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लोकसभा चुनाव: शत्रुघ्न सिन्हा के ऐलान के बाद सबकी निगाहें पटना साहिब पर, क्या है बीजेपी का हाल?

By एस पी सिन्हा | Updated: March 4, 2019 17:37 IST

पिछले दिनों शत्रुघ्न सिन्हा ने 2019 का चुनाव पटना साहिब से ही लड़ने का ऐलान कर दिया है. वैसे इस कायस्थ बहुल सीट पर शत्रुघ्न सिन्हा को ज्यादा भरोसा है. लेकिन उंट किस करवट बैठेगा यह कहना अभी मुश्किल है.

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ठळक मुद्दे2014 के चुनाव में पटना साहिब सीट पर शत्रुघ्न सिन्हा विजयी रहे. उन्होंने कांग्रेस प्रत्याशी कुणाल सिंह को हराया. 2009 के चुनाव में भी शत्रुघ्न सिन्हा विजयी रहे. उन्होंने राजद के विजय कुमार को हराया.

इस वर्ष 2019 होने जा रहे लोक सभा चुनाव के मद्देनजर राजनीतिक पार्टियां अपने प्रत्याशियों को लेकर भी जोड़-तोड़  में जुट गई हैं. ऐसे में बिहार से भाजपा सांसद और मशहूर अभिनेता शत्रुघ्न सिन्हा को लेकर सियासत काफी गर्म हो चुकी है. पटना साहिब देश के 543 और बिहार के 40 संसदीय सीटों में एक है. 2008 तक पटना में एक ही संसदीय सीट हुआ करती थी, लेकिन उसी साल परिसीमन के बाद यहां दो सीटें बनाई गईं.

इनमें एक है पटना साहिब और दूसरा पाटलीपुत्र. इसे खास सीट माना जाता है क्योंकि सीने स्टार से नेता बने शत्रुघ्न सिन्हा यही से सांसद हैं. उन्हीं की तरह एक और फिल्म अभिनेता शेखर सुमन भी कांग्रेस के टिकट पर कभी यहां से चुनाव लड चुके हैं. हालांकि अब शत्रुघ्न सिन्हा भाजपा से कटे कटे हुए हैं और भाजपा के साथ लंबे समय से चल रहे मतभेदों के बीच शत्रुघ्न सिन्हा ने पटना साहिब लोकसभा सीट से ही चुनाव लड़ने का फैसला लिया है.

पटना साहिब से ही लड़ेंगे चुनाव 

उन्होंने कहा है कि वह आने वाले लोकसभा चुनाव में अपनी संसदीय सीट नहीं बदलेंगे. चाहे जैसी भी स्थितियां हों वह पटना साहिब से ही चुनाव लडेंगे. ऐसे में अब सभी की निगाहें शत्रुघ्न सिन्हा के राजनीतिक भविष्य पर टिकी होंगी.पटना साहिब लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र में 1,641,976 वोटर हैं, जिनमें 732,059 महिला और 909,917 पुरुष हैं.

भाजपा तथा कांग्रेस के लिए पटना साहिब सीट प्रतिष्ठा का सवाल बन गई है. इस सीट का महत्व हमेशा रहा है, लेकिन पिछला चुनाव खास था क्योंकि यहां से भाजपा उम्मीदवार के रूप में जहां अभिनेता से नेता बने शत्रुघ्न सिन्हा मैदान में थे तो कांग्रेस और राष्ट्रीय जनता दल (राजद) गठबंधन ने भोजपुरी फिल्म अभिनेता कुणाल सिंह को मैदान में उतारा. वर्ष 2008 से अस्तित्व में आई पटना साहिब सीट 2009 के चुनाव में भी शत्रुघ्न सिन्हा और टेलीविजन के मशहूर कलाकार शेखर सुमन के बीच मुकाबले की वजह से चर्चित हुई थी.

केंद्रीय नेतृत्व से नाराज हैं शत्रुघ्न सिन्हा 

सिन्हा ने 2014 में कुणाल सिंह को और 2009 में राजद प्रत्याशी विजय कुमार को हराया था. शत्रुघ्न सिन्हा अपनी ही पार्टी की केंद्रीय कमान से नाराज हैं. वे सार्वजनिक तौर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके कामकाज के खिलाफ बोलते रहे हैं. इसे देखते हुए कयाज लगाए जा रहे हैं कि इस बार उन्हें पटना साहिब से टिकट नहीं मिलेगा. हालांकि सिन्हा इसे फेक न्यूज करार देकर अपने टि्वटर अकाउंट पर लोगों को जता चुके हैं कि अपनी सीट से वे ही चुनाव लड़ेंगे.

रविशंकर प्रसाद के भी नाम की है चर्चा 

खबरें ये भी आती रही हैं कि भाजपा बिहार के उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी अथवा केन्द्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद को टिकट दे सकती है. वैसे भाजपा से राज्यसभा सांसद आर के सिन्हा भी इस सीट से अपना भाग्य आजमा चाहते हैं. वैसे वह खुलकर सामने नही आये हैं. अगर ऐसा होता है तो शत्रुघ्न सिन्हा किस पार्टी से चुनाव लडेंगे या निर्दलीय उतरेंगे? इस पर सस्पेंस तब तक कायम रहेगा जबतक पार्टी उम्मीदवार के नाम न तय कर दे.

