव सिंह को उत्तर प्रदेश पार्टी इकाई का अध्यक्ष नियुक्त किया। वह पद पर महेन्द्र नाथ पांडे का स्थान लेंगे।

वह इस समय योगी सरकार में स्वतंत्र प्रभार के परिवहन राज्य मंत्री हैं। वह पिछड़ी जाति से हैं। बता दें कि स्वतंत्र देव सिंह के पास लंबा राजनीतिक अनुभव है। लोकसभा चुनाव के दौरान स्वतंत्र देव सिंह मध्य प्रदेश के प्रभारी थे। 

उनकी देखरेख में बीजेपी ने मध्य प्रदेश में अच्छा प्रदर्शन किया और बीजेपी ने 29 में से 28 सीटें जीती। उनकी छवि संगठन में एक मज़बूत नेता की रही है। हाल में हुए लोकसभा चुनाव में स्वतंत्र देव सिंह को मध्य प्रदेश का प्रभारी बनाया गया था, जहां छिंदवाड़ा को छोड़ कर पार्टी सभी सीटें जीतने में कामयाब रही।

हाल के सालों में केशव प्रसाद मौर्य के बाद वह पिछड़ी जाति के दूसरे प्रदेश अध्यक्ष हैं। महेन्द्र नाथ पांडे के केन्द्रीय मंत्री बन जाने के बाद से ही नए प्रदेश अध्यक्ष की खोज हो रही थी। स्वतंत्र देव सिंह इससे पहले भी दो बार यूपी अध्यक्ष बनते बनते रह गए थे। 

2014 के लोकसभा चुनाव में भा स्वतंत्र देव सिंह का अहम रोल रहा था। यूपी में नरेन्द्र मोदी का चुनावी रैलियां आयोजित करने की ज़िम्मेदारी भी उन्हें ही दी गई थी, ये काम उन्होंने बख़ूबी किया, जहां भी रैली होती थी, वे हफ़्ते भर पहले वहीं पहुंच जाया करते थे। उन दिनों वे प्रदेश बीजेपी के महामंत्री हुआ करते थे।

 2004 में बुंदेलखंड से विधान परिषद का चुनाव जीत कर एमएलसी बने

 2004 में ही वे बुंदेलखंड से विधान परिषद का चुनाव जीत कर एमएलसी बने। तब वे पहली बार बीजेपी के प्रदेश महामंत्री बनाए गए। 2010 में उन्हें यूपी बीजेपी का उपाध्यक्ष बनाया गया था। 2017 के विधानसभा चुनाव में बुंदेलखंड की सभी सीटें बीजेपी जीत गई। 

इसका श्रेय स्वतंत्र देव को भी मिला, इसीलिए सरकार बनने पर वे मंत्री बने। पटेल बिरादरी के स्वतंत्र देव सिंह ने राजनीति की शुरुआत छात्र संघ चुनाव से की थी। उन्होंने जालौन के डीवीसी कॉलेज से छात्र संघ अध्यक्ष का चुनाव लड़ा, लेकिन वे हार गए। उसके बाद 1986 में वे आरएसएस से जुड़ गए।

स्वतंत्र देव सिंह का जन्म 13 फ़रवरी 1964 को यूपी के मिर्ज़ापुर जिले में हुआ था। इनकी मां का नाम रामा देवी और पिता का नाम अल्लर सिंह था। स्वतंत्र देव की शादी झांसी में हुई। उनकी कोई राजनीतिक पृष्ठभूमि नहीं रही। वह ग़रीब परिवार से थे। उनके बड़े भाई की पुलिस में नौकरी लग गई, जिनकी तैनाती जालौन में हुई, तो स्वतंत्र देव सिंह का परिवार मिर्ज़ापुर से जालौन पहुंच गया।

स्वतंत्र देव सिंह ओबीसी समुदाय से आते हैं और संघ के आंगन में पले बढ़े हैं। हालांकि एक दौर में स्वतंत्र देव सिंह पत्रकारिता करते थे। दिलचस्प बात यह है कि स्वतंत्र देव सिंह का नाम पहले कांग्रेस सिंह था लेकिन बाद में संघ के संपर्क में आने पर उनका नाम स्वतंत्र देव सिंह रख दिया गया। यह नाम स्वतंत्र भारत अखबार से ही प्रेरित था, जिसमें 'कांग्रेस सिंह' काम करते थे. इस तरह लोग आज के दौर में उन्हें स्वतंत्र देव सिंह के नाम से जानने लगे हैं।

छात्र राजनीति के बीच वह 1989-90 में 'स्वतंत्र भारत' अखबार से जुड़े

स्वतंत्र देव सिंह कभी पत्रकारिता किया करते थे। छात्र राजनीति के बीच वह 1989-90 में 'स्वतंत्र भारत' अखबार से जुड़े। उरई में वह इसके रिपोर्टर रह चुके हैं। छात्र जीवन में ही राजनीति से जुड़े लेकिन कभी भी करिश्माई सफलता नहीं मिली। उन्होंने 1986 में उरई के डीएवी डिग्री कॉलेज में छात्र संघ चुनाव लड़ा, लेकिन जीत नहीं सके। इसके बाद 2012 में विधानसभा चुनाव में किस्मत आजमाई और वहां भी करारी हार का सामना करना पड़ा।

स्वतंत्र देव सिंह पीएम नरेंद्र मोदी के करीबी हैं

स्वतंत्र देव सिंह पीएम नरेंद्र मोदी के करीबी हैं। उन्होंने बीजेपी में कार्यकर्ता से लेकर संगठनकर्ता तक का सफर तय किया है. संघ में रहे स्वतंत्र देव सिंह की छवि काफी ईमानदार है। इतने सालों से राजनीति में रहे स्वतंत्र देव के पास संपत्ति के नाम पर कुछ खास नहीं है।

स्वतंत्र देव सिंह का सियासी सफर

1986- आरएसएस प्रचारक बने।

1988-89-अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद में संगठन मंत्री।

1991- भाजपा कानपुर के युवा शाखा के मोर्चा प्रभारी।

1994- बुन्देलखण्ड के युवा मोर्चा के प्रभारी।

1996- युवा मोर्चा के महामंत्री।

1998- फिर से भाजपा युवा मोर्चा के महामंत्री।

2001- भाजपा युवा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष।

2004- विधान परिषद के सदस्य।

2004- प्रदेश महामंत्री बने।

2004 से 2014- तक दो बार प्रदेश महामंत्री।

2010- प्रदेश उपाध्यक्ष बने।

2012- से अभी तक महामंत्री बने हुए।

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