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शिअद ने कृषि कानूनों के खिलाफ निकाला मार्च, सुखबीर,हरसिमरत तथा अन्य हिरासत में

By भाषा | Updated: September 17, 2021 17:50 IST

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नयी दिल्ली,17 सितंबर केन्द्र के तीन नए कृषि कानूनों के पारित होने के एक वर्ष पूरे होने पर शुक्रवार को शिरोमणि अकाली दल (शिअद) के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल के नेतृत्व में सैंकडों कार्यकर्ताओं ने यहां कृषि कानूनों के खिलाफ विरोध मार्च निकाला,जिसके बाद बादल ,पूर्व केंद्रीय मंत्री हरसिमरत कौर बादल और पार्टी के कई अन्य नेताओं को दिल्ली पुलिस ने हिरासत में लिया। इन नेताओं को बाद में रिहा कर दिया गया।

शिअद केन्द्र में सत्तारूढ़ गठबंधन में सहयोगी था, लेकिन नए कृषि कानूनों के विरोध में वह सरकार से अलग हो गया। शिअद 17 सितंबर को ‘काला दिवस’ के तौर पर मना रहा है।

विरोध मार्च गुरुद्वारा रकाबगंज से संसद भवन तक निकाला गया।

शिअद अध्यक्ष ने ट्वीट किया,‘‘ आज का विरोध मार्च न केवल किसानों के असंतोष का प्रतीक है, बल्कि इसे एक ऐतिहासिक घटना के रूप में भी याद किया जाएगा, जिसने अत्याचार की जड़ पर प्रहार किया। किसानों को न्याय दिलाने के लिए नए विद्रोह की शुरुआत के तौर पर इसमें एकजुट हों।’’

पुलिस उपायुक्त (नई दिल्ली) दीपक यादव ने कहा कि शिअद अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल, पूर्व केंद्रीय मंत्री हरसिमरत कौर बादल और पार्टी के 15 अन्य नेताओं को संसद मार्ग थाने में हिरासत में रखा गया था।

पुलिस के अनुसार नेताओं को कोविड-19 संबंधी दिशानिर्देशों का उल्लंघन करते हुए विरोध मार्च निकालने के लिए हिरासत में लिया गया था। बाद में उन्हें छोड़ दिया गया।

विरोध के कारण राष्ट्रीय राजधानी के कई हिस्सों में यातायात बाधित हुआ,जिनमें लुटियन्स दिल्ली और आईटीओ शामिल हैं।

पूर्व केंद्रीय मंत्री हरसिमरत कौर बादल ने एक ट्वीट में कहा कि विरोध मार्च में लोगों की बड़ी संख्या में भागीदारी जनता के गुस्से को दर्शाती है।

उन्होंने कहा, ‘‘ किसान एक साल से दिल्ली की सीमा पर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं, केंद्र सरकार प्रदर्शनों को खत्म कराने पर तुली हुई है। हमें राजग छोड़ने पर गर्व है। अकाली दल निरंकुशता का विरोध करना जारी रखेगा।’’

शिअद प्रवक्ता दलजीत सिंह चीमा ने आरोप लगाया कि दिल्ली पुलिस ने उनके विरोध मार्च को रोकने का प्रयास किया। उन्होंने कहा,‘‘नई दिल्ली में यह एक अघोषित आपातकाल है।’’

गौरतलब है कि पंजाब, हरियाण और पश्चिमी उत्तर प्रदेश से बड़ी संख्या में किसान केन्द्र के नए कृषि कानूनों के विरोध में नौ माह से अधिक वक्त से प्रदर्शन कर रहे हैं।

किसान इन कानूनों को रद्द करने की मांग कर रहे हैं। वहीं, सरकार का कहना है कि इससे किसानों को लाभ होगा।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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