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सोनिया गांधी ने कमलनाथ को गठजोड़ बनाने वाले नेताओं से सपर्क करने की सौंपी जिम्मेदारी

By लोकमत समाचार ब्यूरो | Updated: May 17, 2019 05:25 IST

सोनिया गांधी ने मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ को बड़ी जिम्मेदारी दी है. कमलनाथ यूपीए का गठजोड़ बनाने और अन्य दलों के नेताओं को साथ लाने का काम करेंगे.

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ठळक मुद्देयूपीए के चेयरपर्सन सोनिया गांधी ने मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ पर भरोसा जताते हुए उन्हें यूपीए के गठजोड़ बनाने वाले अन्य दलों के नेताओं को साथ लाने की जिम्मेदारी सौंपी है. यह माना जाता है कि कमलनाथ को फ्लोर मैनेजमेंट का बहुत अनुभव है और हर पार्टी में उनकी पकड़ है. इसके अलावा ज्यादातर पार्टियों के नेताओं से उनके अच्छे संबंध भी है. सोनिया गांधी ने विपक्षी दलों के प्रमुख नेताओं को फोन करके जानकारी ली है कि वे 22, 23 और 24 मई को दिल्ली में रहेंगे कि नहीं.

यूपीए के चेयरपर्सन सोनिया गांधी ने मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ पर भरोसा जताते हुए उन्हें यूपीए के गठजोड़ बनाने वाले अन्य दलों के नेताओं को साथ लाने की जिम्मेदारी सौंपी है. कमलनाथ गैर भाजपाई दलों के नेताओं से जल्द ही संपर्क करेंगे.

सोनिया गांधी ने मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ को बड़ी जिम्मेदारी दी है. कमलनाथ यूपीए का गठजोड़ बनाने और अन्य दलों के नेताओं को साथ लाने का काम करेंगे. उन्हें गैर भाजपाई दलों जैसे मायावती, ममता बनर्जी, बीजू पटनायक, जगमोहन और केसीआर से बातचीत करने का जिम्मा दिया गया है. 

यह माना जाता है कि कमलनाथ को फ्लोर मैनेजमेंट का बहुत अनुभव है और हर पार्टी में उनकी पकड़ है. इसके अलावा ज्यादातर पार्टियों के नेताओं से उनके अच्छे संबंध भी है. कांग्रेस में कई और भी दिग्गज नेता हैं, लेकिन कमलनाथ का चयन सोनिया गांधी ने काफी सोच-विचार के बाद किया है. खासकर मध्यप्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनवाने में कमलनाथ की महत्वपूर्ण भूमिका रही है, जिसके कारण ही उन्हें मुख्यमंत्री का पद भी मिला. अब कमलनाथ देश का प्रधानमंत्री बनाने के लिए गैर भाजपाई दलों के साथ रणनीति बनाएंगे.

उल्लेखनीय है कि सोनिया गांधी ने विपक्षी दलों के प्रमुख नेताओं को फोन करके जानकारी ली है कि वे 22, 23 और 24 मई को दिल्ली में रहेंगे कि नहीं. माना जा रहा है कि कांग्रेस विपक्षी दलों की बैठक बुलाकर यह संदेश देने की कोशिश करेगी कि भले ही वह कई राजनीतिक पार्टियों के साथ प्री-पोल गठजोड़ का हिस्सा न हों, लेकिन सभी मोदी के खिलाफ लड़े और एकजुट हैं. दक्षिण भारत में तीसरे मोर्चे के गठन के लिए तेलंगाना के मुख्यमंत्री के.सी. राव की कोशिशों के बाद कांग्रेस ने भी सक्रियता दिखाई है.

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