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जम्मू कश्मीर में चुनाव कराने से पहले राज्य का दर्जा बहाल किया जाना चाहिए: आजाद

By भाषा | Updated: August 10, 2021 18:33 IST

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श्रीनगर, 10 अगस्त कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद ने मंगलवार को कहा कि विधानसभा चुनाव से पहले जम्मू कश्मीर का राज्य का दर्जा बहाल होना चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने जम्मू कश्मीर के निवासियों के लिए भूमि और रोजगार के अधिकारों की वकालत की।

उन्होंने कहा कि अगर इस प्रकार के लाभ देने वाले कानून हिमाचल प्रदेश जैसे राज्यों में वैध हैं तो उन्हें तत्कालीन (जम्मू कश्मीर) राज्य से क्यों छीना गया।

राज्यसभा में पूर्व नेता प्रतिपक्ष ने यह भी कहा कि उनकी पार्टी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 24 जून को सर्वदलीय बैठक में दिए गए आश्वासन के पूरे होने का भी इंतजार कर रही है। आजाद, कश्मीर के गांदरबल जिले के तुल्लामुल्ला क्षेत्र में चिनार के पेड़ों के बीच बने माता खीर भवानी मंदिर गए जो कश्मीरी पंडितों के लिए महत्वपूर्ण उपासना स्थल है।

इसके अलावा वह हजरतबल दरगाह गए जहां पैगंबर मोहम्मद का बाल रखा हुआ है। उन्हें इन दोनों जगहों पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी के साथ जाना था लेकिन दिल्ली से उनकी उड़ान में देर हो गई। मंदिर परिसर के बाहर आजाद ने संवाददाताओं से कहा कि 1990 की शुरुआत में आतंकवाद के कारण घाटी से बाहर गए कश्मीरी पंडितों को वापस लाया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा, “चुनाव जल्दी कराना चाहिए। लेकिन चुनाव से पहले राज्य का दर्जा बहाल किया जाना चाहिए जो बेहद जरूरी है। कश्मीरी पंडितों को वापस लाया जाना चाहिए।”

आजाद ने कहा, “अनुच्छेद 370 निरस्त करने के बाद हमारी भूमि और रोजगार (अधिकार) जो छीन लिए गए थे, उन्हें वापस दिया जाना चाहिए, उसी तरह जैसे वो पहले (पांच अगस्त 2019) थे। इसके लिए राज्य का दर्जा बहाल करने के बाद नया कानून लाया जाना चाहिए।”

आजाद के मंदिर जाने से कुछ देर पहले सुबह राहुल गांधी वहां गए थे। उन्होंने कहा, “मैं आज दिल्ली से आया लेकिन विमान देर से पहुंचा और इसलिए हम यहां मिल नहीं सके। लेकिन यह मेरे कार्यक्रम में शामिल था इसलिए मैं यहां आया और हजरतबल भी जाऊंगा।” कांग्रेस की विश्वसनीयता खत्म होने के भारतीय जनता पार्टी के आरोप पर आजाद ने कहा, “सबको पता है कि कौन विश्वसनीय है।”

खीर भवानी मंदिर के बाद आजाद हजरतबल दरगाह गए और बाद में यहां एम ए रोड पर कांग्रेस भवन के उद्घाटन में गांधी के साथ शामिल हुए। आजाद ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि यह अनुच्छेद 370 नहीं था जिसने जम्मू कश्मीर के भूमि अधिकारों के संरक्षण का प्रावधान किया था ।

उन्होंने कहा कि अगर पूर्वोत्तर या हिमाचल प्रदेश में ऐसे कानून हो सकते हैं तो जम्मू कश्मीर में क्यों नहीं। आजद ने पूछा, “वह (भूमि अधिकार सुरक्षा) कोई नया कानून नहीं था। उसे (जम्मू कश्मीर के तत्कालीन शासक) महाराजा हरि सिंह द्वारा 1927 में पारित किया गया था। पूर्वोत्तर में भूमि अधिकारों के लिए विशेष प्रावधान हैं और हिमाचल प्रदेश ने नया कानून पारित किया है। जम्मू कश्मीर से इसे क्यों छीना गया?” वरिष्ठ कांग्रेस नेता ने उम्मीद जताई कि सर्वदलीय बैठक में प्रधानमंत्री द्वारा दिया गया आश्वासन पूरा किया जाएगा।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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