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बीजेपी की इस दिग्गज महिला नेता का दावा, मध्यप्रदेश में चौथी बार सरकार, ये हे कारण

By लोकमत समाचार ब्यूरो | Updated: November 21, 2018 03:16 IST

चर्चा के दौरान पूछे गए एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि एंटी इन्कमबेंसी, जिसे हिंदी में मोहभंग होना कहते हैं, ऐसी कोई भी बात मप्र में नहीं है, क्योंकि उसके पीछे कोई कारण होना चाहिए। जरूरी नहीं है कि 10 या 15 वर्षों तक सरकार रहे तो उससे मोहभंग होगा।

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विधानसभा चुनाव प्रचार के सिलसिले में जबलपुर पहुंची केंद्रीय विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने यहां आयोजित पत्र परिषद में विचार व्यक्त करते हुए कहा कि आसन्न विधानसभा चुनाव भारतीय जनता पार्टी की स्पष्टता और कांग्रेस की दुविधा के बीच का चुनाव है। चर्चा के दौरान उन्होंने भरोसा जताया कि तीन बार से लगातार मप्र में भाजपा की सरकार बन रही है और चौथी बार भी जनता का आशीर्वाद प्राप्त करने में हम पूरी तरह सफल होंगे।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस आज देश की ऐसी पार्टी है, जिसमें ढेरों दुविधाएं हैं, जिसमें प्रमुख रूप से यह दुविधा है कि अन्य पार्टियों से गठबंधन कैसे किया जाए और यदि गठबंधन हो गया तो राहुल गांधी नेता के रूप में कैसे स्वीकार होंगे। यदि इन बातों को छोड़ भी दें तो सबसे बड़ी दुविधा उनके नेता की छवि को लेकर है। कांग्रेस के नेता इस दुविधा में हैं कि राहुल गांधी को किस रूप में प्रोजेक्ट किया जाए।

वर्षों तक कांग्रेस ने राहुल गांधी को एक धर्मनिरपेक्ष नेता के रूप में प्रस्तुत किया, फिर उन्हें लगा कि देश में हिंदू बहुसंख्यक हैं तो उन्होंने उनकी छवि हिंदू नेता के रूप में बनाने पर विचार किया और उन्होंने संसद के पटल पर भी कहा कि मैं हिंदू हूं।

इसके बाद भी बात नहीं बनी तो उन्हें लगा कि आस्थावान हिंदू की छवि बनाना चाहिए तो उन्होंने कैलाश मानसरोवर की यात्र की, शिव मंदिरों में पूजा की और शिवभक्त की छवि बनाई। इन सबके बाद भी उन्हें लगा कि दूसरा वोट बैंक न खिसक जाए तो आरएसएस की आलोचना करने लगे। इतनी सारी दुविधा इतने पुराने संगठन को अपने अध्यक्ष को लेकर है।

उन्होंने आगे कहा कि भाजपा की बात की जाए तो हम पूर्ण रूप से स्पष्ट हैं। केंद्र में हमारे नेता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और प्रदेश में मुख्यमंत्री शिवराज जी हैं। चुनावों में भी यही हमारे प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार हैं। जहां तक जाति और मजहब की बात है तो मोदीजी ने एक ही मंत्र से सब कुछ स्पष्ट कर दिया है और वह है, सबका साथ-सबका विकास।

इस वाक्य के अंदर सब कुछ समाहित है, सबका साथ में सभी जातियां, धर्म, मजहब आ जाते हैं। मोदीजी जब भी बात करते हैं तो 121 करोड़ भारतीयों की बात करते हैं। हमारी पार्टी का नेतृत्व तय है, हमारी नीतियां तय हैं, हमारे कार्यक्रम सामने हैं। यह चुनाव दुविधा बनाम स्पष्टता का है।

चर्चा के दौरान पूछे गए एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि एंटी इन्कमबेंसी, जिसे हिंदी में मोहभंग होना कहते हैं, ऐसी कोई भी बात मप्र में नहीं है, क्योंकि उसके पीछे कोई कारण होना चाहिए। जरूरी नहीं है कि 10 या 15 वर्षों तक सरकार रहे तो उससे मोहभंग होगा। मोहभंग तब होता है, जब नेतृत्व में कमी हो, नीतियां जनविरोधी हों, योजनाएं कार्यरूप में परिणत न हों या सामने प्रभावशाली विकल्प हो तो मोहभंग होता है।

लेकिन यदि इन सभी कसौटियों पर मप्र और केंद्र की सरकार को देखा जाए तो आप पाएंगे कि नेतृत्व यशस्वी है, परिश्रमी है, साथ ही नीतियां जनकल्याणकारी हैं और कार्यक्रम बेहद प्रभावी हैं और रही अंतिम बात कि विपक्ष के पास कोई भी ऐसा नेतृत्व नहीं है, जो प्रभावी हो, क्योंकि मप्र की जनता ने तो जांच-परख कर उन्हें नकारा है। और देश में जो विकल्प है वह कितना प्रभावी है ये सब जानते हैं।

एक प्रश्न के जवाब में विदेश मंत्री ने कहा कि राफेल का मुद्दा कांग्रेस द्वारा झूठ का सहारा लेकर उठाया गया है। कांग्रेस नॉन इश्यू विषय को मुद्दा बना रही है, लेकिन वह मुद्दा बन नहीं पाया, क्योंकि उसमें सच्चाई नहीं है। राफेल को जिस कीमत पर खरीदा गया है, वह यूपीए सरकार के समय तय की गई कीमत से 9 प्रतिशत कम है। पत्र परिषद में भाजपा जिलाध्यक्ष जी।एस। ठाकुर, महापौर डॉ. स्वाति गोडबोले, संभागीय मीडिया प्रभारी रवींद्र पचौरी, जिला मीडिया प्रभारी श्रीकांत साहू, ग्रामीण मीडिया प्रभारी कुमार नीरज उपस्थित थे।

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