कोई विकल्प नहीं बचा?, बंगाल एसआईआर मामले में शीर्ष न्यायालय का आदेश, न्यायिक अधिकारियों की तैनाती
By सतीश कुमार सिंह | Updated: February 20, 2026 17:52 IST2026-02-20T17:52:00+5:302026-02-20T17:52:50+5:30
सुप्रीम कोर्ट ने आज कलकत्ता हाई कोर्ट को पश्चिम बंगाल में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया को पूरा करने में सहायता के लिए न्यायिक अधिकारियों की नियुक्ति करने का निर्देश दिया।

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नई दिल्लीः उच्चतम न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण आदेश में पश्चिम बंगाल में विवादों से घिरी मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया में निर्वाचन आयोग की सहायता के लिए सेवारत और पूर्व जिला न्यायाधीशों की तैनाती का शुक्रवार को निर्देश दिया। निर्वाचन आयोग और तृणमूल कांग्रेस के नेतृत्व वाली सरकार के बीच ‘‘दुर्भाग्यपूर्ण आरोप-प्रत्यारोप’’ पर खेद जताते हुए प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम पंचोली की पीठ ने राज्य में एसआईआर प्रक्रिया को पूरा करने के लिए कई नये निर्देश जारी किये।
कोर्ट ने मतदाता सूची की सफाई को लेकर राज्य सरकार और चुनाव आयोग के बीच चल रहे दुर्भाग्यपूर्ण आरोप-प्रत्यारोप के मद्देनजर यह बात कही। भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा, “आरोप-प्रत्यारोप का यह दुर्भाग्यपूर्ण परिदृश्य दो संवैधानिक पदाधिकारियों... यानी राज्य सरकार और चुनाव आयोग के बीच विश्वास की कमी को दर्शाता है।
अब, यह प्रक्रिया उन लोगों के दावों और आपत्तियों के चरण में अटकी हुई है, जिन्हें विसंगति सूची में शामिल किया गया है।” सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट को जिला न्यायाधीश रैंक के सेवारत और पूर्व न्यायिक अधिकारियों को एसआईआर कार्य के लिए मुक्त करने का निर्देश दिया। कोर्ट ने कहा कि असाधारण परिस्थितियों के कारण उसे यह असाधारण आदेश पारित करना पड़ा।
चुनाव आयोग और टीएमसी के नेतृत्व वाली सरकार के बीच चल रहे "दुर्भाग्यपूर्ण आरोप-प्रत्यारोप" पर खेद व्यक्त करते हुए, मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और विपुल एम पंचोली की पीठ ने राज्य में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया को पूरा करने के लिए कई नए निर्देश जारी किए।
पीठ ने कलकत्ता उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश से न्यायिक अधिकारियों को उपलब्ध कराने और एसआईआर कार्य में सहायता के लिए पूर्व न्यायाधीशों की तलाश करने को कहा, क्योंकि उसने राज्य सरकार द्वारा पुनरीक्षण कार्य के लिए पर्याप्त 'ए' श्रेणी के अधिकारियों को उपलब्ध न कराने पर गंभीर संज्ञान लिया।