पटना साहिब की राजनीतिक चौहद्दी 

पटना साहिब संसदीय क्षेत्र में बख्तियारपुर, दीघा, बांकीपुर, कुम्हरार, पटना साहिब और फतुहा विधानसभा क्षेत्र आते हैं. पटना साहिब नया संसदीय क्षेत्र बनने के बाद उसमें पुराने बाढ संसदीय क्षेत्र के दो इलाके फतुहा और बख्तियारपुर शामिल कर लिए गए. इसी के साथ फतुहा सुरक्षित से सामान्य विधानसभा क्षेत्र में बदल गया. परिसीमन के बाद पटना संसदीय क्षेत्र के तीन विधानसभा क्षेत्र-पटना पश्चिम, पटना केंद्रीय और पटना पूर्वी खत्म हो गए. इसकी जगह दीघा, बांकीपुर और कुम्हरार नए विधानसभा क्षेत्र बनाए गए.

2014 के चुनाव में पटना साहिब सीट पर शत्रुघ्न सिन्हा विजयी रहे. उन्होंने कांग्रेस प्रत्याशी कुणाल सिंह को हराया. सिन्हा को 485,905 वोट मिले जबकि कुणाल सिंह को 220,100 वोट. सिन्हा को 55.04 प्रतिशत वोट मिले थे और कुणाल सिंह को 24.93 प्रतिशत. हालांकि, भाजपा के शत्रुघ्न सिन्हा को पिछले चुनाव की तुलना में 2014 में वोट शेयर 2.26 प्रतिशत तक घट गए, लेकिन कांग्रेस का वोट शेयर 13.83 प्रतिशत बढ गया. यहां तीसरे स्थान पर जदयू के डॉ. गोपाल प्रसाद सिन्हा रहे थे, जिन्हें 91,024 वोट मिले. चौथे स्थान पर आम आदमी पार्टी की परवीन अमानुल्ला रहीं और पांचवें स्थान पर सपा के उमेश कुमार. इस चुनाव में नोटा के तहत 7,727 वोट दर्ज हुए. इस साल भाजपा ने अपनी सीट बरकरार रखी.

2009 में भी विजयी हुए थे सिन्हा 

2009 के चुनाव में भी शत्रुघ्न सिन्हा विजयी रहे. उन्होंने राजद के विजय कुमार को हराया. इस साल सिन्हा को 316,549 (57.30 प्रतिशत) वोट मिले जबकि विजय कुमार को 149,779 (27.11 प्रतिशत) वोट हासिल हुए. तीसरे स्थान पर कांग्रेस के शेखर सुमन रहे जिन्हें 61,308 (11.10) वोट मिले. चौथे स्थान पर भाकपा-माले के राम नारायण राय रहे. पांचवें और छठे स्थान पर निर्दलीय उम्मीदवार रहे थे.

पटना साहिब भाजपा के लिए अहम सीट है और अब इस बात पर बहस शुरू हो गई है कि इस सीट से अबकी बार कौन चुनाव लडेगा? जिस तरह से पिछले कुछ सालों से शत्रुघ्न सिन्हा ने भाजपा के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है, इससे यह तय माना जा रहा है कि इस बार उन्हें पार्टी किसी भी हाल में यह सीट देने नहीं जा रही है. वहीं शत्रुघ्न भी जानते हैं कि उनकी राजद प्रमुख और उनके पुत्रों के साथ नजदीकी जगजाहिर हो चुकी है. वह समय समय पर राजद के मुखिया लालू यादव के बेटे से मिलते भी रहे हैं.

यहां बता दें कि साल 2014 के लोकसभा चुनाव के बाद शत्रुघ्न सिन्हा को कैबिनेट में शामिल नहीं किया गया था, जिसके बाद से सिन्हा अपनी नाराजगी जाहिर करते आ रहे हैं. जब यह कड़वाहट बढ़ गई तो पार्टी ने पिछले दिनों कई राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव में भी उनका नाम स्टार प्रचारक से हटा लिया. इसके बाद से सिन्हा पार्टी के खिलाफ खुलकर सामने आए.

अब तो यह कयास लगाया जा रहा है कि वह राजद में शामिल हो सकते हैं. पिछले दिनों शत्रुघ्न सिन्हा ने 2019 का चुनाव पटना साहिब से ही लड़ने का ऐलान कर दिया है. वैसे इस कायस्थ बहुल सीट पर शत्रुघ्न सिन्हा को ज्यादा भरोसा है. लेकिन उंट किस करवट बैठेगा यह कहना अभी मुश्किल है. लेकिन अभी सभी की निगाहें भाजपा और शत्रुघ्न सिन्हा के अगली चाल पर टिकी हुई है.

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