दिल्ली के प्रदूषण में पराली जलाने की हिस्सेदारी 40 प्रतिशत, लेकिन विपक्ष यह मानने को तैयार नहीं: राय

By भाषा | Updated: November 2, 2020 15:41 IST2020-11-02T15:41:25+5:302020-11-02T15:41:25+5:30

Straw burning contributes 40 percent to Delhi's pollution, but opposition is not ready to accept it: Rai | दिल्ली के प्रदूषण में पराली जलाने की हिस्सेदारी 40 प्रतिशत, लेकिन विपक्ष यह मानने को तैयार नहीं: राय

दिल्ली के प्रदूषण में पराली जलाने की हिस्सेदारी 40 प्रतिशत, लेकिन विपक्ष यह मानने को तैयार नहीं: राय

नयी दिल्ली, दो नवम्बर दिल्ली के पर्यावरण मंत्री गोपाल राय ने पराली जलाए जाने के मुद्दे पर सोमवार को भाजपा और कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि दिल्ली के प्रदूषण में पराली जलाने की हिस्सेदारी बढ़कर 40 प्रतिशत हो गई है, लेकिन विपक्षी दल इसे मानने को तैयार नहीं।

पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय की वायु गुणवत्ता और मौसम पूर्वानुमान तथा अनुसंधान प्रणाली (सफर) के अनुसार दिल्ली के प्रदूषण में पराली जलाने की हिस्सेदारी रविवार को बढ़कर 40 प्रतिशत हो गई है, जो इस मौसम का अधिकतम है।

इससे पहले शनिवार को प्रदूषण में इसकी हिस्सेदारी 32 प्रतिशत, शुक्रवार को 19 प्रतिशत और बृहस्पतिवार को 36 प्रतिशत थी।

राय ने दिल्ली में वाहनों से होने वाले प्रदूषण को कम करने के लिए सभी 272 वार्डों में ‘रेड लाइट ऑन, गाड़ी ऑफ’ अभियान की शुरुआत करते हुए पत्रकारों से कहा, ‘‘हम बार-बार कह रहे हैं कि दिल्ली में दिवाली के आसपास प्रदूषण के गंभीर श्रेणी में पहुंचने के लिए पराली जलाना एक प्रमुख कारण है, लेकिन भाजपा और कांग्रेस का कहना है कि दिल्ली के प्रदूषण में पराली जलाने की हिस्सेदारी चार से छह प्रतिशत है, जबकि आंकड़ों के अनुसार यह 40 प्रतिशत है।’’

उन्होंने कहा कि दिल्ली सरकार जैव अपशिष्ट जलाने, वाहनों से होने वाले प्रदूषण और धूल प्रदूषण पर अंकुश लगाने के लिए हरसंभव प्रयास कर रही है, ‘‘लेकिन हम पराली जलाने के मामलों के लिए क्या करें?’’

‘सफर’ के आंकड़ों के मुताबिक, पिछले साल एक नवम्बर को दिल्ली के प्रदूषण में पराली जलाने की हिस्सेदारी 44 प्रतिशत थी।

अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी ‘नासा’ के उपग्रहों से ली गई तस्वीरों में दिख रहा है कि पंजाब और हरियाणा एवं उत्तर प्रदेश के बड़े हिस्सों में पराली जल रही है।

राय ने कहा कि वायु प्रदूषण के साथ कोविड-19 ने स्थिति को ‘‘घातक’’ बना दिया है और नए आयोगों के गठन से अधिक जरूरी जमीनी स्तर पर ठोस कार्रवाई करना है।

केन्द्र ने हाल ही में एक अध्यादेश के माध्यम से एक नया कानून पेश किया था, जो वायु प्रदूषण पर अंकुश लगाने के लिए राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और आसपास के क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता प्रबंधन के लिए एक शक्तिशाली आयोग का गठन करता है।

राजस्थान के पटाखे जलाने पर प्रतिबंध लगाने के सवाल पर राय ने कहा, ‘‘ ‘एयर शेड’ के अनुसार प्रदूषण का आकलन किया जाता है। एक साथ मिलकर कदम उठाने की जरूरत है। दिल्ली में, बार-बार यह कहा जा रहा है कि पड़ोसी राज्यों में पराली जलाने के मामलों की वजह से प्रदूषण का स्तर बढ़ रहा है और केन्द्र तथा राज्य सरकारों से हमें यह जवाब मिल जाता है कि पराली जालने के अलावा और कोई रास्ता नहीं है।’’

दिल्ली में, प्रशासन ने पूसा स्थित भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान द्वारा विकसित ‘बायो डीकम्पोजर’ का बासमती चावल के खेतों के अलावा सभी खेतों पर छिड़काव किया है, ताकि पराली जलाने से बचा जाए।

राय ने कहा, ‘‘ इसके प्राथमिकी नतीजे काफी सकारात्मक हैं। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल चार नवम्बर को इसकी जमीनी स्थिति का आकलन करेंगे।’’

उन्होंने कहा, ‘‘ हम सभी राज्यों और केन्द्र सरकार से कहना चाहते हैं कि ‘बायो डीकम्पोजर’ से सस्ता कोई विकल्प नहीं है। हम उनसे अनुरोध करते हैं कि वह खुद देखें कि यह कैसे काम करता है।

Web Title: Straw burning contributes 40 percent to Delhi's pollution, but opposition is not ready to accept it: Rai

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