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Super Pink Moon 2020: जानें भारत में कब और कैसे देख सकते हैं सुपर पिंक मून, धरती के सबसे नजदीक होगा चांद

By अनुराग आनंद | Updated: April 7, 2020 19:36 IST

आज शाम में चांद हर रोज से कहीं ज्यादा बड़ा व खूबसूरत आपको दिखने वाला है। इसकी एक बड़ी वजह यह है कि पिंक सुपरमून के दौरान चांद धरती के बेहद करीब होगा।

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ठळक मुद्देजब चांद और धरती के बीच की दूरी सबसे कम रह जाती है और चंद्रमा की चमक बढ़ जाती है उस स्थिति में धरती पर सुपरमून का नजारा देखने को मिलता है।इस दौरान चांद रोजाना की तुलना में 14 फीसद ज्यादा बड़ा और 30 फीसद तक ज्यादा चमकीला दिखाई देता है।

नई दिल्ली:  दुनिया भर में फैली इस कोरोना महामारी के बीच आज (मंगलवार ) शाम को एक भौगोलिक घटना होने वाली है। इसी घटना को हम पिंक सुपरमून के नाम से जानते हैं। दरअसल, इस दौरान जिस चांद को बचपन से देखते और जिसके बारे में तरह-तरह की कहानियां सुनते हुए आप बड़े हुए हैं, उस चांद को आप नजदीक से देख सकते हैं। 

आज शाम में चांद हर रोज से कहीं ज्यादा बड़ा व खूबसूरत आपको दिखने वाला है। इसकी एक बड़ी वजह यह है कि पिंक सुपरमून के दौरान चांद धरती के बेहद करीब होगा। सबसे अच्छी बात यह है कि आज अपने देश भारत से भी लोग चांद के इस खूबसूरती को दीदार कर सकेंगे। 

अब जानते हैं क्या होता है सुपरमून? जब चांद और धरती के बीच की दूरी सबसे कम रह जाती है और चंद्रमा की चमक बढ़ जाती है उस स्थिति में धरती पर सुपरमून का नजारा देखने को मिलता है। इस दौरान चांद रोजाना की तुलना में 14 फीसद ज्यादा बड़ा और 30 फीसद तक ज्यादा चमकीला दिखाई देता है।

ऐसे में अब मन में सवाल उठना जायज है कि इसे पिंक सुपरमून क्यों कहते हैं? आपको बता दें कि इस दौरान ऐसा नहीं है कि इस दिन चांद पिंक रंग का दिखाई देगा और ना ही इसके पीछे कोई वैज्ञानिक कारण है। दरअसल अमेरिका और कनाडा में इस मौसम में उगने वाले फ्लॉक्स सुबुलाता फूल की वजह से इसे पिंक सुपरमून कहा जाता है। यह फूल गुलाबी रंग का होता है इसे मॉस पिंक भी कहते हैं।

कब पहली बार दिखा था सुपरमून-यदि हम सुपरमून की बात करें तो अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा (NASA) की मानें तो आज से करीब 41 साल पहले 1979 में सुपरमून पहली बार देखा गया था। यूं कह सकते हैं कि तभी यह पहली बार अस्तित्व में आया था, लोगों को इसके बारे में पता चला था। तब एस्ट्रोनॉमर्स ने इसे पेरीजीन फुल मून नाम दिया था। बाद में इसका नाम सुपरमून रखा गया था। लेकिन,  जैसा कि आपने उपर पढ़ा कि बाद में  कनाडा में उगने वाले फ्लॉक्स सुबुलाता फूल की वजह से इसे पिंक सुपरमून कहा जाता है। यह फूल गुलाबी रंग का होता है इसे मॉस पिंक भी कहते हैं।

आमतौर पर पृथ्वी से चंद्रमा की दूरी कितनी है-आमतौर पर पृथ्वी से चंद्रमा की दूरी 384400 किमी मानी जाती है। वहीं, चंद्रमा की पृथ्वी से सबसे ज्यादा दूरी होने पर यह दूरी लगभग 405696 किमी मानी जाती है जिसे अपोगी (apogee) की स्थिति कहते हैं। चंद्रमा की पेरिगी की स्थिति में पूर्णिमा पड़ जाए, तो हमें सुपरमून दिखाई देता है। एक साल में न्यूनतम 12 पूर्णिमा पड़ती है, लेकिन ऐसा कम होता है कि पेरिगी की स्थिति में पूर्णिमा भी पड़े।

आखिर में जानिए आज शाम कब देख पाएंगे सुपरमून-ये सुपरमून मध्य रात्रि में 2:35 बजे पर दिखेगा। लेकिन भारतीय समयानुसार 07 अप्रैल की शाम से ये भारत में दिखाई देना शुरू हो जायेगा पर ये पूरी तरह से सुबह 8 बजे के आस पास दिखाई देगा। भारत में इस समय रोशनी रहने के कारण इसका नजारा देखने को नहीं मिल सकेगा।  

टॅग्स :चंद्रमाइंडियासूर्य ग्रहणचन्द्रग्रहण
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