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उच्चतम न्यायालय ने दुर्घटना दावों के शीघ्र निपटारे को लेकर निर्देश पारित किए

By भाषा | Updated: March 18, 2021 23:18 IST

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नयी दिल्ली, 18 मार्च उच्चतम न्यायालय ने सड़क दुर्घटना के पीड़ितों को मुआवजे के भुगतान को कारगर बनाने के लिए देश भर में पुलिस, मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरणों और बीमा कंपनियों के लिए कई दिशा-निर्देश जारी किए हैं। न्यायालय ने कहा है कि बीमाकर्ताओं को न्यायिक अधिकरणों के खातों में धनराशि जमा करनी होगी।

शीर्ष न्यायालय ने 16 मार्च को पारित दिशा-निर्देशों में सभी हितधारकों जैसे पुलिस, एमएसीटी, बीमाकर्ताओं और दावेदारों द्वारा दावा मामलों के त्वरित निपटारे और सड़क हादसों के पीडि़तों के साथ-साथ उनके परिजनों को मुआवजे के भुगतान के लिए सूचना प्रौद्योगिकी उपकरणों के उपयोग पर जोर दिया है।

न्यायमूर्ति एस के कौल और न्यायमूर्ति आर सुभाष रेड्डी की पीठ ने दुर्घटना मामलों के शीघ्र निपटारे के लिए केंद्र सरकार को अधिकरणों, पुलिस प्राधिकारियों और बीमाकर्ताओं के लिए देशभर में सुलभ ऑनलाइन मंच विकसित करने का निर्देश दिया।

पीठ ने बजाज एलियांज जनरल इंश्योरेंस की याचिका पर ये निर्देश पारित किये। पीठ ने केंद्र की ओर से पेश अतिरिक्त सालिसिटर जनरल जयंत के सूद की इस दलील का संज्ञान लेते हुए कि दिशा-निर्देशों के तहत आवश्यक अवसंरचना के निर्माण के लिए कुछ और समय की आवश्यकता होगी, मामले को चार मई के लिए सूचीबद्ध करने के निर्देश दिए।

न्यायालय ने दुर्घटना की सूचना रिपोर्ट को लेकर निर्देश दिया कि पुलिस थाना आपने क्षेत्राधिकार में हुए हादसे की (मोटर वाहन) अधिनियम की धारा 158 (6), अधिनियम में 2019 में संशोधन के बाद धारा 159, के तहत हादसे की जानकारी अधिकरण और बीमाकर्ता को पहले 48 घंटों के भीतर ईमेल अथवा तय वेबसाइट पर देगा।

न्यायालय ने कहा कि इसके बाद पुलिस दुर्घटना से संबंधित दस्तावेजों को इकट्ठा करने और मुआवजे की गणना के लिए विस्तृत दुर्घटना रिपोर्ट दर्ज करेगी और सूचना और दस्तावेजों को सत्यापित करेगी।

न्यायालय ने कहा कि ये कागजात रिपोर्ट का हिस्सा होंगे। अधिकरण और बीमाकर्ता को रिपोर्ट ईमेल से तीन माह के भीतर मिल जानी चाहिए। ऐसे ही दावाकर्ता को मुआवजे के लिए संबंधित दस्तावेजों के साथ ईमेल से आवेदन की इजाजत दी जानी चाहिए।

न्यायालय ने कहा कि मामले के अनुसार एमएसीटी पुलिस की विस्तृत रिपोर्ट या मुआवजे के लिए आवेदन के साथ समन जारी करेगा। साथ ही कहा की अधिकरण में रिपोर्ट या मुआवजे के लिए आवदेन पर बीमाकर्ता प्रतिक्रिया/निपटारे के लिए ईमेल के जरिये पेशकश कर सकता है ।

निर्देश में कहा गया है कि आदेश पारित करने के बाद अधिकरण इसकी एक प्रमाणित प्रतिलिपि बीमाकर्ता को ईमेल से भेजेगा।

इसमें कहा गया है कि बीमाकर्ता निर्णय से संतुष्ट होने पर आरटीजीएस या एनईएफटी द्वारा अधिकरण के बैंक खाते में राशि जमा करेगा।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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