लाइव न्यूज़ :

सुप्रीम कोर्ट ने प्रदेश सरकार की जमकर की खिंचाई, कहा- क्या केरल कानून से ऊपर है?

By भाषा | Updated: July 3, 2019 05:54 IST

ऑर्थोडॉक्स समूह के मलांकारा चर्च के तहत 1100 ‘पेरिश’ और उनके गिरजाघरों का नियंत्रण देने पर शीर्ष अदालत के आदेश को लागू करने से संबंधित एक मामले की सुनवाई कर रही न्यायमूर्ति अरुण मिश्रा और न्यायमूर्ति एम आर शाह की पीठ ने चेतावनी दी कि वे केरल के मुख्य सचिव को ‘‘न्याय प्रणाली का मज़ाक बनाने’’ के लिए तलब करेंगे।

Open in App
ठळक मुद्देउच्चतम न्यायालय ने गिरजाघरों में प्रशासन और प्रार्थनाओं के संचालन के अधिकार पर दो गुटों के बीच विवाद पर 2017 में दिये गये उसके फैसले को लागू नहीं करने पर केरल सरकार की खिंचाई की। कोर्ट ने कहा, ‘‘क्या केरल कानून से ऊपर है?’’ शीर्ष अदालत ने उसके फैसले को लागू नहीं करने पर राज्य के मुख्य सचिव को सलाखों के पीछे डालने की चेतावनी दी।

उच्चतम न्यायालय ने गिरजाघरों में प्रशासन और प्रार्थनाओं के संचालन के अधिकार पर दो गुटों के बीच विवाद पर 2017 में दिये गये उसके फैसले को लागू नहीं करने पर केरल सरकार की खिंचाई करते हुए मंगलवार को कहा, ‘‘क्या केरल कानून से ऊपर है?’’ शीर्ष अदालत ने उसके फैसले को लागू नहीं करने पर राज्य के मुख्य सचिव को सलाखों के पीछे डालने की चेतावनी दी।

ऑर्थोडॉक्स समूह के मलांकारा चर्च के तहत 1100 ‘पेरिश’ और उनके गिरजाघरों का नियंत्रण देने पर शीर्ष अदालत के आदेश को लागू करने से संबंधित एक मामले की सुनवाई कर रही न्यायमूर्ति अरुण मिश्रा और न्यायमूर्ति एम आर शाह की पीठ ने चेतावनी दी कि वे केरल के मुख्य सचिव को ‘‘न्याय प्रणाली का मज़ाक बनाने’’ के लिए तलब करेंगे।

पीठ ने राज्य की ओर से पेश वकील से कहा, ‘‘अपने मुख्य सचिव से कहें कि अगर वह सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के खिलाफ जाने का इरादा रखते है, तो हम यहां सभी को बुलाएंगे। क्या केरल कानून से ऊपर है? आप न्याय प्रणाली का मजाक बना रहे हैं।’’

पीठ ने यह भी चेतावनी दी कि यदि शीर्ष अदालत द्वारा पारित आदेश को राज्य द्वारा लागू नहीं किया गया तो केरल के मुख्य सचिव को सलाखों के पीछे डाला जा सकता है। राज्य सरकार की जबरदस्त खिंचाई करते हुए पीठ ने कहा, ‘‘आप मामले की गंभीरता को समझते हैं। हमने आप लोगों को इतना बर्दाश्त किया है। आपके खिलाफ कार्रवाई करने का समय आ गया है।’’

पीठ ने कहा, ‘‘देश में क्या हो रहा है? यदि उन्हें लगता है कि वे इस तरह की चीजें कर सकते हैं, तो हम सभी को यहां बुलाएंगे। उच्च न्यायालय के साथ इस तरह का व्यवहार नहीं किया जा सकता है।’’ न्यायालय ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार को उसके आदेशों को लागू करना होगा।

शीर्ष अदालत ने 2017 में दिये गये अपने फैसले में कहा था कि 1934 के मलांकारा गिरजाघर के दिशानिर्देशों के अनुसार मलांकारा गिरजाघर के तहत 1,100 ‘पेरिश’ और उनके गिरजाघरों को ऑर्थोडॉक्स गुट द्वारा नियंत्रित किया जाना चाहिए। ‘‘पेरिश’’ एक छोटा प्रशासनिक जिला होता है जिसका अपना चर्च और पादरी होता है।

टॅग्स :सुप्रीम कोर्टकेरल
Open in App

संबंधित खबरें

कारोबारवायनाड पुनर्वासः 200 से अधिक लोगों की मौत और 5.38 करोड़ रुपये खर्च?, कांग्रेस ने धनराशि का हिसाब किया सार्वजनिक

भारतअल्पसंख्यकों पर हमला करने वाले लोगों के साथ सीएम विजयन?, राहुल गांधी ने कहा- 140 में से 100 सीट जीतकर बनाएंगे सरकार?, भाजपा 0 पर आउट?

भारतअल्केमिस्ट एसेट रिकंस्ट्रक्शन कंपनी प्राइवेट लिमिटेड केस से अलग हुए सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश न्यायमूर्ति केवी विश्वनाथन, आखिर कारण

कारोबारकेरलम विधानसभा चुनावः वृद्ध आबादी 16.5 प्रतिशत?, पेंशन, स्वास्थ्य सुविधाएं और सुरक्षा सबसे बड़े चुनावी मुद्दे?, देखिए किस दल ने क्या दिया तोहफा?

क्राइम अलर्टमालदा में 7 न्यायिक अधिकारी को बनाया बंधक?, बागडोगरा हवाई अड्डे से मुख्य आरोपी अधिवक्ता मोफक्करुल इस्लाम अरेस्ट, अब तक 35 अरेस्ट, वीडियो

भारत अधिक खबरें

भारतबारामती विधानसभा उपचुनावः सीएम फडणवीस की बात नहीं मानी?, कांग्रेस ने उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार के खिलाफ आकाश मोरे को चुनाव मैदान में उतारा

भारतUP की महिला ने रचा इतिहास! 14 दिनों में साइकिल से एवरेस्ट बेस कैंप पहुंचने वाली पहली भारतीय महिला बनीं

भारतLadki Bahin Yojana Row: महाराष्ट्र में 71 लाख महिलाएं अयोग्य घोषित, विपक्ष ने किया दावा, सरकार की जवाबदेही पर उठाए सवाल

भारतयूपी बोर्ड ने 2026-27 के लिए कक्षा 9 से 12 तक NCERT और अधिकृत पुस्तकें अनिवार्य कीं

भारतपाकिस्तान के रक्षामंत्री ख्वाजा आसिफ के कोलकाता पर हमले की धमकी वाले बयान पर सोशल मीडिया पर 'धुरंधर' अंदाज़ में आई प्रतिक्रिया