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शिविन्दर की जमानत याचिका पर बृहस्पतिवार को सुनवाई करेगा उच्चतम न्यायालय

By भाषा | Updated: November 9, 2021 20:06 IST

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नयी दिल्ली, नौ नवंबर उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को कहा कि वह फोर्टिस हेल्थकेयर के पूर्व प्रवर्तक शिविन्दर मोहन सिंह की जमानत याचिका पर 11 नवंबर को सुनवाई करेगा।

याचिकाकर्ता रेलीगेयर फिनवेस्ट लिमिटेड (आरएफएल) की 2397 करोड़ रुपये की राशि की हेराफेरी के आरोपी हैं।

मुख्य न्यायाधीश एन वी रमना, न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति हिमा कोहली की पीठ ने दिल्ली पुलिस की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता के अनुरोध पर सुनवाई स्थगित कर दी और अगली सुनवाई के लिए गुरुवार की तारीख तय की।

शीर्ष अदालत गत 25 अक्टूबर को इस मामले को फिर से सुनवाई के लिए दिल्ली उच्च न्यायालय में भेजना चाहती थी, लेकिन दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा द्वारा मामले की गंभीरता का उल्लेख करने के बाद इसने खुद ही सुनवाई करने का निर्णय लिया था।

मुख्य न्यायाधीश ने मौखिक टिप्पणी में कहा था, "मैं कोई टिप्पणी नहीं करना चाहता, लेकिन सरकार (पुलिस) बहुत दिलचस्पी ले रही है।"

सिंह की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ लूथरा ने रिकॉर्ड का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि दिल्ली पुलिस ने नौ फरवरी, 2021 को कहा था कि सिंह के संबंध में जांच समाप्त हो गई थी, लेकिन अब वह आगे की जांच के लिए चार महीने और चाहती है।

दिल्ली उच्च न्यायालय ने मई में सिंह की जमानत यह कहते हुए रद्द कर दी थी कि उनके द्वारा रची गई साजिश का पता लगाने और कथित रूप से निकाले गए धन का पता लगाने के लिए उनकी हिरासत आवश्यक थी। दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) ने हाल ही में समय सीमा दी थी और कहा था कि फंड गबन की जांच पूरी करने के लिए उसे चार महीने और लगेंगे।

सिंह ने उच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ शीर्ष अदालत का रुख किया था।

ईओडब्ल्यू ने मार्च 2019 में शिविन्दर, रेलिगेयर एंटरप्राइजेज लिमिटेड (आरईएल) के पूर्व सीएमडी सुनील गोधवानी और आरएफएल के पूर्व सीईओ कवि अरोड़ा और अन्य के खिलाफ आरएफएल के मनप्रीत सूरी की शिकायत के बाद एक प्राथमिकी दर्ज की थी, जिसमें आरोप लगाया गया था कि फर्म का प्रबंधन करते समय उनके द्वारा ऋण लिया गया था, लेकिन पैसा दूसरी कंपनियों में लगाया गया।

अभियोजन पक्ष के अनुसार, आरएफएल के अधिकृत प्रतिनिधि मनप्रीत सूरी ने आरोप लगाया कि इन आरोपियों ने बिना वित्तीय स्थिति वाली संस्थाओं को ऋण देकर आरएफएल को खराब वित्तीय स्थिति में पहुंचा दिया और ऋण चुकाने में जानबूझकर गलती की, जिससे उसे 2,397 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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