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मणिपुर में उग्रवादी हमले में असम राइफल्स के कमांडिंग अफसर समेत सात की मौत

By भाषा | Updated: November 13, 2021 21:04 IST

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इंफाल, 13 नवंबर मणिपुर के चुराचांदपुर जिले में शनिवार को आईईडी विस्फोटकों और गोलियों से हुए हमले में असम राइफल्स के एक कमांडिंग अफसर, उनकी पत्नी और बेटे तथा बल के चार कर्मियों की मौत हो गई। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने यह जानकारी दी।

ताजा उग्रवादी हिंसा में शनिवार सुबह हुए हमले में असम राइफल्स की खुगा बटालियन के कमांडिंग अफसर (सीओ) कर्नल विप्लव त्रिपाठी, उनके परिवार और अन्य की हत्या कर दी गई।

अलग ‘होमलैंड’ की मांग करने वाले मणिपुर के उग्रवादी संगठन ‘पीपुल्स रेवॉल्यूशनरी पार्टी ऑफ कंगलीपक’ (पीआरईपीएके) को इस हमले का जिम्मेदार माना जा रहा है। रक्षा मंत्री ने ट्वीट किया, “मणिपुर के चुराचांदपुर में असम राइफल्स के काफिले पर कायराना हमला बेहद दुखद और निंदनीय है। देश ने 46 असम राइफल्स के सीओ सहित पांच बहादुर सैनिकों और उनके परिवार के दो सदस्यों को खो दिया है। शोक संतप्त परिवारों के प्रति मेरी संवेदनाएं। दोषियों को जल्द ही न्याय के कटघरे में लाया जाएगा।’’

हमले की निंदा करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि सैनिकों और उनके परिवार का बलिदान भुलाया नहीं जाएगा। उन्होंने ट्वीट किया, “मणिपुर में असम राइफल्स के दस्ते पर हमले की मैं कड़ी निंदा करता हूं। इसमें शहीद हुए जवानों और परिवार के सदस्यों को मैं श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं। उनकी शहादत को कभी भुलाया नहीं जा सकता। दुख की इस घड़ी में मेरी संवेदानाएं शोक संतप्त परिवारों के साथ है।’’

शनिवार को मणिपुर के पहाड़ी इलाकों की शांति भंग करते हुए एक आईईडी धमाका हुआ और पर्वत से गोलियों की बौछार की गई। असम राइफल्स के जवानों ने आड़ लेते हुए हमले का जवाब दिया।

बल की ओर से जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया, “46 असम राइफल्स के कमांडिंग अफसर कर्नल विप्लव त्रिपाठी समेत पांच सैनिकों ने कर्तव्य निर्वहन करते हुए सर्वोच्च बलिदान दिया। घटना में कमांडिंग अफसर की पत्नी और बेटे की भी जान चली गई। असम राइफल्स के महानिदेशक और सभी रैंक के अधिकारी बहादुर सैनिकों और मृतकों के परिजनों के प्रति संवेदनाएं व्यक्त करते हैं।”

इससे पहले असम राइफल्स की ओर से कहा गया था कि हमले में कमांडिंग अफसर और त्वरित प्रतिक्रिया दल के कर्मियों की मौत हुई।

असम राइफल्स देश का सबसे पुराना अर्द्धसैन्य बल है, जिसकी स्थापना 1835 में ब्रिटिश राज में हुई थी। यह प्रशासनिक रूप से गृह मंत्रालय के अधीन है, लेकिन ‘ऑपरेशनल’ नियंत्रण भारतीय सेना करती है।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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