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जंतर-मंतर पर ‘किसान संसद’ के दूसरे दिन एपीएमसी बायपास अधिनियम के खिलाफ प्रस्ताव पारित किया गया

By भाषा | Updated: July 23, 2021 22:25 IST

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नयी दिल्ली, 23 जुलाई संसद के नजदीक जंतर-मंतर पर ‘किसान संसद’ में दूसरे दिन शुक्रवार को आमसहमति से एक प्रस्ताव पारित कर एपीएमसी बायपास अधिनियम को रद्द करने की मांग की गई।

एक बयान में कहा गया है कि प्रस्ताव में एपीएमसी बायपास अधिनियम या कृषक उपज व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सरलीकरण) अधिनियम के क्रियान्वयन को उच्चतम न्यायालय द्वारा स्थगित किये जाने से पहले जून 2020 से जनवरी 2021 तक पड़े इसके ‘प्रतिकूल प्रभाव’ पर गौर किया गया।

किसान संसद में शुक्रवार की कार्यवाही संसद के कामकाज की तरह ही हुई, जिसका मॉनसून सत्र चल रहा है।

किसान संसद के दूसरे दिन संयुक्त किसान मोर्चा ने एक स्पीकर (हरदेव अर्शी), एक डिप्टी स्पीकर (जगतार सिंह बाजवा) और एक कृषि मंत्री भी नियुक्त किया।

‘कृषि मंत्री’ रवनीत सिंह बरार (37) ने किसान संसद में अपने इस्तीफे की पेशकश की क्योंकि वह किसानों के मुद्दे का हल करने में नाकाम रहे और उन्हें कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे सके।

प्रस्ताव में कहा गया है कि किसानों को कहीं अधिक संख्या में संचालित होने वाली मंडियों की जरूरत है ना कि कम संख्या में।

प्रस्ताव में केंद्रीय अधिनियम को फौरन रद्द करने की मांग करते हुए दावा किया गया कि इसे संविधान की अनदेखी की है। प्रस्ताव में सरकार से मंडी प्रणाली में सुधार लाने की भी मांग की गई ताकि किसानों के हितों की रक्षा हो सके।

किसी प्रकार की अप्रिय घटना को रोकने के लिए अर्द्धसैनिक बल और पुलिसकर्मी प्रवेश द्वार पर भारी-भरकम अवरोधकों के साथ प्रदर्शन स्थल पर तैनात किए गए हैं। किसानों का विरोध प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहा।

किसान संसद में एक घंटे का प्रश्नकाल भी रखा गया था, जिसमें कृषि मंत्री पर सवालों की बौछार की गई, जिन्होंने केंद्र के नये कृषि कानूनों का बचाव करने की पुरजोर कोशिश की।

मंत्री ने संसद को बताया कि कैसे कोवि़ड वैश्विक महामारी के बीच, किसानों को उनके घरों को लौटने और उनसे टीका लगवाने का अनुरोध किया गया था। हर बार जब मंत्री संतोषजनक जवाब देने में विफल रहते, सदन के सदस्य उन्हें शर्मिंदा करते, अपने हाथ उठाते और उनके जवाबों पर आपत्ति जताते।

बाजवा ने बाद में मीडिया से कहा,‘‘ कृषि मंत्री सवालों के जवाब देने में नाकाम रहे,जिसके चलते संसद के सदस्यों ने मंत्री को शर्मिंदा किया,जिससे बाधा हुई।’’

उन्होंने कहा,‘‘ प्रश्न पूछा गया कि जब प्रधानमंत्री ने स्वयं इस तथ्य पर जोर दिया है कि न्यूनतम समर्थन मूल्य था, यह वर्तमान में भी है और यह रहेगा तो फिर इसे कानून बनाने में क्या समस्या है। अगर सभी तीनों कृषि कानून किसानों के लिए बनाए गए हैं तो उन्हें रद्द करके और किसानों से विचार विमर्श करके दोबारा बनाया जाए।’’

अर्शी खान ने कहा कि किसान संसद की कार्यवाही अल्प समय के लिए स्थगित की गई और शुक्रवार की कार्यवाही भी ‘‘उसी प्रकार से हुई जैसे असल संसद में चलती है।’’

संसद में जारी मॉनसून सत्र के साथ केंद्र के तीन विवादास्पद कृषि कानूनों के खिलाफ विरोध प्रदर्शित करने के लिए 200 किसानों का एक समूह बृहस्पतिवार को मध्य दिल्ली के जंतर-मंतर पहुंचा।

दिल्ली के उपराज्यपाल अनिल बैजल ने जंतर मंतर पर अधिकतम 200 किसानों को नौ अगस्त तक प्रदर्शन की विशेष अनुमति दी है। जंतर-मंतर संसद परिसर से महज कुछ मीटर की दूरी पर है।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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