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मायावती के वार पर अखिलेश का पलटवारः समाजवादी पार्टी अकेले लड़ेगी 2022 के यूपी विधानसभा चुनाव!

By आदित्य द्विवेदी | Updated: June 17, 2019 09:16 IST

मायावती ने गठबंधन से अलग होने का एकतरफा फैसला किया था। अब अखिलेश यादव ने भी पार्टी कार्यकर्ताओं को अगले चुनाव के लिए तैयार रहने का संदेश दे दिया है।

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ठळक मुद्देसमाजवादी पार्टी 2022 के यूपी विधानसभा चुनाव में अकेले लड़ने के लिए तैयार है।अखिलेश यादव के पिछले दो गठबंधन बुरी तरफ फेल साबित हुए हैं।

समाजवादी पार्टी 2022 के यूपी विधानसभा चुनाव में अकेले लड़ने के लिए तैयार है। मायावती की बेरुखी के बाद सपा मुखिया अखिलेश यादव ने अपने कार्यकर्ताओं को स्पष्ट संदेश दे दिए हैं। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक अकिलेश यादव ने सपा कार्यकर्ताओं के साथ पिछले हफ्ते एक बैठक की थी। रिपोर्ट के मुताबिक अखिलेश ने साफ तौर पर कहा है कि आगामी विधानसभा उपचुनाव और 2022 के चुनाव के लिए तैयार हो जाएं।

सपा प्रवक्ता राजेंद्र चौधरी ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि पार्टी अध्यक्ष ने कार्यकर्ताओं से 2022 के चुनाव की तैयारी करने को कहा है। उन्होंने कहा सपा सभी विधानसभा क्षेत्र में अपने दम पर लड़ेगी और प्रदेश में जीत की तैयारी करेगी।

मायावती ने पहले किया किनारा

विगत चार जून को बसपा सुप्रीमो मायावती ने एक वक्तव्य जारी करते हुए कहा था कि वो उत्तर प्रदेश के आगामी विधानसभा उपचुनाव अकेले लड़ेगी। साथ ही उन्होंने ये भी कहा कि अगर अपनी राजनीतिक जिम्मेदारियां पूरी करते हैं तो वो भविष्य़ में सपा के साथ काम करने को तैयार हैं। उन्होंने कहा कहा कि सपा के साथ यह 'परमानेंट ब्रेक' नहीं है।

मायावती ने आरोप लगाया था कि सपा का बेस यादव वोटर अब पार्टी के साथ नहीं है। उन्होंने कहा कि इसी वजह से समाजवादी पार्टी के प्रमुख उम्मीदवारों की हार हुई है।

लोकसभा चुनाव 2019 में सपा-बसपा ने मिलकर चुनाव लड़ा था। यह गठबंधन अपेक्षाकृत सफल नहीं रहा। सपा को महज पांच सीटों पर जीत हासिल हुई और बसपा ने 10 सीटों पर जीत दर्ज की है। इससे पहले 2017 विधानसभा चुनाव में सपा का कांग्रेस के साथ गठबंधन भी असफल साबित हुआ था।

सपा का पलटवार

समाजवादी पार्टी के एक नेता ने कहा, 'बसपा ने यह कहकह भरोसा तोड़ दिया है कि यादवों ने गठबंधन को वोट नहीं दिया। ऐसे आरोपों के बाद यादव समुदाय बीएसपी के साथ नहीं जाना चाहेगा। बिना यादवों के वोट के वो 10 सीटें कैसे जीत जाएंगी। इस गठबंधन का पार्टी को एक फायदा हुआ कि दलितों के मन से 'एंटी सपा' भावनाएं साफ हो गई हैं।'

टॅग्स :उत्तर प्रदेशअखिलेश यादवसमाजवादी पार्टीमायावतीबहुजन समाज पार्टी (बसपा)
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