Rohini Acharya Nitish Kumar: नीतीश कुमार जी की कोई बहुत कमजोर नस भाजपा ने जरूर दबा रखी है?, लालू प्रसाद यादव की बेटी रोहिणी आचार्य ने एक्स पर पोस्ट किया
By सतीश कुमार सिंह | Updated: March 5, 2026 13:18 IST2026-03-05T13:14:15+5:302026-03-05T13:18:40+5:30
Rohini Acharya Attacks Nitish Kumar: कांग्रेस ने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की राज्यसभा जाने की तैयारी की घोषणा के बाद बृहस्पतिवार को आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी द्वारा तख्ता पलट किया गया है और यह जनता के साथ विश्वासघात है।

Rohini Acharya Attacks Nitish Kumar
पटनाः बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने गुरुवार (5 मार्च, 2026) को सोशल मीडिया पर पुष्टि की कि वह "इस बार होने वाले चुनावों में राज्यसभा सदस्य बनने के इच्छुक हैं"। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि राज्य का अगला मुख्यमंत्री कौन होगा और आने वाले दिनों में राज्य की राजनीति में कुमार के बेटे निशांत कुमार की क्या भूमिका होगी। नीतीश कुमार आज नामांकन पत्र दाखिल करेंगे। बिहार के सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहने का उनका कार्यकाल समाप्त होगा। इस बीच राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव की बेटी रोहिणी आचार्य ने एक्स पर पोस्ट लिख तंज किया है।
"अपनों" के साथ बारम्बार बेवफाई करने वाले नीतीश कुमार जी ..
— Rohini Acharya (@RohiniAcharya2) March 5, 2026
खुद के गर्त में धकेले जाने और अपनी बदहाली के आप खुद जिम्मेदार हैं
आपके साथ आज जो हो रहा आप उसके ही हक़दार हैं ..
आज अवसरवादिता के शिखर पुरुष श्री नीतीश कुमार जी को जैसा निर्णय लेने के लिए भाजपा के द्वारा मजबूर किया गया… pic.twitter.com/KP30q2sFqI
"अपनों" के साथ बारम्बार बेवफाई करने वाले नीतीश कुमार जी .. खुद के गर्त में धकेले जाने और अपनी बदहाली के आप खुद जिम्मेदार हैं आपके साथ आज जो हो रहा आप उसके ही हक़दार हैं ..
आज अवसरवादिता के शिखर पुरुष नीतीश कुमार जी को जैसा निर्णय लेने के लिए भाजपा के द्वारा मजबूर किया गया, ये तो 28 जनवरी, 2024 को ही तय हो गया था, जब नीतीश कुमार जी ने गुलाटी मारने की अपने जगजाहिर कौशल की पुनरावृत्ति करते हुए महागठबंधन/इंडिया अलायन्स का साथ छोड़ा था।
कुर्सी से चिपके रहने की अपनी स्वभावतः मज़बूरी की वजह से ही आज नीतीश कुमार जी उस भाजपा के हाथों की कठपुतली बन चुके हैं, जो अपने सहयोगियों की राजनीतिक कब्र खोदने और उनको दफनाने के लिए ही जानी जाती है। महाराष्ट्र में एकनाथ शिंदे जी का जो हश्र भाजपा ने किया, नीतीश कुमार जी उससे भी नहीं चेते और अपने पुराने समाजवादी साथियों के बार-बार आगाह करने के बावजूद खुद ही कब्र सरीखी भाजपा की गोद में जा बैठे।
अपने ही विनाश के लिए भाजपा के द्वारा जारी तुगलकी फरमान पर अपनी रजामंदी देने वाले नीतीश कुमार जी के बारे में अब दो बातें तो जाहिर एवं साबित होती हैं। नीतीश कुमार जी की सोचने - समझने की शक्ति पूरी तरह से क्षीण हो चुकी है और नीतीश कुमार जी की कोई बहुत कमजोर नस भाजपा ने जरूर दबा रखी है।