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ओडिशा विधानसभा में अध्यक्ष के आसन की तरफ चप्पल, माइक्रोफोन और कागज फेंके गए

By भाषा | Updated: April 3, 2021 21:07 IST

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भुवनेश्वर, तीन अप्रैल ओडिशा विधानसभा में शनिवार को उस वक्त अप्रिय दृश्य देखने को मिला जब विपक्षी दल भाजपा के कुछ सदस्यों ने बिना चर्चा के एक विधेयक पारित किए जाने पर नाराजगी जताते हुए अध्यक्ष के आसन की तरफ चप्पल, माइक्रोफोन और कागज फेंके।

इस घटना के बाद विधानसभा अध्यक्ष ने भाजपा के तीन विधायकों को निलंबित कर दिया और उन्हें सदन से तत्काल बाहर निकालने के आदेश दिए।

सदन द्वारा ओडिशा लोकायुक्त (संशोधन) विधेयक को बिना चर्चा के मिनटों में पारित किए जाने से नाराज भाजपा सदस्यों ने अध्यक्ष एस. एन. पात्रो के प्रति आक्रोश व्यक्त किया।

कांग्रेस सदस्यों ने भी खनन गतिविधियों में कथित तौर पर हुए भ्रष्टाचार पर चर्चा का नोटिस दिया था जिसे अध्यक्ष द्वारा खारिज किए जाने पर कांग्रेस सदस्य खफा थे।

भोजन अवकाश के पहले के सत्र में विधेयक पारित होने के तुरंत बाद भाजपा के नेता खड़े हो गए और शोर-शराबा करने लगे।

इसके बाद भाजपा सदस्यों की ओर से अध्यक्ष पर चप्पलें, माइक्रोफोन और कागज के गोले फेंके गए जो विपक्षी दलों के सदस्यों की बेंच और अध्यक्ष के आसन के पास गिरे।

इस घटना के बाद सदन में अराजकता का माहौल पैदा हो गया और विधानसभा को भोजन अवकाश तक के लिए स्थगित करना पड़ा।

सदन की कार्यवाही दोबारा शुरू होने के बाद अध्यक्ष पात्रो ने सदन में भाजपा के उपनेता बी. सी. सेठी, मुख्य सचेतक मोहन माझी और विधायक जे. एन. मिश्रा को पूरे सत्र के लिए निलंबित कर दिया और तत्काल सदन से बाहर निकालने के आदेश दिए।

ओडिशा की 147 सदस्यीय विधानसभा में भाजपा के 22 विधायक हैं। घटना का वीडियो पात्रो, संसदीय कार्यमंत्री बी. के. अरुखा, सरकार की मुख्य सचेतक प्रमिला मल्लिक, नेता प्रतिपक्ष पी. के. नाइक और कांग्रेस विधायक दल के नेता नरसिंह मिश्रा ने देखा जिसके बाद भाजपा के विधायकों को निलंबित किया गया।

निलंबित किए गए विधायकों ने इस निर्णय के विरोध में विधानसभा परिसर में मौजूद महात्मा गांधी की प्रतिमा के सामने धरना दिया।

भाजपा के नेता प्रतिपक्ष पी. के. नाइक ने संवाददाताओं से कहा, “हमारे सदस्यों को बिना उनका पक्ष सुने निलंबित कर दिया गया। हमारा धरना कल तक जारी रहेगा।”

निलंबित विधायक मिश्रा और माझी ने कहा कि उन्हें अध्यक्ष के आसन की ओर चप्पल फेंकने का कोई मलाल नहीं है। माझी ने कहा, “हमें बोलने का अवसर नहीं दिया गया। हमने कोई गलत काम नहीं किया। विधायकों द्वारा फेंकी गई वस्तुएं अध्यक्ष के आसन के पास भी नहीं गिरी।”

मिश्रा ने अध्यक्ष पर पक्षपातपूर्ण रवैया अपनाने और “बीजद सदस्य” की तरह काम करने का आरोप लगाया।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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