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राजस्थान में पर्यटकों से दुर्व्यवहार करने वालों पर होगी कड़ी कार्रवाई, विधेयक पारित

By भाषा | Updated: September 14, 2021 14:03 IST

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जयपुर, 14 सितंबर राजस्थान में पर्यटकों से दुर्व्यवहार करने वालों पर कड़ी कार्रवाई होगी। इस बारे में एक विधेयक सोमवार को राज्य विधानसभा में पारित किया गया।

विधानसभा ने राजस्थान पर्यटन व्यवसाय (सुकरकरण और विनियमन) (संशोधन) विधेयक 2021 सोमवार को ध्वनिमत से पारित कर दिया। इस संशोधन के बाद अब पर्यटकों से दुर्व्यवहार करने वालों पर कड़ी कार्रवाई हो सकेगी। अब यह संज्ञेय अपराध की श्रेणी में आ गया है।

इससे पहले पर्यटन राज्य मंत्री गोविंद सिंह डोटासरा ने सदन में विधेयक प्रस्तुत किया। उन्होंने विधेयक पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए कहा कि इस संशोधन में धारा 27-क जोड़ा गया है। उन्होंने कहा कि अब इसमें होने वाले अपराध संज्ञेय और जमानतीय होंगे। उन्होंने कहा कि वहीं, धारा 13 की उपधारा 3 में अपराध की पुनरावृत्ति होने पर धारा 13 की उपधारा 4 में यह गैर जमानतीय होगा। उन्होंने कहा कि ये विधेयक भिखारियों को परेशान करने के लिए न पहले था, ना ही अब है।

डोटासरा ने कहा कि पर्यटन का व्यवसाय विकास की गति पकड़े, राजस्थान की आन-बान-शान की अच्छी अनुभूति लेकर पर्यटक वापस लौटें और उनके साथ दुर्व्यवहार को रोका जायें, इसी उददेश्य से वर्ष 2010 में विधेयक लाया गया था। उन्होंने कहा कि अब इसमें संशोधन की आवश्यकता इसलिए पड़ी कि उसमें जो सजा का प्रावधान था, उसमें अपराध संज्ञेय है या असंज्ञेय और सजा जमानतीय है या नहीं, ये अंकित नहीं था।

डोटासरा ने सदन में कहा कि ‘लपकों’ पर अंकुश लगाने के लिए राज्य सरकार द्वारा जयपुर एवं उदयपुर में थाने खोले गए। उन्होंने कहा, ‘‘वर्ष 2016 में रिपोर्ट भी दर्ज हुई और चालान प्रस्तुत किए गए। उस समय मामले में आरोपी उच्च न्यायालय गए। उच्च न्यायालय ने जनवरी 2017 में कहा कि यह कहीं नहीं लिखा हुआ है ये संज्ञेय अपराध है।’’

उन्होंने कहा कि पहले लगभग 54 प्रकरण दर्ज भी हुए, लेकिन उच्च न्यायालय के फैसले के बाद आगे न तो पुलिस एफआईआर कर सकती थी, ना ही अदालत कोई बड़ी कार्रवाई कर सकती थी। उन्होंने कहा कि इसके बाद भी पुलिस और पर्यटन विभाग ने ‘लपकों’ के खिलाफ कार्रवाई की।

उन्होंने कहा, ‘‘इसमें वर्ष 2018 में 204, 2019 में 462, 2020 में 194 और वर्ष 2021 में 102 लोगों पर कार्रवाई की गई। इनमें अपराध संज्ञेय नहीं होने से अदालत में सिर्फ इस्तगासा पेश करने पर कुछ दंडनीय राशि लेकर छोड़ दिया जाता था। इसी कारण अपराध का रिकॉर्ड भी संधारित नहीं हो सकता था और अपराध की पुनरावृत्ति प्रमाणित नहीं कर सकते थे। अब ऐसा नहीं होगा।’’

डोटासरा ने कहा कि प्रदेश के पर्यटन की साख को और मजबूत बनाने के लिए कानून लाया गया है। उन्होंने कहा कि आगे भी पर्यटन की दृष्टि से विधेयक में संशोधन की आवश्यकता हुई तो किए जायेंगे। उन्होंने कहा कि प्रदेश में पर्यटन के क्षेत्र में बहुत संभावनाएं हैं।

इससे पहले सदन में विधेयक को जनमत जानने के लिए भेजने के संशोधन प्रस्ताव को ध्वनिमत से अस्वीकार कर दिया गया।

वहीं पर्यटन क्षेत्र से जुड़े संगठनों ने सरकार की इस पहल का स्वागत किया है। राजस्थान एसोसिएशन आफ टूर आपरेटर्स संजय कौशिक ने कहा कि पर्यटक स्थलों को सुरक्षित बनाने के लिए पर्यटकों से दुर्व्यवहार करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई जरूरी है। उन्होंने कहा कि इस तरह की समस्या जयपुर व उदयपुर जैसे बड़े शहरों में ज्यादा है और पर्यटकों से दुर्व्यवहार की घटनाओं से पूरे उद्योग की छवि धूमिल होती है।

इस तरह के समाजकंटकों या दलाल को स्थानीय भाषा में 'लपका' कहा जाता है। ये लोग कमीशन आदि के लिए पर्यटकों को भ्रमित करते हैं और उनके साथ दुर्व्यवहार करते हैं।

टूरिस्ट फेडरेशन आफ इंडिया की कार्यकारी सदस्य व राष्ट्रीय स्तरीय टूरिस्ट गाइड सुनीता शर्मा ने कहा कि चूंकि इस तरह के दलाल सरकारी नियंत्रण के दायरे में नहीं आते इसलिए उनका पकड़ना कठिन होता है। उन्होंने कहा कि इस तरह के लोग अपने कमीशन आदि के लालच में पर्यटकों को भ्रमित करते हैं, उनसे दुर्व्यवहार करते हैं और पूरे उद्योग की छवि खराब करते हैं।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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