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बीएसएफ के न्यायाधिकार क्षेत्र बढ़ाने के केंद्र के फैसले के खिलाफ शिअद का रोड शो

By भाषा | Updated: October 29, 2021 20:48 IST

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अमृतसर, 29 अक्टूबर शिरोमणि अकाली दल (शिअद) ने केंद्र द्वारा सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) का न्यायाधिकार क्षेत्र बढ़ाने के खिलाफ शुक्रवार को रोड शो किया और दावा किया कि मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी भी इस (कानून) पर सहमत है।

उल्लेखनीय है कि केंद्र सरकार ने हाल में बीएसएफ अधिनियम में संशोधन किया है और पंजाब, पश्चिम बंगाल और असम में अंतरराष्ट्रीय सीमा से 50 किलोमीटर के दायरे में बल को तलाशी लेने, जब्ती करने और गिरफ्तारी करने का अधिकार दिया है।

भाजपा को छोड़ पंजाब की सभी राजनीतिक पार्टियों ने राज्य विधानसभा का विशेष सत्र बुलाकर बीएसएफ के न्यायाधिकार क्षेत्र बढ़ाने के लिए केंद्र द्वारा जारी अधिसूचना के खिलाफ प्रस्ताव पारित करने का फैसला किया है।

शिअद ने केंद्र के इस फैसले के खिलाफ अटारी सीमा से अमृतसर के गोल्डन गेट तक रोड शो किया। पार्टी प्रमुख सुखबीर सिंह बाद ने संवाददाताओं से कहा कि केंद्र के फैसले के खिलाफ बड़ी संख्या में लोग बाहर आए हैं, जो स्पष्ट संकेत देता है कि वे ‘‘सीमा सुरक्षा बल के न्यायाधिकार क्षेत्र में विस्तार कर संघीय ढांचे को क्षीण करने की कोशिश को बर्दाश्त नहीं करेंगे।’’

उन्होंने ट्वीट किया, ‘‘ संघवाद को बचाने और कांग्रेस सरकार व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी द्वारा भारत सरकार के समक्ष आत्मसमर्पण करने और पंजाब में केंद्र का न्यायाधिकार क्षेत्र विस्तार करने पर नाराजगी प्रकट करने के लिए शिअद द्वारा बुलाए गए विरोध मार्च में हजारों लोग शामिल हुए और पंजाबियों ने मानवता का समुंदर बना दिया।’’

बादल ने एक अन्य ट्वीट में दावा किया कि अटारी सीमा से गोल्डन गेट तक के छह किलोमीटर के रास्ते में आयोजित विरोध मार्च में 20 हजार मोटरसाइकिल सवारों ने हिस्सा लिया।

उन्होंने कहा कि पंजाबी केंद्र के अधीन राज्य को लाने की साजिश को सफल नहीं होने देंगे।

बादल ने कहा कि मुख्यमंत्री को तस्वीर खिंचवाने में शामिल होने के बजाय बात करनी चाहिए। उन्हें पंजाब मंत्रिमंडल से सरकारी आदेश जारी करवाना चाहिए कि राज्य प्रशासन अंतरराष्ट्रीय सीमा से 15 किलोमीटर के दायरे के बाहर बीएसएफ को पुलिस की ड्यूटी करने की अनुमति नहीं देगा।

बादल ने कहा, ‘‘ यह कड़ा फैसला लेने का समय है। राज्य की विधानसभा में प्रस्ताव पारित करने से संकट का समाधान नहीं होगा।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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