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सबरीमाला मंदिर पर SC के फैसले को पुजारी ने बताया निराशाजनक, मेनका गांधी से लेकर महिला आयोग ने ऐसे दिया जवाब

By लोकमत समाचार हिंदी ब्यूरो | Updated: September 28, 2018 17:53 IST

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को अपने फैसले में केरल के सबरीमाला स्थित अय्यप्पा स्वामी मंदिर में सभी आयु वर्ग की महिलाओं को प्रवेश की अनुमति दे दी।

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तिरूवनंतपुरम, 28 सितंबर:  सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को अपने फैसले में केरल के सबरीमाला स्थित अय्यप्पा स्वामी मंदिर में सभी आयु वर्ग की महिलाओं को प्रवेश की अनुमति दे दी। प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय पीठ ने 4:1 के बहुमत के फैसले में कहा कि केरल के सबरीमाला मंदिर में रजस्वला आयु वर्ग की महिलाओं के प्रवेश पर प्रतिबंध लैंगिक भेदभाव है और यह परिपाटी हिन्दू महिलाओं के अधिकारों का उल्लंघन करती है।

न्यायमूर्ति आर. एफ. नरीमन और न्यायमूर्ति डी. वाई. चन्द्रचूड़ अपने फैसलों में प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा और न्यायमूर्ति ए. एम. खानविलकर के फैसले से सहमत हुए। न्यायमूर्ति इन्दु मल्होत्रा ने बहुमत से अलग अपना फैसला पढ़ा। पांच सदस्यीय पीठ ने चार अलग-अलग फैसले लिखे । मंदिर आम जनता के लिए 16 से 21 के बीच खुला था, लेकिन पिछले माह यहां आई बाढ़ की वजह से प्रवेश पम्पा-त्रिवेणी तक सीमित था। अब यह दोबारा 16 अक्टूबर को खुलेगा।

सबरीमाला के प्रमुख पुजारी और नेताओं ने फैसले पर क्या दी प्रतिक्रिया

- केरल के देवस्वओम मंत्री कडकमपल्ली सुरेन्द्रन ने सबरीमाला मंदिर में सभी आयु वर्ग की महिलाओं को प्रवेश की अनुमति देने वाले उच्चतम न्यायालय के फैसले का शुक्रवार को स्वागत करते हुए इसे ‘ऐतिहासिक’ करार दिया। वहीं मंदिर के प्रमुख पुजारी ने इसे ‘‘निराशाजनक’’ बताया। भगवान अय्यप्पा स्वामी मंदिर का प्रशासनिक कामकाज संभालने वाले त्रावणकोर देवस्वओम बोर्ड का कहना है कि वह फैसले का पालन करने के लिए बाध्य है। मंदिर के तंत्री कंडारारू राजीवारू ने कहा कि हालांकि फैसला ‘‘निराशाजनक’’ है लेकिन वह इसे स्वीकार करते हैं। उन्होंने कहा, ‘‘मैं न्यायालय के फैसले का स्वागत करता हूं। मौजूदा हालात में महिलाओं के लिए विशेष सुविधाओं कीव्यवस्था करना बहुत मुश्किल है। बोर्ड को प्रबंध करना होगा

केरल के मंत्री का बयान

- केरल के देवस्वओम मंत्री सुरेन्द्रन ने कहा कि इसे लागू करना और मंदिर आने वाली महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना अब टीडीबी की जिम्मेदारी है। सुरेन्द्रन ने कहा, राज्य सरकार का यह रूख सिर्फ सबरीमाला मंदिर के लिए नहीं है बल्कि यह उसका मानना है कि किसी भी धर्म स्थल पर महिलाओं के साथ भेदभाव नहीं होना चाहिए।

पीडब्ल्यूडी मंत्री की टिप्पणी

- पीडब्ल्यूडी मंत्री जी सुधाकरन ने कहा कि फैसला महिलाओं के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा करता है।

- केरल की वाम मोर्चे वाली सरकार ने सभी आयु वर्ग की महिलाओं के मंदिर में प्रवेश के फैसले का स्वागत किया।

महिला आयोग सहित महिला नेताओं की क्या है प्रतिक्रिया

मेनका गांधी ने क्या कहा

- केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री मेनका गांधी ने सबरीमाला मंदिर से जुड़े उच्चतम न्यायालय के फैसले का स्वागत करते हुए शुक्रवार को कहा कि इससे हिंदू धर्म के और समावेशी होने का मार्ग प्रशस्त हुआ है।

मेनका ने संवाददाताओं में कहा, ‘‘यह बेहतरीन फैसला है। इससे हिंदू धर्म के और समावेशी होने की दिशा में आगे बढ़ने का रास्ता खुला है। धर्म किसी एक जाति और एक लिंग की संपत्ति नहीं है।’’ 

महिला आयोग की टिप्पणी

- महिला आयोग की अध्यक्ष रेखा शर्मा ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘मैं फैसले का स्वागत करती हूं। अब महिलाएं यह फैसला कर सकती हैं कि वे मंदिर जाना चाहती हैं या नहीं।’’ उन्होंने कहा, ‘‘जब आस्था का अधिकार और समानता का अधिकार एक साथ हों तो जीत समानता के अधिकार की होनी चाहिए।’’ 

महिला अधिकार कार्यकर्ता की टिप्पणी 

- महिला अधिकार कार्यकर्ता और ऑल इंडिया प्रोग्रेसिव विमेन्स ऐसोसिएशन (एपवा) की सचिव कविता कृष्णन ने कहा कि यह फैसला काफी समय से लंबित था। कृष्णन ने कहा कि फौरी तीन तलाक, हाजी अली और सबरीमला मामलों में न्यायालय ने सही कहा है कि महिलाओं की समानता को धार्मिक परिपाटी का बंधक नहीं बनाया जा सकता। जिस तरह से जाति के आधार पर मंदिरों में प्रवेश निषिद्ध करना असंवैधानिक और भेदभावपूर्ण है, लिंग के आधार पर भी प्रवेश निषिद्ध करना वैसा ही है।

ऑल इंडिया डेमोक्रेटिक विमेन्स ऐसोसिएशन की महासचिव की प्रतिक्रिया

- ऑल इंडिया डेमोक्रेटिक विमेन्स ऐसोसिएशन की महासचिव मरियम धावले का ने कहा है कि समानता की दिशा में यह एक और कदम है। उन्होंने कहा कि हम फैसले का स्वागत करते हैं। महिलाओं को मंदिर जाने का संवैधानिक अधिकार है। जो भी इच्छा रखता है, उसे किसी भी मंदिर या दरगाह में जाने की अनुमति होनी चाहिए।

नेशनल फेडरेशन ऑफ इंडियन वीमेन की महासचिव ने कही ये बात

- नेशनल फेडरेशन ऑफ इंडियन वीमेन की महासचिव ऐनी राजा ने कहा कि जैविक कारणों को लेकर महिलाओं को मंदिर में जाने से रोकना बहुत गलत है। उन्होंने कहा कि किसी सामाजिक सुधार की स्वीकार्यता में समय लगता है। यह भी सामाजिक सुधार है जिसकी स्वीकार्यता में समय लगेगा।

दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष स्वाति मालीवाल ने क्या कहा

- दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष स्वाति मालीवाल ने कहा कि देश ने इस फैसले के लिए लंबा इंतजार किया है।

कर्नाटक की महिला एवं बाल विकास मंत्री का बयान

- बेंगलुरु में कर्नाटक की महिला एवं बाल विकास मंत्री जयमाला ने शुक्रवार को आये इस फैसले को ‘ऐतिहासिक’’ बताया।

अभिनेत्री जयमाला ने क्या कहा

- अभिनय से राजनीति में आयीं जयमाला ने संवाददाताओं से कहा कि उनके जीवन में इससे ज्यादा खुशी का पल नहीं हो सकता। ‘‘मैं महिला समुदायों, उच्चतम न्यायालय और भगवान की शुक्रगुजार हूं... मैं संविधान लिखने वाले (डॉक्टर भीम राव) आंबेडकर को भी धन्यवाद देती हूं।

कार्यकर्ता तृप्ति देसाई की टिप्पणी 

- महाराष्ट्र के शनि शिंगणापुर मंदिर में महिलाओं को प्रवेश की इजाजत दिलाने के लिए लड़ाई लड़ने वाली कार्यकर्ता तृप्ति देसाई ने केरल के सबरीमाला स्थित अय्यप्पा मंदिर पर आए उच्चतम न्यायालय के फैसले का शुक्रवार को स्वागत किया। देसाई ने कहा कि  शीर्ष न्यायालय का आदेश महिलाओं के संवैधानिक अधिकारों की जीत है और पितृसत्तात्मक सोच और मंदिर न्यासियों की अकड़ को करारा झटका है, जिन्होंने महिलाओं को वहां प्रवेश देने से इनकार किया था। देसाई ने कहा कि वह जल्दी ही अय्यप्पा मंदिर जाएंगी।

(समाचार एजेंसी भाषा इनपुट)

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